टुकड़ा होती जिंदगी
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|   Jul 06, 2017
टुकड़ा होती जिंदगी

अधूरी जिंदगी ये कहानी  मेरी या मेरी किसी दोस्त की नही अपितु आज बहुत सी लड़कियो की है जिन्हें जिंदगी तो मिलती है मगर उस जिंदगी में उन्हें पूर्णता नही मिल पाती कही न कही हर औरत की जिंदगी में खालीपन होता है जिसे भरने की जद्दोजेहद में उनकी पूरी उम्र निकल जाती है कुछ ऐसा ही अधूरापन है छवि की जिंदगी का। किशोरावस्था तक उसकी जिंदगी में जो था वो पर्याप्त था उसको खुश् करने के लिए फिर एक दिन  स्पर्श  मिला वो लम्हा लेकर जब उसे अपनी जिंदगी अपनों के साथ होते हुए भी अधूरी लगने लगी । छवि का दिल समझ नही पा रहा था की माँ-पापा ,भाई-बहिन सब पास ही है हमेशा की तरह तो फिर आज इतनी बैचेनी क्यों है ? क्यों सबके होते हुए भी एक अधुरापन मन में समां गया है क्यों आँखो को किसी की झलक का इंतजार है ,क्यों उसके कान सिर्फ वही आवाज सुनना चाहते है । वो अपनी भावनाएं ना ही समझ पा रही थी और ना ही किसी से साझा कर पा रही थी। फिर एक दिन स्पर्श ने उसे मिलने बुलाया और वो सब उससे कहा जो छवि खुद महसूस कर रही थी वो उस एक लम्हे में पूरी जिंदगीजीना चाहती थी अपने अंदर एक नई ख़ुशी को महसूस कर सकती थी ,हाँ प्यार हो गया था उन दोनों को। अपने प्यार को जताकर जहाँ स्पर्श खुश् था वही छवि अपने उन एहसासों को खुद में समेट लेना चाहती थी ये जानते हुए भी की इस प्यार को मंजिल नहीं मिल पायेगी वो रोक नहीं पा रही थी खुद को इस प्यार में ओत-प्रोत् होने से ।  हर दिन बढ़ता गया उनका प्यार मगर कहते है न की इश्क़ छुपाये नही छुपता उनका भी नहीं छुपा और छवि के पापा को पता लगते ही उसकी शादी की तैयारियां होने लगी । छवि इससे सहमत नही थी और अब उसे निर्णय लेना था की वो अपनी जिंदगी में कौनसा अधूरापन चाहती है,  माँ- पापा जो उसे अपनी पसंद के साथ विदा करना चाहते है उनके बिना  या अपनी पसंद के जीवनसाथी को छोड़कर उसके बिना ।अपने पापा पर भरोसा करती थी वो मगर अपने दिल में स्पर्श को अपना जीवनसाथी चुन लिया था उसने  किसी और के साथ शादी करके शायद माँ- पापा तो खुश् हो जाते मगर वो खुश नही रह पाती और अगर वही खुश् नही रहती तो माँ- पापा भी कब तक खुश् रहते यही सब सोचकर उसने अपना प्यार चुना उसे ये भी यकीं था की माँ-पापा उसकी पसंद को एक मौका जरूर देंगे और उसे अपनाएंगे मगर ये महज एक भ्रम निकला। आज छवि 2 बच्चों की माँ है अपनी जिंदगी में बहुत खुश् है। स्पर्श और उसका प्यार ऐसा है कि किसी को भी उन्हें देखकर ईर्ष्या हो जाये,स्पर्श ऐसा जीवनसाथी है जैसा प्रायः हर माँ- बाप अपनी बेटियो के लिए चाहते है ।। सब खुश है बस छवि ही अपने अंदर वो अधूरापन समेटे आज भी इंतजार करती है की काश !मेरी खुशियां ,मेरे रिश्ते, मेरे अपने और मेरी जिंदगी कभी पूरी हो जाये। मिट जाये मेरे और मेरे पापा के बीच का ये अधूरापन और पापा गले लगाकर कह दे की अपनों के साथ जिंदगी कभी तनहा या अधूरी नही रहती । 

मन में एक टीस सी है की क्यों हमेशा औरतो की जिंदगी में खालीपन होता है क्यों उन्हें उनकी खुशियो और इच्छाओ के साथ नही जीने दिया जाता क्यों उन्हें एक को त्यागकर दूसरे को चुनना पड़ता है कभी प्यार के लिए माँ- बाप ,कभी ससुराल के कारन माँ- बाप को,कभी घर परिवार के लिए अपने सपनो को ,अपनी नौकरी और कभी माँ-बाप के लिए अपने प्यार को । जो औरत स्रष्टि को पूर्णता देती है वो हमेशा क्यों टुकड़ो में बाँट दी जाती है??

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