बेटा साल भर बाद घर लौटा तो मिला माँ का कंकाल
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|   Aug 10, 2017
बेटा साल भर बाद घर लौटा तो मिला माँ का कंकाल

अख़बार मैं एक खबर पड़ी की एक बेटा जो विदेश मैं बस गया था और जिसकी माँ अकेली मुंबई के एक पाश इलाके मैं रहती थी उसे वो करीब साल भर बाद मिलने आया ,उसने बार बार घंटी बजायी पर किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला ,तो उसने डूप्लीकेट चाबी से दरवाज़ा खोला और घर के अंदर घुसा ,पर अंदर जाते ही उसने जो दृश्य देखा उसने उसके रोंगटे खड़े कर दिए ,अंदर उसे एक कंकाल मिला ...जो उसकी माँ का था ,

उसके पिता की मोत चार साल पहले हो चुकी थी और माँ घर पर अकेली रहती थी ,यहाँ तक की बेटे ने अपनी माँ से आखिरी बार बात भी करीब साल भर पहले की थी ,उस समय उसकी माँ ने कहा वो अकेले नहीं रह सकती उसे वृद्धाश्रम छोड़ आये क्युकी वो अकेले बैठे डिप्रेशन मैं चली जाती हैं ,पर बेटे पर इसका कोई असर नहीं हुआ ,

बताया जा रहा हैं महिला की मोत भूख और कमजोरी की वजह से हुई हैं ....इस खबर को मेंने कई बार पढ़ा ,कई सवाल भी मेरे दिमाग मैं आये ,,,,महिला ने जब साल भर पहले अपने बेटे से कहा की मैं बहुत अकेली हु मैं यहाँ नहीं रह सकती और शायद बेटे ने यहाँ वहाँ की कुछ बातें करके फ़ोन रख दिया होगा उसके बाद माँ पर क्या बीती होगी ,क्या उसने फिर दुबारा कभी अपनी माँ से बात नहीं की ,ये कैसा बेटा था,

अगर कभी फ़ोन किया भी हो और माँ ने फ़ोन नहीं उठाया हो ,,वो चैन से कैसे बैठे रहा ,क्या इतने बड़े एरिया मैं कोई दोस्त ,रिश्तेदार नहीं था जिससे वो कह सके की उसकी माँ के बारे मैं पता करे ,,,,क्या उस एरिया के दूध वाले ,अख़बार वाले कोई नहीं थे जो ये महसूस करते की एक महिला जो जाने कितने सालो से उनसे सामान लेती हैं वो अचानक कहा गयी ,उस महिला के आस पड़ोस वाले,कोई संगी साथी ,जिन्हे वो कभी तो दिखती होगी ,,कोई तो होगा,फिर ऐसा कैसे हो गया ,किसी को शव के सड़ने की बदबू नहीं आयी ,,,

यहाँ मैं जिस इलाके की बात कर रही हु वो पाश इलाका हैं ,उस महिला के पास दो फ्लैट थे 5-6  करोड़ की कीमत वाले,,,पर क्या उसका इस दुनिया मैं कोई नहीं था ,कोई जानकर कोई मित्र,,,जो उसकी खबर लेता ...क्या  इतने टाइम मैं अपनी माँ की चिंता नहीं हुयी की माँ जो आखिरी बार इतनी दुखी लग रही थी वो कैसे होगी ,कही उसे कुछ हो तो नहीं गया ,उसकी तबीयत भी ठीक होगी या नहीं

सोचने वाली बात हैं एक महिला अपने ही घर मैं मर गयी पर उसे किसी ने नहीं ढुंढा ,,जबकि वो वही थी जहाँ उसे होना चाहिए था उसके अपने घर ,,शायद इस अहसास ने उसे मार डाला की अब उसका कोई महत्व नहीं हैं ,,,किसी को उसकी कोई ज़रुरत नहीं हैं ,,,अब बस वो एक बोझ हैं जिसे उसे खुद ही ढ़ोना हैं ,,,हम उस महिला की मनोस्थिति समझ सकते हैं ,,,कितने डिप्रेशन मैं चली गयी होगी वो ,,,,की शायद उसकी खाना खाने की इच्छा ही ख़तम हो गयी होगी ,,,उसे बिस्तर पर पड़े पड़े दम तोड़ देना ज्यादा आसान लगा होगा ,,,

इससे पहले भी मेट्रो सिटीज मैं बुजुर्गो की अचानक मोत के कई मामले सामने आये हैं ,,,मुंबई पुलिस ने ऐसे ही बुजुर्गो के लिए हैल्प लाइन बनायीं हैं कई बार बुजुर्ग उस हैल्प लाइन पर फ़ोन सिर्फ इसलिए करते हैं क्युकी उन्होंने कई दिनों से किसी से बात नहीं की होती हैं ,,,,

एक साल से भी ज्यादा समय तक किसी महिला का गायब होना कोई छोटी बात नहीं हैं ,,,,ये एक माँ की मोत नहीं हैं बल्कि पूरे समाज की मोत हे.

सूत्��� मीडिया व् अन्य वेबसाइट

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ब्लॉग पढ़ने के लिए धन्यवाद ,

पूजा अग्रवाल

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