किस्मत में लिखा प्यार।
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|   Jul 15, 2017
किस्मत में लिखा प्यार।

आज घर मेहमानो से भरा हुआ है हर कोने से खुशी छलक रही है सब खुश् है । सब व्यस्त है कोई हलवाई को सलाह दे रहा है तो कोई सजावट में सहयोग कर रहा है और हो भी क्यों घर की सबसे छोटी बेटी रमणी की शादी जो है। रमणी ,जिसमे कुछ महीने पहले तक पापा की जान बसती थी आज बस एक जिम्मेदारी है अपने पापा के लिए क्योकि उससे प्यार करने की गलती हो गई है। अब लाड़ली नही रही, वो खुद भी एक गलती घोषित कर दी गई थी जिसका प्रायश्चित है शादी जो उन्हें इस गलती से मुक्त करा सकती है । रमणी खुश थी ये सोचकर की ये शादी उसके पापा को खुशी दे सकती है मगर वो पिछले कुछ समय से ये समझ नहीं पाई की क्यों सबके प्रेम विवाह का समर्थन करने वाले उसके पापा ने उससे उसके बारे में एक भी बार बात क्यों नहीं की ?  

मन में बहुत उथल - पुथल मची है, जैसे -जैसे  दिन बीतता जा रहा है रमणी बैचेन हो रही है । हर आहट उसे अनंत की लगती ,ऐसा महसूस होता की बस किसी भी पल  वो आकर उसे ले जायेगा मगर अगले ही पल उसका अंतर्मन उसे उस पल के लिए तैयार करता जो अब उसकी सच्चाई थी। रमणी ने सज- संवर आज नए घर में गृह- प्रवेश किया खुद से इस वचन के साथ की वो फेरो के सभी वचन निभाएगी।  नई जिंदगी नए रिश्ते हर दिन नए संघर्ष के साथ सामने आ खड़े होते जैसे कोई जंग हो कुछ भी सामान्य नहीं था पति जिसे शराब - सिगरेट की लत थी उसके लिए रमणी के किसी भी काम की किसी भी इच्छा की कोई अहमियत नहीं थी, ननद थी जो अपने काले रंग को लेकर हमेशा गौरी रमणी से कुंठित रहती जो कोई मौका नही छोड़ती रमणी को नीचा दिखाने का ।

रमणी को अपने घर की बहुत याद आती, और घर के याद के साथ कहीँ चुपके से अंनत भी आ जाता उसकी यादो के गलियारों में और वो हंसकर फिर सब संजोने की जद्दोजेहद में लग जाती । शादी को कुछ ही महीने हुए थी की उसने  उस एहसास को महसूस किया जिसे इस धरती पर सबसे पवित्र माना गया है वो माँ बनने वाली थी उसे समझ नहीं आ रहा था की वो खुश् हो या दुखी रमणी का पति अभी संतान नहीं चाहता था मगर इस समय उसकी सास ने उसे सम्हाला और बहुत कठिनाइयों के बाद उसकी गोद में एक परी आई । रमणी अपनी जिंदगी को जितना समेटना चाहती जिंदगी उतनी ही उलझती जाती इसी बीच उसे अनंत की शादी की खबर मिली सुनकर ऐसा लगा जैसे कुछ पूरा हो गया उसके अंदर ।  बस उसकी अपनी उलझने ही उसे उलझाये रखती। रमणी नौकरी करके अपनी और अपनी बेटी की जरूरते पूरी करती ।उसकी सास परी को सम्हालती, वो समझती थी उसे ,उसकी जिंदगी  को बस बेटे को चाह कर भी नशे की लत से अलग नही कर पाई। रमणी के घर वाले भी उसकी हालत देखकर परेशान होते मग़र किस्मत को दोष देकर ही संतोष कर लेते ।

परी आठ साल की हो गई थी और जिंदगी हर पल बद से बदतर होती जा रही थी रमणी की, फिर एक दिन उसके भाई ने उसे वापस घर लौटने को कहा तो रमणी की सास ने भी उसका समर्थन करते हुए कहा की तू क्यों इस शराबी के साथ अपनी जिंदगी बरबाद कर रही है चली जा और अपनी जिंदगी जी । रमणी देख रही थी उस माँ को जो अपने बेटे की जिंदगी नही अपितु अपनी बहु का सोच रही थी या यूं कहूँ की उस पल वो बस एक औरत थी जो रमणी को एक शराबी ,गिरे हुए और बद्तमीज इंसान से मुक्त कराना चाहती थी इस तरह रमणी चली आई अपने पिता के घर अपनी बेटी का हाथ थामे दस सालो की शादी और हर रोज मिलने वाली वेदनाओं को त्यागकर । अब ! क्या ये आसान था रमणी के लिए हर तरफ बस एक ही बात रमणी घर आ गई  बहुत रोती अपनी किस्मत पर औरते सलाह देती की टीवी मत देखो धार्मिक किताबे पढ़ो उसे समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्यों हो रहा है कहाँ थे ये सब लोग जब वो अपने पति के अत्याचार सहन करती थी? तब कोई क्यों नही आया उसे बचाने जब उसका पति किसी और औरत के साथ रिश्ता रखता था तब क्यों नही समझाने आया उसे ! अब कहाँ से आ गया ये खोखला समाज अपना दायित्व निभाने और चिढ जाती वो ।  

रमणी के पापा  अब ज्यादा बात नहीं करते थे , अपनी बेटी के लिए गलत चुनाव और उसकी दुर्दशा ने उन्हें अंदर से खोखला कर दिया था ।अनंत की शादी भी सफल नहीं हो पाई और वो दोनों फिर से अकेले थे जहाँ ग्यारह वर्ष पूर्व थे । शायद किस्मत का लिखा, किस्मत तो कुछ और ही चाहती थी वो फिर से मिले और उन दोनों ने फैसला लिया अपने लिए अपनी बर्बाद हुई जिंदगियो के लिए, रमणी की बड़ी होती बेटी के लिए  ।जी हां शादी कर ली दोनों ने उन दोनों की अपनी जरूरते थी अपने तर्क थे आज रमणी बाइस साल की युवती नही थी जो अपने प्रेमी को पाना चाहती थी बल्कि वो एक दस साल की बेटी की माँ थी जो अपनी बेटी को हर ख़ुशी देना चाहती थी बड़ी होती बेटी को पिता का स्नेह देना चाहती थी। अनंत भी अपनी शादी के कारन टूट चुका था उसका परिवार भी हमेशा उसे लेकर चिंतित रहता सो वो भी अपनी जिंदगी में ठहराव चाहता था आज उनकी प्राथमिकताएं बदल चुकी थी जो नहीं बदला था वो उनका विश्वास ,उनका प्यार और बिना कहे एक दूसरे के मन की बात समझने की जो आपसी समझ थी उन में वो ही उन दोनों को फिर से साथ ले आई । हालात बदल गए थे आज वो प्रेम की पींगे भरते कोई प्रेमी -युगल नही है अपितु अपनी जिम्मेदारी निभाते माँ-बाप है ।रमणी और अनंत दोनों ने ही अपनी जिंदगी का काफी भयावह रूप देखा बहुत पीड़ा बर्दास्त की मगर आज वो खुश है अपनी बेटी के साथ ,हालाँकि दुनिया आज भी उन्हें देखकर परेशान है क्योकि उन्होंने अपने दिल की सुनकर ख़ुशी को चुना हर पल किस्मत को कोसकर रोते नहीं  रहे और किस्मत ने भी बहुत परीक्षाएं ली तब कही जाकर उन्हें उनके हिस्से की खुशियां दी ।

किस्मत का लिखा

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