हमारी वाली friendship 
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|   Aug 05, 2017
हमारी वाली friendship 

हमारा ज़माना आज के ज़माने जितना आसान नहीं था । हमारे समय न  mobile phone होते थे न internet न facebook न watsaap।

जिस दिन स्कूल न जाओ और दोस्तों से न मिलो दिन अधूरा रहता था। जिन्दगी इतनी complicated नही हुआ करती थी। दोस्त की problem हमारी problem। हमारे ज़माने में दिल अच्छे और रिश्ते सच्चे होते थे। हमारी वाली Friendship की बात ही अलग थी।

हमारे पार्टी के plans watsaap पर नहीं महेश अंकल की समोसे की दुकान पर बनते थे। हां  हां हमारे ज़माने मे समोसा, कचोरी , पानी पूरी और चिप्स यही हिट सनैक्स हुआ करते थे। ये मोमोस , चाऊमीन, पिज़्ज़ा तो आजकल के चोचले हैं। 

हमारे ज़माने में नये कपडे दोस्तो को दिखाना इतना आसान नही था। आजकल नये कपडे पहनो और एक सेलफी लो और facebook, instagram इत्यादि पर डाल दो । हमारे ज़माने में नये कपडे दोस्तो को दिखाने के लिये काफी प्लानिंग करनी पड़ती थी। किसे के जन्मदिन या भाई बहन की  शादी का इन्तजार करना पड़ता था । 

Mobile  तो थे नही तो दोस्तो को घर से बुलाने के लिए साईकिल की घंटी बजाया करते थे। और हां कभी कभी landline पर दो घंटी देकर काट देना भी दोस्तो को बुलाने का सिग्नल होता था । हम तो  timepass के लिए भी landline पर ही निर्भर थे। landline से random calls  करके फोकटगिरी करना। आजकल तो अनेकों साधन है timepass  के लिए। मूवी जाना मतलब बहुत बडी बात पहले newspaper मे टाकीज और शो टाइमिंग की जानकारी लो फिर दोस्तो को मनाओ फिर घरवालों  से अनुमति लो उसके बाद टिकट की लाईन मे लगो तब जाकर दोस्तो संग इक मूवी देख पाते थे। आजकल तो online टिकट भी बुक हो जाते हैं।

सब कुछ मेहनत से मिलता था इसलिए शायद हमें रिश्तों की ज्यादा कद्र थी। 

HAPPY FRIENDSHIP DAY...remembering all my friends ...to read more blog of mine please check my profile

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