क्या आपका बच्चा भी लिखने से कतराता है ?
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|   Jul 25, 2017
क्या आपका बच्चा भी लिखने से कतराता है ?

बच्चे लिखने से, काफी समय पहले ही बोलना सीख जाते हैं | जब तक वह नर्सरी स्कूल में जाते हैं, वह लम्बे-लम्बे वाक्य बोलने लायक हो जाते हैं, अब वह पेचीदा वाक्यों को भी साफ़-साफ़ बोल सकते हैं | इस उम्र तक वह अपने अनुभवों को भी विस्तार से बताना सीख जाते हैं | पर उन्ही बातों को, अपनी उन्हीं भावनाओं को कागज़ पर उतारने के लिए कुछ एडवांस्ड स्किल्स की ज़रुरत होती है, जिसमें समय लगता है |

हमारे यंग रीडर्स के लिए पहले शब्दों को सही तरीके से लिखना सीखना और फिर अपनी भावनाओं को कागज़ पर उतारना कुछ मुश्किल काम होता है , इसमें उन्हें कुछ समय लग सकता है, ऐसे में ज़रुरत होती है धैर्य रखने की | लगभग इस क्रम में  बच्चे  इस स्किल में निपुण होने लगते हैं :

लिखने की प्रक्रिया :

सबसे पहले बच्चे अक्षरों को लिखना और वह अक्षर किस प्रकार की ध्वनि निकालते हैं, यह सीखते हैं | यह सब बच्चे लगभग नर्सरी कक्षा के दौरान सीख जाते हैं , इसमें उन्हें काफी समय लगता है | ऐसे में शिक्षकों और पेरेंट्स को काफी सब्र से काम लेना चाहिए, जल्दीबाज़ी नहीं दिखानी चाहिए | कुछ बच्चे यह जल्दी सीख जाते हैं परन्तु कुछ बच्चों को इस में समय लगता है |

बिना रूकावट के स्पीड में लिखना :

यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, हमारे यंग लेखकों के लिए | जब बच्चों को अपनी भावनाओं को कागज़ पर उतारना चाहते हैं , तो कई बार उनके लिखने की स्पीड उनके आड़े आ जाती है | हमारे ज्यादातर अनिच्छुक यंग लेखक, शब्दों को सही तरीके से लिखने में तो समर्थ होते हैं, पर उन्ही शब्दों को अपनी भावनाओं के साथ, पर्याप्त गति में लिखने में असमर्थ होते हैं | अपनी इस मुश्किल से जूझना उनके लिए बहुत निराशाजनक होता है |

हमें, ऐसे में बच्चों से इस प्रक्रिया के बारे में बातचीत करनी चाहिए, और इसमें उनकी मदद करनी चाहिए, चाहे इसमें कितना ही समय लगे, ऐसे में धैर्य रखने ज़रुरत होती है | एक बार वह, यह सीख जाएँगे, तो यह आगे चल कर उनके लिए बहत ही मददगार साबित होगा |

लिखने का अभ्यास करने साधन उनकी, अक्षरों को सही बनावट में लिखने में मदद करेंगे | जब वह अक्षरों को सही तरीके से लिखना सीख जाएँगे, तब उन्हें अपने अगले कदम, उन्हीं अक्षरों को स्पीड में कैसे लिखा जाये ? , इस पर बढाने चाहिए |

महत्वपूर्ण शब्दों को बार-बार लिखना :

महत्वपूर्ण शब्दों को बार-बार लिखने से वह, बिना रूकावट के लिख पाएंगे , क्यूंकि इससे उन्हें लिखते समय बार-बार रूककर सोचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी | लिखने में इन पुराने समय की तकनीकियों का महत्व आज, और आने वाले समय में, हमेशा ही बहुत महत्वपूर्ण रहेगा | बिना निरंतर अभ्यास के, यदि हम बच्चों को लिखने के लिए कहेंगे, तो यह उनके लिए बहुत ही निराशापूर्ण होगा | जिसका नतीजा यह भी हो सकता है कि वह लिखने से कतराने लगेंगे या फिर साफ-साफ़ मना ही कर दे |

इसलिए हम आपको यही सलाह देंगे कि आप बच्चो की मदद करें, उनके अपनी भावनाओं को बोल कर व्यक्त करने में, महत्वपूर्ण शब्दों को बार-बार लिखकर अभ्यास करने में | हाँ, हो सकता है आपको शुरू में यह बहुत ही नीरस और अनावश्यक लगे, पर ज्यादा सोचने की ज़रुरत नहीं है | आगे चलकर यह आपके बच्चों की लिखने और सोचने की क्षमता में महत्वपूर्ण रोल निभाएँगे | क्या हम नहीं चाहेंगें, कि हमारे बच्चे बड़े होकर अपनी खूबसूरत विचारों को लिखकर भी, व्यक्त कर पायें |  

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