“ सावन को आने दो”....
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|   Jul 13, 2017
“ सावन को आने दो”....

हमारा देश बदलते मौसमो और त्योहारों की धरती है। वैसे तो वर्ष का प्रत्येक माह अपनी विशेषताओं के साथ अलग होता है मगर तपती गर्मी और चुभती उमस के बाद शीतलता देती हुई बारिश की बूंदों वाले सावन माह की बात ही कुछ अलग है।हिन्दू विवाहति स्त्रियां के लिए इस माह में शिव आराधना ,हरी चूड़ियां,हरी चुंदरी और मेंहदी रचे हातों का विशेष महत्व है।

हरियाली अमावस्या,हरियाली तीज, नाग पंचमी, सप्तमी और अष्टमी व्रत एवं रक्षा बंधन जैसे पर्व इस माह को विशेष बनाते है।

बचपन में सावन का मतलब होता था चारों तरफ हरियाली ही हरियाली, कभी रिमझिम फुहारे तो कभी मूसलाधार बारिश के साथ स्कूल में रेनी डे। बारिश के पानी में डूबती उतराती, झूलों की पेंगे,मेंहदी की ख़ुशबू, “नाव डूबी तो तेरी और चल दी तो मेरी” भाई बहन की मीठी नोक-झोंक।

इसके साथ ही याद आती गयी नाग पंचमी के पर्व पर माँ के हाथों नाग देवता को अर्पित कटहल के पत्तों पर प्रशाद और उसे तोड़ कर लाने के लिए भाई के साथ जाने का उत्साह। वक्त बीता परम्पराये बदली मगर त्योहारों का महत्व और सावन मास का उल्लास आज भी मन में जीवंत है।

आज जब की हमारे चारों तरफ हरियाली, बारिश,झूले, मेंहदी एवं अन्य साज-शृंगार मौजूद है मगर हम में से अधिकतर लोग अपनी अति-व्यस्ततम दिनचर्या में यह सब भुला कर बैठे है।

आज हमारे अंदर पनपती कोरी बौद्धिकता ने हमारी भावुकता को दबा दिया है। बहुत दुःख होता है जब मैं यह देखती हूं कि आज हम में से अधिकाँश लोग अपने त्यौहार व परम्पराओ के प्रति उदासीन। वो जीवन को एक goal समझते है, और उसे achieve करने के लिए भाग रहे है।

जबकि जीवन एक उत्सव है। इस उत्सव को अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकाल कर बनाइए। महज profile pic और dp पर हरियाली की तस्वीर लगा भर देने से और सावन के मेसेजेस लाइक और शेयर कर देने से हम इस मौसम की खूबसूरती को महसूस नही कर सकते। इसे तो अपने जीवन में सहेजना और हरियाली को अपनी आत्मा से महसूस करना है जिस से हर मन गुना गुना सके।

“सावन को आने दो”......

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