सिजेरियन डिलीवरी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलू
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|   Aug 11, 2017
सिजेरियन डिलीवरी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलू

सिज़ेरियन डिलीवरी .... यह एक ऐसा शब्द है , जिसे हम अक्सर प्रेगनेंसी के दौरान रूबरू होते हैं | अधिकतर समय सिज़ेरियन डिलीवरी पहले से तय नहीं होती , डिलीवरी के समय ही तय होता है कि डिलीवरी सिज़ेरियन होगी या नार्मल | इसलिए बेहतर यही है कि प्रेगनेंसी के दौरान ही इसके बारे में ज़रूरी जानकारी प्राप्त कर ली जाये | ताकि अगर आपको , डिलीवरी के समय निर्णय लेना पड़े कि डिलीवरी नार्मल की जाये या सिजेरियन तो आप आसानी से यह निर्णय ले पाएँ | आप कई तरीकों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकती हैं , चाहे वह पत्र पत्रिकाओं के ज़रिये हो या इन्टरनेट के ज़रिये , आप इसके लिए चाइल्ड बर्थ क्लासेज भी ले सकती हैं |

सिजेरियन डिलीवरी से जुड़े कुछ पहलु इस प्रकार से हैं ;

  • गर्भावस्था के दौरान व्यायाम : चाहे आप अपने शिशु को नार्मल जन्म दें या सिज़ेरियन के ज़रिये, गर्भावस्था के दौरान व्यायाम न केवल आपके लिए बल्कि आपकी डिलीवरी के दौरान मदद करेगा अपितु डिलीवरी के बाद भी चुस्त दुरुस्त रखने में उपयोगी होगा | आप डिलीवरी के 6 हफ़्तों के बाद , कुछ साधारण व्यायाम से शुरुआत कर सकती हैं जैसे : एड़ी और पंजों को घुमाना , साँस से सम्बंधित व्यायाम , पेट से सम्बंधित व्यायाम ( tummy tuckins ) और कीगल एक्सरसाइज (kegel) आदि |
  • अपने खानपान का ध्यान रखें : आपको दो प्राणियों के लिए खाने की कोई ज़रूरत नहीं है , आपको संतुलित आहार लेना चाहिए , और बिना सोचे समझे जो भी आपका मन करे खाना नहीं चाहिए | आप अपने पसंद के तले हुए स्नैक्स की बजाय , भुना हुआ , उबला हुआ या फिर भाप में पके हुए स्नैक्स खा सकती हैं | यह आपको स्वाद के साथ – साथ पोषण भी देंगे , साथ ही अनावश्यक कैलोरी लेने से भी बचायेंगे |
  • अपने हॉस्पिटल को जान लें : आपको तथा आपके जीवन साथी को पता होना चाहिए की हॉस्पिटल में डिलीवरी रूम , बेबी नर्सरी , ऑपरेशन थिएटर और रिकवरी रूम कहाँ पर हैं | इससे आप डिलीवरी के समय और उसके बाद इन जगहों से अची तरह वाकिफ होंगे , और उस समय कि अनावश्यक परेशानियों से बचेंगे |
  • डिलीवरी से पहले डॉक्टर से मुलाकात : आप उनसे अपने डर , परेशानियों और आपके मन में जो प्रसव से जुड़े संदेह हैं उनके बारे में खुल कर सवाल करें |
  • ब्रैस्ट फीडिंग कंसल्टेंट से मुलाकात : सिजेरियन डिलीवरी के बाद शिशु को स्तनपान कैसे, और किस पोजीशन में कराया जाये , इस बारे में उनसे जानकारी लें |
  • अपने हॉस्पिटल की पालिसी के बारे जानकारी प्राप्त करें : अगर आपका हॉस्पिटल आपको इस बात की अनुमति देता है कि , आप प्रसव से पूर्व ऑपरेशन थिएटर का दौरा कर सकते हैं ,तो आप यह ज़रूर चेक करें | आजकल ज्यादातर हॉस्पिटल इस बात की अनुमति देते हैं | साथ ही इस बात की भी ज़रूर जानकारी प्राप्त कर लें किडिलीवरी के बाद बच्चे को नर्सरी में रखा जायेगा या फिर आपके साथ एक ही कमरे में , ताकि आप जल्द से जल्द बच्चे को स्तनपान शुरू करवा सकें |
  • प्रसव के बाद रिकवरी : प्रसव के बाद जब आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाये , तो आप होश में आने के बाद अपने एड़ी और पंजों को घुमा सकते हैं , इससे आपके शरीर में ब्लड सरकुलेशन ठीक से हो पायेगा , और आप डीप वेन थ्रोम्बोसिस के रिस्क से बच सकते हैं |

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