क्या आप भी वर्किंग मदर होने के अपराधबोध (Guilt) की भावना से ग्रस्त हैं ??
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|   Aug 02, 2017
क्या आप भी वर्किंग मदर होने के अपराधबोध (Guilt) की  भावना से ग्रस्त हैं ??

एक औरत को अपनी ज़िन्दगी में तीन बिलकुल अलग –अलग पहलुओं से गुज़रना पड़ता है | पहला चरण होता है , जब वह एक बेटी होती है, जैसे – जैसे वह बड़ी होती है वह अपने परिवार को प्यार ,केयर ,सपोर्ट करके एक साथ बाँधना सीखती है |  दूसरा चरण तब शुरू होता है जब वह वैवाहिक बंधन में बंधती है और किसी की पत्नी बनती है | पत्नी बन कर वह न केवल वह अपने मायके, बल्कि अपने ससुराल पक्ष की भी परवाह करती है , और केयर करती है | तीसरे चरण में वह , माँ बनती है और उसका प्रमुख ध्यान अपने बच्चे की तरफ हो जाता है | माँ बनने के बाद उसकी पूरी दुनिया अपने बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है |

 हालांकि पुरुष भी अपनी ज़िन्दगी में , लगभग इन्ही तीन चरणों से गुज़रते हैं, एक बेटा , पति और पिता की भूमिका निभाते हैं , परन्तु हमारे भारतीय समाज में बच्चों को सँभालने की लगभग पूरी ज़िम्मेदारी माँ के कन्धों पर ही होती है , और पिता पर घर की आर्थिक ज़िम्मेदारी पूरी करने भार होता है | हालांकि बदलते समय के साथ स्थिति कुछ बदली ज़रूर है , औरतों को आज केवल एक माँ, पत्नी और बेटी तौर पर नहीं देखा जाता | आज वह आत्मनिर्भर हैं , अपनी सोच को आवाज़ दे सकती हैं | उनकी इच्छाएँ और निर्णय, केवल रसोई और घर तक ही सीमित नहीं रह गए हैं |  हालाँकि समाज आज भी औरतों को पुरुषों के समान दर्जा नहीं देता , परन्तु वह समय अब दूर नहीं है, जब उन्हें समाज में बराबर दर्जा दिया जायेगा | ऐसे बहुत से उदहारण हैं , जहाँ आजकल की महिलाऐं बहुत ऊँचाइयों को छू रही हैं , वह केवल  बच्चों के पालन पोषण को अपनी ज़िन्दगी का उद्देश्य नहीं मानती | आजकल की  महिलाओं के लक्ष्य, उनकी सोच पुरुषों से ज्यादा भिन्न नहीं है | वह भी बाहर काम करके अपने घर को आर्थिक रूप से सपोर्ट करना चाहती हैं , उन्हें भी अपने लिए कुछ कर पाने की आज़ादी चाहिए |

यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है की, सिर्फ इसलिए की एक महिला घर से बाहर काम करके अपने घर को आर्थिक रूप से सपोर्ट करना चाहती है , उसके लिए अपने परिवार का महत्त्व कुछ कम नहीं होता है | उनसे यह उम्मीद की जाती है की वह एक वर्किंग वीमेन होने के साथ - साथ अपने घर , परिवार और बच्चों की भी पूरी  जिम्मेदारी उठाये | एक वर्किंग मदर को कई बार इस दौरान इस अपराधबोध की भावना से गुज़रना पड़ता है | पिउ रिसर्च सेण्टर( Pew Research Center ) के द्वारा किये गए एक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार केवल 10 प्रतिशत फुल टाइम वर्किंग मदर ही अपने आप को पेरेंटिंग के लिए पूरी तरह से सक्षम मानती हैं और सिर्फ 24 प्रतिशत पार्ट टाइम वर्किंग मदर खुद को एक अभिभावक के तौर पर 10/10 अंक देती हैं | उनके ऊपर बहुत दबाव डाला जाता है की वह अपनी जॉब , अपने आपसी रिश्तों, एक पत्नी के तौर पर और सबसे बड कर एक माँ के तौर पर अपनी जिम्मेदारी सर्वोत्तम तरीके से निभाए | एक सर्वे के अनुसार ,जब अपने से की गई, इतनी अपेक्षाओं के कारण वह जब वह सभी जगह अपना सर्वोत्तम नहीं दे पाती तो वह अपराधबोध की भावना से ग्रस्त हो जाती हैं | एक सर्वे के नतीजे के अनुसार वर्किंग मदर, अपनी जॉब की जिम्मेदारी के साथ लगभग 80 घंटे अपने परिवार की जिम्मेदारी पर भी बिताती हैं | एक सुपर मॉम बनना कई बार उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर बहुत ही थका देता है |

