छुट्टियाँ कहाँ हैं ????
12776
8
1
|   Apr 12, 2017
छुट्टियाँ कहाँ हैं ????

       गरमी की छुट्टियां और नानी का घर जैसे एक दूसरे के पूरक है। छुट्टियों से २-३ महिने पहले ही नानी के घर जाने की planning शुरू हो जाती थी । बैगस् मे कॉमिक्स का खज़ाना लेकर हमारी packing हफ्ते पहले ही हो जाती थी।   नानी का घर कलकत्ता था और हम UP मे रहते थे तो पूरे दिन और रात का ट्रेन का सफर था । जितना नानी के घर जाने का उत्साह था , उतना ही ट्रेन के सफर का । मतलब की नानी के घर जाने की खुशी के दो दो कारण थे। जब हम छोटे थे तो exams ,अप्रैल मे होते थे । और फिर दो महिने की लम्बी छुट्टी । न्यू शेषन जुलाई मे शुरू होते थे । तो छुट्टियों मे पढ़ाई का कोई tension नही । हॉ,  मम्मी पापा मानने वाले तो थे नही तो English, Hindi की handwriting और maths के कम से कम 20 sums करने पड़ते थे । एक काम और था जो की उस समय tourcher से कम नही लगता था । वो था bangla लिखना सिखना । जब लोग अपनी मूल जगह से दूर रहते है तो अपनी विरासत को संजोहने की ललक ज्यादा हो जाती है । अब तो बहुत गर्व का अनुभव होता है जब लोग कहते है वाह bangla भी पढ़ना आता है तुम्हें ।कयोकि हिन्दी भाषी राज्य मे होकर भी बांग्ला पढ़ पाना लोगो को आश्चर्यचकित कर देता है । 

जब हम कोई काम routine मे करते है तो break लेना बहुत जरूरी होता है । ये दो महिने की छुट्टी हमे new session के लिए तरोताज़ा कर देता था । और जब हम ज्यादा दिनो के लिए किसी चीज़ से दूर रहते है तो उस काम को करने मे ज्यादा दिल लगता है ।  ये human nature है। यही बात पढ़ाई पर भी लागू होती है। पर आजकल ये अवधारणा बन गई है कि ज्यादा समय पढ़ाई से दूर रहने पर पढ़ने से मन हट जाता है । इसलिए बच्चों को छुट्टी भी दी जाए तो homework के बोझ के साथ।  और क्योकि वर्मा जी ने बेटे को swimming class join करवाया है, शर्मा जी की बेटी music class जाती है, तो हमारे बच्चे कही पीछे न हो जाए , इसबार summer camp  तो भेजना ही है ।इसलिए नानी के घर सिर्फ ३ दिन रहेंगे । homework complete करना है, projects complete करने हैं, summer classes join करवाना है। छुट्टियां कहां है ??? vacations मे तो और भी ज्यादा stress है । 

इस बार मैने तय किया है 45 दिनो की छुट्टियों मे से 30 दिन मै अपने बेटे को complete rest दूँगी । उसे सिर्फ story books पढ़ने को कहूँगी । नानी के घर पर मस्ती भी करनी है। काश कि जितना मै छुट्टियों मे प्रकृति के पास रह पाती थी उतना मेरे बच्चे भी रह पाते। पर जानती हूँ शहरीकरण की वजह से अब ये मुश्किल है पर नामुमकिन तो नही । प्रकृति मॉ से मेरे बच्चो का परिचय होना ही चाहिए । 

आप सबको भी अफसोस होता होगा, तो चलो इस बार बच्चों को असल छुट्टी दी जाए । जिससे की वो पूरे साल की पढ़ाई के लिए अपने आप को तैयार कर सके । बड़े होने पर उन्हें भी तो अपनी छुट्टियां याद होनी चाहिए हमारी तरह।

 

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day