"जा़यका" सासू माँ का
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|   Jun 16, 2017
"जा़यका" सासू माँ का

 एक स्त्री के जीवन का सब से उलझा हुआ और भारी भरकम रिश्ता,सास और बहू का रिश्ता ऐसा ही होता है। एक दूसरे को कटाक्ष भरे शब्दों में भिगोती सास और बहू हर घर की कहानी है। हर सासू माँ में अतरंगी गुण होते हैं जो बहू को  कुछ खट्टे मीठे अनुभव दे जाते हैं। जैसे पाँचोंं उँगलियाँ एक समान नहीं होती उसी प्रकार  हर सास को एक ही क्षेणी में डालना अनुचित होगा । मेरा एक  प्रयास इस भारी भरकम रिशते को हलके फुलके अंदाज़ में प्रस्तुत करने का।

मिश्री सी मीठी सास- इस प्रजाती की सास  हमारी फिल्मों (कुछ गिनी चुनी फिल्में, जिनमें से एक का भी नाम मुझे याद नहीं आ रहा )में पायी जाती है।असल जिन्दगी में यह एक दुलृभ प्रजाती है।  केवल कुछ किस्मत की धनी चुनिन्दा बहुओं को ही ऐसी सास मिलती है।यह अपनी बहू को बेटी मानती हैं और माँ जैसा प्यार देती हैं।बहू का हर काम में हाथ बटाती हैं । बहू का पक्ष लेती हैं ,गलती चाहे किसी की भी हो।ideal सास होती हैं ये। हर बहू ऐसी सास का ही सपना देखती है।

रसभरी सी, खट्टी मीठी सास-इस प्रजाती की सासू माँ को अपने घर और बेटे से इतना प्यार होता है कि यह बहू के आने के बाद भी सब काम खुद ही करती हैं।बहू को बाहर घूमने जाना हो यां बच्चों का ध्यान रखना हो ,यह सब काम खुशी खुशी करती हैं।पर बहू का घर पर,पती पर और तो और उसके बच्चो पर भी कोइ अधीकार हो यह बरदाश्त नहीं होता इनसे।बच्चों के कपडे खरीदने से ले कर किस दिन क्या पहिनाना  है सब choice सासू माँ की होती है।बहू अपने मन से एक footmatभी बदल नहीं सकती घर में।इस सास की बहू आपको अकसर बाज़ार मेंenjoy करती मिल जाएगीं।फेसबुक पर भी इनकी photos की भरमार होती है।उपरी तौर पर यह बहुऐं काफी सुखी लगतीं हैं ।सासू माँ की चाबी वाली गुडिया होती हैं यह बहुऐं।जैसे जैसे सासू माँ कहती जाए वैसे वैसे करते जाओ।अपने मन से खाने में क्या पकाना है यह भी तय नहीं कर सकतीं।अपने ही घर में पराया सा हो के रहना आसान नहीं होता।

दिखने में रसमलाई चखने में करेला-यह सब से खतरनाक प्रजाती है सासू माँ की।भगवान बचाए ऐसी सास से।ऐसी सास की बहू को अन्दाज़ा ही नही होता कि उसकी जिन्दगी की उथल पुथल का जिम्मेदार कौन है।बहुत चालाक और पैंतरे बाज होती है यह सास।बहू सालों इसी भ्रम में निकाल देती है कि मेरी सास से अच्छा कोइ हो ही नही सकता ।सास देवी समान लगती है उसको।बहू सास के कहे अनुसार चलती जाती है और अपने पाँव पर खुद कुल्हाड़ी मारती जाती है।बहू सोचती ही रह जाती है कि आखिर उसकी गलती क्या है और सास अपना काम कर जाती है।ऐसी सास कभी उचे स्वर में बात नहीं करती अपितू अपनी मीठी वाणी से प्रहार करती हैं। बहू को सास का दोगला पन समझ आ भी जाए तोभी सास का असली चेहरा सामने लाना लगभग नामुमकिन होता है।बहुत ही दुख भरी कहानी होती है ऐसी सास की बहू की बेचारी बिना बात के सब रिशतेदारोंं में बदनाम होती है।मीठी वाणी के बाण से बहू को छलनी करती है यह सास।यह रसमलाई ता ज़िन्दगी कड़वा स्वाद देती है बहू को।

करेले सी कड़वी सास-यह सब से common प्रजाती है सासू माँ की।ऐसी सास का बहू के साथ ३६ का आंकणा होता है,पर यह छुप कर वार नहीं करती।इनको अपने सास होने का बहुत गुरुर होता है और यह बात जताने में कोइ कसर नहीं  छोडती ।महिमान आये हों या घर परिवार के लोग हों यह सब के सामने खूब ताने देती हैं बहू को।ज्यादा से ज्यादा काम करवाती हैं बहू से और बेटी आ जाए तो क्या कहने फिर ब���ू की जिन्दगी नरक समझो।हर जानने वाले के सामने बहू की बुराई करना इनकी hobby होती है।ऐसी सास का यह फायदा है कि सब की सहानुभूती बहू के साथ होती है और बहू भी हर वक्त टक्कर लेने को तय्यार रहती है।वार सामने से हो तो जवाब देना थोड़ा आसान हो जाता है।करेले सी कड़वाहट घोलती हैं ये बहू की जिन्दगी में।

करेला वो भी नीम चढा-इस प्रजाती की सासू माँ के क्या कहने।इनको बहू अपनी सब से बड़ी दुशमन लगती है।इनको दहेज भी चाहिए और बहू को मार खिलाए बिना इनको नींद नही आती।बेटे को अपने इशारों पे नचाती हैं और जब तक बहू और उसके घर वालों के सब्र का बांध टूट ना जाए इनको चैन नही मिलता।ऐसी सास की जगह घर में नही जेल में होनी चाहिए।

आंवले जैसी,कड़वी पर फायदेमंद- ये वह समझदार सासु माँ होती हैं जो बहू के साथ तालमेल बना कर चलती हैं। यह समय समय पर बहू का मार्गर्दशन करती हैं कभी ड़ाट कर तो कभी प्यार से। यह कड़वा बोलती तो हैं पर कुछ अच्छा सिखाने के लिए। jealousy और insecurities को अपने रिशते में नहीं आने देती यह सास।अपने घर परिवार की  सुख समृधी इनको अती प्यारी होती है।ऐसी सास के साथ जिन्दगी कुछ अच्छे कुछ बुरे अनुभव दे जाती है।कभी एक का पलड़ा भारी तो कभी दूसरे का। जब माँ बेटे के कान नहीं भरती तो वह भी balance बना के रखता है बीवी और माँ के बीच।समझदार सास  सब के योगदान से घर को सुखी बना देती है। 

सास और बहू का रिशता अगर अच्छा हो तो घर स्वृग बन जाता है।जीवन सुखमइ हो जाता है।फिर क्यों बेटे की माँ सास बनते ही insecureऔर jealous हो जाती है।अपनी ही परवरिश पर विशवास नहीं रहिता उसको, क्यू?बेटे की जिन्दगी सवारने की बजाए वो उसे नरक बना देती है।इसलिए कि उसका बेटा छीन ना ले बहू।कितने घर टूटते हैं इस jealousy और insecuritiesकी वजह से।सास कभी प्यार और सम्मान से अगर बहू को अपनाए तो जीवन स्वृग सा हो जाए।

आप की सास किस क्षेणी में आती है(करेला,रसभरी यांं रसमलाई) यां  इससे अलग कोइ किस्म है सासू माँ की तो जरूर बताऐं।

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