वर्किंग माँओं के लिए कुछ सलाह :

  • जब कभी आपको अपराधबोध हो की आप अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पा रही तो सोचिये की किस तर��� से आप जॉब करके अपने परिवार को आर्थिक सपोर्ट कर पा रही हैं और आप नौकरी करके उनके भविष्य को बेहतर कर पाएंगी |
  • स्वीकार कीजिये कि परफेक्ट माँ जैसी कोई चीज़ नहीं होती , माँ केवल अच्छी होती हैं | जैसे आप अपने बच्चों से यह अपेक्षा नहीं कर सकती की वह परफेक्ट हों , वैसे ही आप भी परफेक्ट माँ नहीं हो सकती |
  • अपनी जॉब के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के बीच इतना मत उलझिए कि आपको , अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए वक़्त ही ना मिल पाए | कभी कभार अपनी जॉब से छुट्टी लेकर अपने बच्चों के साथ हँसी ख़ुशी वक़्त बिताइए | उस दिन अपनी जॉब से सम्बंधित कोई काम नहीं कीजिये , पूरा वक़्त अपने बच्चे के साथ उसकी पसंद की एक्टिविटी कीजिये | आपका बच्चा भी पूरे उत्साह के साथ , आपके साथ बिताये गए वक़्त को एन्जॉय करेगा |
  • हमेशा ध्यान रखिये की आप अकेले अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं उठा सकती , अपने जीवनसाथी से भी इसमें मदद लीजिये | अगर आप सिंगल माँ हैं , तो आप कभी – कभी अपने दोस्तों और परिवार के अन्य सदस्यों से भी मदद ले सकती हैं |
  • खुद की भी सराहना करना सीखिए , कि आप अपने बच्चे के सामने कितना अच्छा उदहारण प्रस्तुत कर पा रही हैं | आप अपने बच्चे के लिए सकारात्मक रोल मॉडल बनिए | हमेशा याद रखिये की आप अपनी क्षमता के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां बहुत अच्छे से निभा रही हैं , अगर आज आपके बच्चे यह नहीं समझ पा रहे ,तो निश्चित रूप से वह आगे चलकर आपकी स्थिति को ज़रूर समझेंगे |
  • हमेशा याद रखिये , की सभी माओं को चाहे फिर वह वर्किंग मदर हो या न हों , कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है | माँ बनना , और बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाना किसी के लिए भी आसान नहीं है |
  • उन लोगों से हमेशा दूरी बनाये रखें जो आपको नकारात्मक वाइब्स देते हों | अपनी ताकत , योग्यता और दोनों पक्षों के प्रति अपनी जिम्मेदारियां अच्छे से निभाने के लिए कभी - कभी खुद ही खुद को छोटे- मोटे सरप्राइज देकर पुरुस्कृत करते रहिये |

यदि आप तनाव में रहेंगी , तो आप के घर का माहौल भी तनावपूर्ण रहेगा | जीवन में छोटी –बड़ी कठिनाईयाँ आती जाती रहेंगी उनका सामना अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर कीजिये | हमेशा खुश रहिये क्यूँकि जब आप खुद खुश होंगी , तभी आप अपने परिवार को खुश रख पाएंगी|    

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