कभी कभी दिल में ख़याल आता है 🌸🌸
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|   Aug 05, 2017
कभी कभी दिल में ख़याल आता है 🌸🌸

होता है ऐसा कभी कभी

मिलते है जब तुम और में

आमने सामने तभी तभी

मुझे छेड़ते हुए बोले तुम तभी तभी ...

माँ याद कर रही हे तुम्हें

जाओ हो आओ कुछ दिन

उनके पास भी कभी कभी

रहूँगा में चैन से तभी तभी

याद दिलाती हूँ में उनको

फिर ये तभी तभी

रवि की हर किरण के साथ

बाई के लिए खोलना दरवाज़ा कभी कभी

हो सकता हे दरवाज़े की

हर बेल के साथ आएगी मेरी याद तभी तभी

आएगा धोबी कपड़े लेने कभी कभी

टाइम पर रहना तब तुम घर

कपड़े साफ़ मिलेंगे तभी तभी ...

वो थोड़ा सा मुस्कुरुए तभी तभी

आँखें जो गाड़ी थी अख़बार में

उठती थी ऊपर कभी कभी ..

देखने लगी मेरी तरफ़ तभी तभी

और क्या क्या करना होगा कभी कभी

जब जाओगी तुम माँ के घर

और मुझे घर और ऑफ़िस देखने होंगे तभी तभी ?

अब गेंद जो हमारे हिस्से में आती थी कभी कभी

आज ख़ुद नवाब साहब ने ग़लती से फेंक दी थी तभी तभी ...

मैंने नाश्ता सामने रखते हुए अपनी हँसी छुपा कर कहा

घर में काम होते हे कभी कभी

बस सब्ज़ी ले आना कभी कभी

अपने कपड़े मशीन में डाल देना कभी कभी

सारे काम हो जाएँगे तभी तभी ...

दूध भी ले आना कभी कभी

सवेरे ही पौधों को पानी देना ,उनके लिए

ज़रूरी हे तभी तभी ...

दलिया ,ब्रेड खा लिया करना कभी कभी

हो जाएगा ऐसे तुम्हारा नाश्ता तभी तभी

दिन का खाना हो जाएगा ऑफ़िस में

डिनर किसी दोस्त या बग़ल वाली सुंदर पड़ोसन के यहाँ

कर लेना कभी कभी ..

दिल से बना कर खिलाएगी अपने पति

के साथ तुम्हें भी तभी तभी ...

वीकेंड्ज़ पर बैचलर डे मनाना

बच्चे और बीवी से छुट्टी पाकर अकेले भी

घूम आना बहार कभी कभी ..

अब माथे पर उनके बल आए

कुछ सोचते हुए तभी तभी

बोले क्यों जाना हे माँ के पास अभी अभी

चलेंगे हम सब साथ जल्दी ही थोड़े दिनों में कभी कभी

औरत को भी अपनी अहमियत जतानी चाहिये कभी कभी

आदमी रहते हे ठीक तभी तभी

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