छोटी सी दुनियाँ
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|   Jan 03, 2017
छोटी सी दुनियाँ

छोटी सी दुनियाँ

नन्ही आँखो से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

परिंदे बेफ़िक्रे से उड़ते हें वहाँ

मछलियाँ लहरों में मद मस्त खेलती हें जहाँ

नन्ही आँखों से देखी हे मैंने

एक छोटी सी दुनियाँ

रात दिन सपनों में

परियों के घर बनते हें वहाँ

उन कहानियों में

गुड्डे के साथ गुड़िया की शादी होती हे जहाँ

नन्ही आँखों से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

मम्मी ,पापा के आस पास

बीतते हें खुशियों के पल वहाँ

अभी दोस्तों का नही हुआ हे आगमन् जहाँ

नन्ही आँखों से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

उँचे नभ में बादलों की

कुर्सी हे वहाँ

प्यारे भगवान जी

बैठते हें जहाँ

नन्ही आँखों से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

ज़िंदगी बहुत हे खुब्सुरत हें वहाँ

नही चड़ा हे ज़माने का रंग जहाँ

अभी भी दिल में हज़ारों

नये रंगो से जीवन के पन्ने

रंगे जा रहे हें जहाँ

नन्ही आँखों से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

हिरण की तरह चन्चल

हे मन वहाँ

बाज़ार में खिलोंने देख

नयन बिना पलक झपके

अटक जातें हे जहाँ

नन्ही आँखों से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

मिट्टी में हाथ गंदे

होते हें वहाँ

फिर वो ही नाज़ुक हाथों

के निशान कपड़ो पे छपते हें जहाँ

नन्ही आँखो से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

ममता के आँचल में

निंदियाँ रानी रोज़ आती हे वहाँ

सपनों की नगरी सजाती हे जहाँ

नन्ही आँखो से देखी हे मेंने

एक छोटी सी दुनियाँ

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