"मिटटी से पहचान"
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|   Aug 01, 2017
"मिटटी से पहचान"

अजीब लगा पढ़कर की ये क्या है "मिटटी से पहचान" हम क्या करेंगे या हम क्यों करें मिटटी की पहचान? 

अरे सुनिए तो सही की मैं कौनसी मिटटी की बात कर रही हूँ जी हाँ मैं कोई चिकनी मिटटी या  रेतीली मिटटी की बात नही कर रही हूँ इन मिट्टी की अपनी विशेषता होती है| अपनी विशिष्ट भौतिक, रासायनिक और जैविक विशेषताओं के माध्‍यम से विभिन्‍न प्रकार की फसलों को लाभ प्रदान करती है  अपितु मैं तो अपने देश की मिटटी की बात कर रही हूँ  अपनी

मातृभूमि की बात कर रही हूँ जिसके महिमा के बारे में हमारे आराध्य श्री रामचंद्र जी ने भी कहा था :-

‘जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ अर्थात् जननी (माता) और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी श्रेष्ठ एवं महान है । हमारे वेद पुराण तथा धर्मग्रंथ शुरू से ही इन दोनों का गुण गान करते आ रहे है मगर आज हम कही इन दोनों को भूलते जा रहे है इनकी छवि धूमिल होती जा रही है । इनकी साख आज हमारे व्यवहार और विचारो में कही कम होती जा रही है।  आज हर किसी को बस विदेश जाना है वहीँ रहना  है  क्यों ? क्योकि वहाँ तनख्वाह अच्छी है । ये बहुत ही निंदनीय विषय है की जिन लोगो ने डॉक्टर ,इंजीनियर या अन्य किसी भी विषय में सफलता या महारत पाई है वो अपने देश को छोड़कर विदेशो में जाकर बस जाते है। जिस देश में आपने जनम लिया ,शिक्षा पाई और जीवन जीने का सलीका सीखा उसी देश को, उसी मिटटी को छोड़कर चले गए अपने लिए नई राहे , नई उम्मीद एवम् नए मंजिले तलाशने !

क्यों?  आप भारत में रहकर यहाँ वो सब क्यों नही कर सकते जिसके लिए आप विदेश जाते हो? अगर सब मिलकर प्रयास करेंगे तो किसी भी माँ को अपने बेटे को देखने के लिए बरसो प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।  किसी बाप को अंतिम - अवस्था में अपने पुत्र को न देख पाने की बोझिल पीड़ा से नही गुजरना पड़ेगा। किसी बहिन को राखी - भाईदूज पर फ़ोटो से काम नहीं चलाना पड़ेगा। अपने देश को ,अपनी मिटटी को मजबूत बनाइये न । अपनी योग्यता को ,अपने हुनर को अपने देश-हित में लगाइये फिर देखिये कैसे ये भारत फिर से वही "सोने की चिड़िया" बन जायेगा ।अब समय आ गया है की हम  हमारे देश की मिटटी की सुगंध को आत्मसात करें और अपने देश को प्रेरणास्रोत बनाये दूसरे देशो के लिए। अपने देश से अपनी मातृभाषा से प्रेम करें और अपने हुनर से भारत को नए आयाम दें , नई पहचान दें और लहरा दे अपने तिरंगे को दुनिया के आसमान पर ,नई ऊँचाइयों के साथ।

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