क्या बेटा डॉक्टर बनेगा या इंजीनियर?
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|   Jul 15, 2017
क्या बेटा डॉक्टर बनेगा या इंजीनियर?

एक नोवी या दसंवी में पड़ने वाला बच्चा किसी के घर गए हों या किसी पार्टी में गए हों, यह एक सवाल जो उससे हमेशा पुछा जाता है - डॉक्टर बनोगे या इंजीनियर?

हमारे देश में मज़े की बात यह है की अगर एक छोटा बच्चा कहता है की वह बड़ा होकर अध्यापक, क्रिकेटर, डांसर या जादूगर बनाना चाहता है तो उसे हँस के टाल देते हैं पर एक दसवीं के बच्चे से आज भी डॉक्टर या इंजीनियर की उम्मीद रखी जाती है. अगर बच्चे किसी और चीज़ में ज्यादा रूचि रखते हैं तो उन्हें कई सवालों का जवाब देना पड़ता है .

कुछ दिन पहले हमने अपने एक दोस्त से बोला की हम अपनी बेटियों को उनकी रूचि के हिसाब से जो वह करना चाहती हैं, वह करने देंगे, तो उस दोस्त ने हमें ऐसे देखा जैसे हमने कोई असंभव बात बोली हो. मुझे यह सोचकर सबसे ज्यादा दुःख होता है की आज भी हमारे आस पास ऐसे लोग हैं जिनकी विचारधारा बदली नहीं है और वह लोग वही पुराने विचारों में अभी भी फसे हैं.

हर साल बहुत से बच्चे प्रवेश परीक्षा देते हैं और कुछ सफल नहीं भी होते और माँ बाप उनकी मानसिकता समझने की जगह उन्हें ही दोष देते हैं. यही कारण है कि हमारे देश में हम रोज़ ऐसी ख़बरें अख़बारों में पड़ते हैं जहां बच्चा मा बाप के इस दबाव को झेल नहीं पाता और आखिर कर टूट जाता है. बच्चों को अपनी रूचि और क़ाबलियत के हिसाब से अपना क्षेत्र चुनने कि आज़ादी होनी चाहिए. वह अगर अपनी रूचि के क्षेत्र में नहीं होगा तो बच्चा कभी खुश नहीं रहेगा और ऐसा करने से आप उसकी रचनात्मकता ख़तम कर रहे हैं.

फोटोग्राफर बनकर सारी दुनिया में घूमना, दुनिया का सबसे बड़ा गायक बनाना या क्रिकेटर बनकर अपने देश का नाम ऊँचा करने के सपनों को पहले रौंद दिया जाता है.

आज मैं अपनी बेटियों को कहना चाहती हूँ कि -

१. तुम जो कुछ भी ज़िन्दगी में करना चाहती हो, मैं और तुम्हारे पापा हमेशा तुम्हारे साथ हैं.

२. हम दोनों कोशिश करेंगे की तुम अपने सभी सपने पूरे कर सको.

३. एक वादा जो हमें चाहिए वह यह है की तुम जिस भी क्षेत्र में जाओ, उसमे अपना १०० % दोगी.

४. ज़िन्दगी में बहुत से अवसर मिलेंगे और हर मोड़ पर एक नयी चुनौती मिलेगी, अपने आप पर भरोसा रखना और अपने पंख फैलाकर खुले आसमान में उड़ना.

५. हम तुम्हारा साथ हमेशा देंगे और तुम्हे गलत रास्ते पे जाने से रोकेंगे पर कभी अपनी आकाँक्षाओं का बोझ तुम पर नहीं डालेंगे.

आज मैं आप सब से यह सवाल पूछती हूँ कि क्या आप अपने बच्चे को बोलते हैं कि वह डॉक्टर या इंजीनियर ही बने बड़ा होकर?

क्या आप दुसरे क्षेत्रों के बारे में उसके में उसके मन में गलत धारणाए डाल रहे हैं?

यह सब करने से परिणाम क्या होगा कभी आपने सोचा है?

अगर वह आपके सपने पूरे करने कि कोशिश में सफल नहीं हो पाया तो क्या होगा?

आजकल बहुत अवसर हैं इसलिए अपने बच्चों को खुले आसमान में जीने दीजिये. उनका मार्गदर्शन कीजिये, उनकी ऊँगली पकड़कर रास्ता दिखाइए पर अपनी आकाँक्षाओं और सपनों का भोज उनपर मत डालिये.

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