पडोसी (कहानी तेरी-मेरी )
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|   Jul 30, 2017
पडोसी (कहानी तेरी-मेरी )

बात थोड़ी पुरानी है यही कोई 6 साल पहले की ! मेरी बेटी अम्बिका के फाइनल एग्जाम चल रहे थे | हम दोनों की अंडरस्टैंडिंग ऐसी थी कि जब भी उसके एग्जाम होंगे मैं और वो साथ में जागते थे| वो पढाई करती थी और मैं अपने ऑफिस के काम कर लिया करती थी | जब भी नींद हमारे पास भटकते भटकते आ जाती तो मैं फटाफट कॉफी बना लाती | कॉफी की गर्मी हमें फिर से ऊर्जा से भर देती | मैं उसे बीच -बीच में  ब्रेक देती ताकि वो थोड़ी फ्रेश हो जाये | इस ब्रेक में हम कोई गाना सुन लेते या कोई मज़े वाली बात कर लेते |

बचपन से ये हमारा सिलसिला चला आ रहा था | तब तो मैं ही उसे पढ़ाया करती थी पर अब वो जो पढ़ती है ,मैं उससे पूछ लिया करतीं हुं | सारी पढाई खत्म होने के बाद वो मेरे साथ ही सो जाया करती | सोने से पहले हमेशा सवाल करती, मैं पास कर जाऊंगीं न?और मैं बोलती हाँ बेटा, अब आराम से जाओ | धीरे धीरे उसके सर पर हाथ फेरते हुए मैं उसे सुला देती | अब तो इसकी आदत हो गयी थी मुझे ,पास होने के लिए भी चिंता करने वाली मेरी बेटी ने हमेशा 90s में ही मार्क्स लाये | पर उसका सवाल तब भी यही था, कि पास कर जाउंगी न और आज भी जब वह मेडिकल 2nd ईयर में है ,तो फ़ोन पर वही सवाल करके सोती है | :) :) मेरा जवाब आज भी यही रहता है |

ऐसे ही हम जब 6 साल पहले स्टडी ब्रेक रहें थे कि अचानक पड़ोस के घर से झगडे की आवाज़ आने लगी जो इतनी तेज़ थी कि अनसुना करना मुश्किल था | जल्दी बात समझ में आ गयी | अच्छा था कि अम्बिका का एग्जाम में 2 दिन का गैप था इसलिए इससे ज्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा |

इस घर की लड़ाई से पता चला कि यह लड़ाई पति ,पत्नी, सास ,ससुर बीच हो रही थी |बात सिर्फ इतनी थी कि ससुर के दोस्त आने पर बहु ने चाय नहीं बनाई क्योकि वह बच्चे को दूध पिला रही थी | चाय, सासु माँ बनाई और बैठक में लेकर गयी और उनके दोस्त ने मज़ाक में कह दिया कि " क्या भाभी जी आज भी आपको आराम नहीं " | बात ससुर जी को तीर सी लगी और बोल पड़े "आजकल की जनरेशन से क्या उम्मीद कर सकतें है ??बात इस बार बहु को तीर सी लगी | पर जबान उसने तब खोला जब पति शिफ्ट करके रात डेढ़ बजे घर पहुंचा| इतने देर से खामोश घर को चीखने की भी आवाज़ सुनाई पड़ी | सच पूछे तो हमें न ससुर आवाज़ सुनाई पड़ी न पतिदेव की ! बहु ज़ोर ज़ोर से बोले जा रही थी कि पापाजी ने हमें यह कह दिया वो कह दिया और सास समझा रही थी कि पापाजी की उम्र हो गयी है, सठिया गए है | ऋचा मेरी बात सुनो,भूल जाओ ,आज से पापा जी का काम हम ही कर दिया करेंगे |देखो बाबू उठ गया है, वो भी रो रहा है और रितेश को भी कहो हाथ मुँह धोकर कुछ खा ले | निश्चिंत से सो जाओ | पर बहु कुछ सुनने को तैयार नहीं | सास ने ससुर को पहले से बहु का चाय न बनाने की वजह बता दी थी ,इसलिए ससुर जी को काटो तो खून नहीं |

जब ये सिलसिला ज्यादा देर तक चला तो मुझसे रहा नहीं गया| मैंने उनका दरवाज़ा ठकठकाकर उन्हें शांत रहने को कहा और बहु से यह कह डाला कि अगर यही बात उसके पापा ने कही होती तो क्या वो सबको ऐसे ही अपने घर में परेशान करतीं और ससुर जी को बोल डाला कि अगर यही चूक आपकी बेटी से होती तो क्या आप ऐसे ही प्रतिक्रिया देते?

मैं मानती हूँ कि मैने अपनी सीमा लाँघ कर दोनों को यह बात कह डाली |

सच पूछिए तो सारा मामला प्रतिक्रिया से जुड़ा था।

1)पहली प्रतिक्रिया मेहमान महाशय की है ,जिन्होंने चाय पीने की जगह, किसने बनाई है ?उसपर एक्सपर्ट कमेंट देना उनको बेहद ज़रूरी लगा |

2) दूसरी प्रतिक्रिया जो ससुर जी से आयी कि वो जोश में और रोष में ,होश खो बैठे थे|

3) तीसरी प्रतिक्रिया बहु की थी जिसका कोई कसूर नहीं था ,पर रात में पति के आने का इंतज़ार करके तमाशा करना कही��� से समझदारी नहीं थी| पति काम से देर रात लौटा था उसे घर में शांति चाहिए थी ,बच्चा जो सो गया था ,हंगामे से उठ गया था |

उसे यही बात ससुर जी से कहकर मन साफ कर लेना था कि वो मुन्ने के पास थी | वैसे भी सास से असली बात पता चलने के बाद ससुर जी का मुँह तो वैसे ही ग्लानि से भरा हुआ था बस शायद बड़े होने के कारण उनसे झुका नहीं जा रहा था| बस चुप्पी साध ली थी|इतना काफी था स्थिति को समझने के लिए| पति के नज़र में बेचारी बनने की धुन में वो कुछ ऐसा कर गयी जो उसे न करना था |

आज अम्बिका की पढाई न हो पाई | मुझे भी नींद बड़ी देर से आयी | सोच में पड़ गयी कि जब घर की परिस्थियाँ इतनी बुरी नहीं होती और सब कुछ समान्य सा चल रहा होता है ,हम प्रतिक्रिया कर कैसे अच्छे खासे माहौल को बिगाड़ डालतें है | थोड़ी सी समझदारी और कभी कभी हमारी ख़ामोशी भी कितना महत्वपूर्ण हो जाती है | अम्बिका के सर पर हाथ फेरते फेरते कब नींद ने मुझे अपने आगोश में ले लिया पता ही नहीं चला |

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