अधूरी कॉल
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|   Jun 29, 2017
अधूरी कॉल

मेरे जीवन में सबसे ज्यादा लगाव मेरे पिता से रहा,बेहद सख्त सभी डरते लेकिन मुझे नही लगता था,शुगर और हार्ट के पेशेंट होने की वजह से मैं हमेशा उनकी हेल्थ को लेकर परेशांन रहती थी ,दिन में एक बार मम्मी के पास फोन करके हाल चाल जरूर लेती,एक संडे सुबह मम्मी के पास फोन किया तो बताई,आज तुम्हारे डैडी की तबियत कुछ ख़राब है बहुत देर से उठे,मैंने तुरंत भाई के पास फोन किया कि डैडी से बात करो उन्हें लखनऊ ले आओ,दीदी को भी फोन करके बताया डैडी से बात नही की लगा डिस्टर्ब होंगे,मम्मी से कई बार बात करती रही, भाई ने डैडी से बात करके बताया कि उनकी तबियत तो ठीक नही है,लेकिन लखनऊ आने को तैयार नही है कह रहे है दवा ली है आराम हो जायेगा,मैंने डैडी को शाम 7 बजे फोन किया रिंग जा रही थी,लेकिन मैंने तुरंत काट दिया,डैडी डिस्टर्ब न हो ,........रात मे देर तक नींद नही आयी,सुबह 3 बजे फिर आँख खुली डैडी के बारे में ही मन लगा था,.......खुद को समझाया सब ठीक होगा ,सुबह 6 बजे ही फोन बजने लगा उठाया तो चाचा का फोन था रोते हुए बताया भैया नही रहे......मैं सन्न रह गयी।बहुत देर तक मुझे यकीन ही नही हुआ थोड़ी देर बाद दुबारा कॉल किया, फिर एहसास हुआ कि ......डैडी 20 दिन पहले लखनऊ आकर आँख आप्रेशन करवाये थे,बातों बातों में कह रहे थे,मेरे पास समय बहुत कम है मैंने डैडी से कहा आप ऐसा क्यों कह रहे है,जाते समय डैडी कार में बैठ गए थे ,जबतक मैं पूजा घर से आयी मैंने बस धीरे से हाथ हिलाया,मैं आखिरी बार डैडी को देखीं थी........डैडी 69की उम्र में चले गये।29 फ़रवरी 2016 काल बन कर आई।डैडी को हमेशा के लिए हमसब से दूर कर दिया ,मम्मी खामोश रहने लगी है।मैं कई महीनों तक नार्मल नही हो पायी, बहुत याद आती है ,कभी लगता है काश ये कोई बुरा सपना हो ,डैडी फिर से मिल जाते,हमारी जिंदगी की खुशियां हमेशा के लिए चली गयी।डैडी को उस शाम फोन कर के कट कर देने का अफ़सोस जीवन भर रहेगा।

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