sajan mohe aise rang lagana
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|   Mar 10, 2017
sajan mohe aise rang lagana

Mast, प्यारा,चुलबुला romance से भरपूर होता है होली का त्योहार ।एक तरफ  बड़े बड़े थाल लाल, पीले ,नीले  रंगो से सजे हुऐ।तो दूसरी तरफ रंग से भरी पिचकारियां मानो आमंत्रन दे रही हों कि आ भी जाओ अब विलम्भ किस बात का।आओ और भिगो दो अपने सजन को अपने रंग में।गाने full volume पे बजते हुऐ और साजन पूरे जोश से थिरकते हुए।लाल ,पीला ,गुलाबी चेहरा। मस्ती का चारो तरफ डेरा।

पहले प्यार की पहली होली बहुत खास होती है।कभी गुदगुदाती कभी हौले से छेड़ जाती ।मन में मीठे मीठे अरमान जगाती।वो जो इतने सावन सूने गुजरे उन सब की यादें समेटे हुए मन चंचल हिरन की तरह यहां से वहां भागता है।जब वो गुलाल से भरे हाथ गालों को स्पृश करते हैं तो मानो सारी दुनिया थम सी जाती है।प्रतीत होता है  जिन्दगी को नए माने मिल गये हों।सब से आंखे बचाये जब  सजन की पानी से भरी पिचकारी  भिगो जाती है फिर कुछ कुछ होना तो लाजमी है। rang barse bheege chunar wali rang barse .....मंत्र मुग्ध करता हुआ यह गीत । साजन के साथ भीगते हुए होली खेलने का मज़ा तो मानो जन्नत की सैर करने समान हो।

कुछ इस प्रकार से इस भोले मन ने कल्पपना की थी अपनी पहली होली की। मन भी क्या करता हर हिन्दी फिल्म में यही होते देखा था उसने।यह पता ही नही था कि वास्तविकता में रंग खरीदना और बाकी सब इन्तज़ाम करना सजन की ज़िम्मेदारी होगी।यां यू कहिये कि पता था फिर भी हम फिल्मों से इतना प्रभावित थे कि परदे पर देखी हर चीज़ हमें सच और सही लगती थी।शादी से पहले शायद सब को ऐसा ही लगता है।किसी ने सच ही कहा है सत्य कड़वा होता है।तो हुआ युं की सजन तो busy थे सो थे हमारे पास एक मिनट की फुरसत ना थी। हमारा सब से बड़ा गुण हमारा दुशमन हो गया था।सब को नई नवेली बहू के हाथ की गुजिया और कचौरी खानी थी।और हो भी क्यु ना इतनी तारीफ जो सुनी थी हमारी सब ने।बहु के हाथ में जादू है।हाय री किस्मत,तारीफ पाने के चक्कर में होली रसोइ घर में ही बीत गयी। 

गुजिया बहुत लज़ीज बनीं और कचौरी खा कर सब ऊगलियां चाटते रह गये।हमारे ठाठ बड़ गये ससुराल में।सब से खूब तारीफ मिली।हम खुश तो बहुत थे मगर दिल कुछ शोर सा कर रहा था।एक गीत मन में बार बार आ रहा था।,"मन के अरमां आसूओं में बह गये....हम बिना रंग खेले ही रह गये"।😂

सासू जी ने आवाज़ लगायी और हम अपनी फिल्मी दुनिया से बाहर निकल रसोइ की तरफ भाग लिए।पहली होली की पहली यादें कुछ खटृटी कुछ मीठी थी।वह होली सीख दे गयी कि जिन्दगी फिल्म नहीं है दोस्त यहां काम खुद करनें पड़तें हैं।😃

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