मैं अपने से नीचे लड़के से शादी नहीं करूंगी !!
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|   Apr 15, 2017
मैं अपने से नीचे लड़के से शादी नहीं करूंगी !!

रीना आज के ज़माने की मॉडर्न लड़की थी। मुम्बई के अच्छे कॉलेज से M.B.A. की डिग्री हासिल की और अपने दम पर एक MNC में नौकरी हासिल की। आफिस में सब लोग उसे बड़ी इज़्ज़त से देखते क्योंकि कम उम्र में ही उसने बहुत कुछ हासिल कर लिया था। कितनी ही लड़कियों की तो वो प्रेरणा थी।

पर रीना बिहार के एक छोटे कस्बे से संबंध रखती थी। वह एक माध्यम वर्गीय परिवार से थी जो आज भी Arrange मैरिज,दहेज और बेटी के ज़्यादा पढ़ लिख जाने पर चिंता में आ जाने वाली मानसिकता से ग्रसित थे। उसके माता पिता को हमेशा एक ही चिंता सताये जाती की इतनी सफल और उच्च पद पर काम करने वाली से हमारे समाज का कौन लड़का शादी करेगा। उसके माता पिता दिन भर उसे समझाते की वो वहीं आकर कोई और नौकरी कर ले मुम्बई छोड़कर।

पर रीना अपने सपनो को ऐसे ही बलि चढ़ाने वाली नहीं थी।उधर उसके घर वाले उसके लिए लड़के तलाश करने लगे। कोई भी लड़का उसके जितना उच्च शिक्षित नही था और अगर था भी तो उनके दहेज की मांग को इसके माता पिता पूरी नही कर सकते थे। बहुत खोजने के बाद आखिर एक घर मिला। लड़का post graduate था और सरकारी कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर काम कर रहा था। आगे परमानेंट हो जाएगा और ज़िन्दगी भर सरकारी नौकर बनकर रहेगा और रीना को भी खुश रखेगा ये सोचकर माता पिता को घर समझ आ गया। लड़का भी ये सोचकर खुश था कि उसकी शादी किसी पढ़ी लिखी और कमाती लड़की से हो रही है। और रीना ने भी माता पिता की टेंशन को कम करने के लिए हां कह दी।

शादी की तैयारी दोनो पक्षों में चल रही थी। तभी एक दिन लड़के के पिता का फ़ोन आया। फ़ोन पर उन्होंने उनके पुत्र के कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पद पर चयनित होने की खबर दी। खबर से ज़्यादा उनका चाव दहेज के शून्यों को बढ़ाने में लग रहा था। रीना के माता पिता ने जो अब तक तैयारी की थी उसमें भी वो लोन पर आश्वस्त थे अब और उससे ज़्यादा करने का उनका सामर्थ्य नहीं था। रीना को जब ये बात पता चली तो उसने अपने मंगेतर से बात करने की सोची पर उससे भी किसी तरीके का कोई समाधान नहीं निकला। रीना के पिताजी ने सारे रिश्तेदारों से पैसे मांग लिए पर कोई मदद करने को तैयार नहीं था।

आखिर रीना के पिताजी को अपनी पुरानी ज़मीन जो उनके परिवार की एकमात्र संपत्ति थी गिरवी रखने पर विवश होना पड़ा। रीना की आंखों के सामने ये सब होता देख उसे बहुत दुख होता। आखिर ऐसी क्या गलती कर दी उसने और उसके परिवार वालों ने की अपना सब कुछ दाव पर लगाकर ये शादी करनी पड़ रही है। अपने माता पिता को तिल तिल मरता देख रही थी वो हर पल । कहीं कोई कमी ना रह जाये,लड़के वाले किसी बात पर नाराज़ ना हो जाये। और इन सब का दोषी वो खुद को मान रही थी।

आखिर क्यों? सिर्फ इसलिए कि वो एक लड़की है उसकी डिग्री उसकी नौकरी की कोई वख्त नही और उसका मंगेतर मात्र सरकारी कॉलेज में प्रोफ़ेसर नियुक्त हो गया तो रातों रात दहेज की रकम को दुगुना कर दिया गया। क्या शादी केवल लड़कियों की ही होती है लड़कों की नहीं। क्या परिवार केवल मर्द बसाते हैं औरत नहीं।  समाज के दो अभिन्न अंग हैं दोनो तो दहेज किस बात का। दोनो ही अपनी अपनी जगह ज़रूरी तो ये भेदभाव किस बात का। क्यों लड़की वालों के घर का पानी पीना पाप है, क्यों दहेज से शादी जैसे अनमोल रिश्ते का आंकलन होता है।

बस यही सब कचोट गया रीना को। उसने हिम्मत जुटाई और शादी के ठीक 15 दिन पहले शादी के लिए मना कर दिया। 

"उसने उस लड़के को कहा कि जो आज भी इन् रूढ़ि और अपंग कुरीतियों में अपने परिवार का विरोध नहीं कर सकता वो कल अपनी बेटी के लिए कैसे खड़ा होगा। जो पिता अपने बेटे के लिए बहु नहीं नोट छापने की मशीन ला रहा है  तो कल उसे पिता जैसा प्यार कैसे देगा। मैं किसी गरीब,खुद्दार और उम्दा विचार वाले लड़के से शादी करना चाहूंगी वनिस्पत नीची सोच वाले से, नीचे दर्जे वाले से और नीचे मूल्यों वालो से।

माफ कीजियेगा लेकिन मैं किसी भी तरीके से अपने से नीचे लड़के से विवाह नहीं कर सकती। नीचे उसकी सोच में ,नीचे उसके नज़रिए में।पैसों से ज़्यादा मेरे और मेरे परिवार का सम्मान करना होगा अगर मुझसे शादी करनी है तो सबसे पहले विचारो में मुझसे ऊंचा मुझसे बड़ा होना होगा।"

रीना के जैसे कदम की आवश्यकता आज उन सब लड़कियों को है जो केवल आंख बंद करके अपने आने वाले सपनों में खो जाती है। 

"वजूद तुझे तेरा खुद ढूंढना होगा,सम्मान अपनी नज़रों में करना होगा

कोई पिंजरा नहीं जो तुझे रोक सके,बस स्वावलंबन का निर्वाह तुझे करना होगा"

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