माँ – बाप का अहं .......  जूझता बाल मन
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|   Jul 27, 2017
माँ – बाप का अहं .......  जूझता बाल मन

बाहर से आती आवाज़े सुन अब मैं खुद को ज़्यादा देर नही रोक पा रही थी। जैसा की मुझे अंदाज़ा था हर बार की तरह आर्यन की बॉल मिसेज कपूर की खिड़की का काँच चटका चुकी थी। आर्यन के मम्मी-पापा और मिसेज कपूर की फैमिली में बहस चल रही थी। यह पहली बार नही हुआ था अक्सर आर्यन की बॉल कॉलोनी के लोगों को परेशान करती थी और मिसेज कपूर की खिड़कियां इसका ज्यादा शिकार होती और फिर दोनों फैमिली में विवाद शुरू हो जाता।आर्यन मेरे पड़ोस में रहने वाले मिस्टर और मिसेज चौहान का इकलौता बेटा है। चौहान दंपत्ति के आपसी झगड़ो से सभी परिचित थे। पति-पत्नी दोनों ही economically strong हैं। घर में किसी चीज़ की कमी नही थी , कमी थी तो mutual understanding की। दोनों का अहं जब हावी होता तो सब्र की सारी सीमाएं तोड़ देता और अक्सर ऐसा होता। घर की इस अशांति का प्रभाव बच्चे पर न पड़े इसिलए मिसेज चौहान ने सारी सुविधाएं कर रखी थीं। अच्छा स्कूल, अच्छा ट्यूशन,संडे आउटिंग, occasionally बाहर डिनर आदि। वो हर जगह उसे ले कर अकेले ही जाती आज तक मैंने उसे पूरे परिवार के साथ नही देखा।

गहरी लिपस्टिक में वो अपना दर्द तो छिपा लेती मगर मासूम आँखों से सब बयां हो जाता था ।

माँ-बाप के अहं की आग में किशोर मन झुलस रहा था

   पिछले पांच सालों में मैने हमेशा उसे बहुत चुप चाप ही देखा था ! नॉर्मली वो किसी को फेस नही कर पाता था ।

क्रिकेट का उसे शौक था और उसकी बाल अक्सर पड़ोसियों से झगडे का कारण बनती। सभी की डांट वह चुप चाप सुन लेता।

 उस बारह चौदह साल के बच्चे के बारे में लोग बहुत ही गलत धारणा बनाते , दबी जुबान में कोई कहता बड़ा होकर गुंडा बनेगा, कोई लफ़ंगा और चोर कह कर खुश होता गेंद से टूटी कांच की खिड़की सभी को दिख जाती मगर उस किशोर बच्चे का टूटा मन जो लगातार दरक रहा है कोई नही देख पा रहा ।

   आर्यन की खामोशी मामूली ख़ामोशी नही होती उसमे एक असन्तोष और बैचैनी भी है पता नही उस चुप्पी में वो कितना कुछ छुपाए बैठा है ।

  मुझे लगता है कि जो पैरेंट्स अहं के कारण आपसी इशू को छोटे छोटे झगड़ो को जग ज़ाहिर करने लगते है उनके बच्चों को समाज में बहुत ज्यादा परेशानियां उठानी पड़ती है ।

  पहले तो कोई उन्हें सीरियसली नही लेता और अगर उनमे कोई टैलेंट है भी तो सभी उन्हें एक संदेह से देखते है।

  माँ बाप का गैर जिम्मेदाराना रवैया उन बच्चो को अनजाने ही एक अपराधबोध और हीन भावना से भर देता है , जिसकी कीमत उन्हें जिंदगी भर चुकानी पड़ती है।

    आर्यन की माँ ने उसे सारी बाहरी सुविधाये दी है फिर भी आर्यन गुमसुम क्यों रहता है ?

      क्या आप बता सकते है...........

इस बार इतना ही

अगर आप सबको मेरी यह कहानी पसंद आयी तो आपके अमूल्य सुझावों का इन्तजार रहेगा..... ☺

- रागिनी श्रीवास्तव....

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