पेरेंट्स सीखें स्विच ऑफ तकनीक
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|   May 02, 2017
पेरेंट्स सीखें स्विच ऑफ तकनीक

 रोहिणी की ऑफिस में इम्पोर्टेन्ट मीटिंग थी ,उसे पूरी उम्मीद थी कि बॉस नया प्रोजेक्ट उसे ही देगा पर ऑफिस पॉलिटिक्स के चलते वह प्रोजेक्ट उसके सबऑर्डिनेट को दे दिया .रोहिणी का तो मूड ही ऑफ हो गया.उसे लगा उसकी सारी मेहनत ख़राब हो गयी .दुखी मन से वह ऑफिस से निकली तो रास्ते में उसकी गाड़ी एक रिक्शे वाली से टकरा गयी .गुस्से में वह घर पहुंची तो उस का  5 साल का बेटा आर्यन आकर उससे चिपक गया और मम्मी आप आज इतना लेट कैसे हो गए पूछने लगा ,आर्यन का इतना कहना था कि रोहिणी गुस्से से उस पर चीख पड़ी ,क्या आर्यन थोड़ी देर चुप नहीं बैठ सकते हर समय सिर्फ सवाल पूछते रहते हो , मासूम से आर्यन को समझ नहीं आया और वह सहम कर सोफे पर चुपचाप बैठ गया .थोड़ी देर बाद जब रोहिणी का गुस्सा शांत हुआ और उसने आर्यन को देखा वह सोफे पर बैठा बैठा ही सो गया था .रोहिणी को अपने ऊपर बहुत गुस्सा आया कि सबमें बेचारे आर्यन की क्या गलती थी वो तो मुझसे प्यार ही कर रहा था लेकिन मैं थी कि अपनी ही परेशानियों में उलझी हुई थी .मुझे  आर्यन के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था .उसने  आर्यन को नींद में प्यार किया और मन ही मन उससे माफ़ी मांगने लगी .

हम सभी के साथ ऐसा आमतौर पर होता रहता है हम अपनी परेशानियों में अपने मासूम बच्चों के साथ misbehave कर जाते हैं जबकि उन सबमें उनका कोई दोष नहीं होता ,लेकिन हम अपना गुस्सा अपनी चिडचिड़ाहट उन्हीं पर निकाल देते हैं .हमारा यह व्यवहार कभी कभी हमारे मासूम बच्चों को हैरान कर देता है क्योंकि उन्हें हमारे व्यवहार का कारण नहीं समझ आता .

           पेरेंटिंग कंसल्टेंट डॉक्टर शिल्पा गुप्ता का कहना है कि हम सभी अपनी निजी जिन्दगी में अनेक तरह की उलझनों में उलझे रहते हैं, घरेलू जिम्मेदारियां , काम वाली बाई से झिकझिक ,ऑफिस में काम का प्रेशर, ऑफिस पॉलिटिक्स, टारगेट अचीव करने का दबाव,रास्ते में मेट्रो की भीड़ इस सब के बीच जब आप घर पहुंचते हैं और बच्चा आपसे कुछ पूछता है तो आप अपनी सारी टेंशन, सारा गुस्सा बेचारे बच्चे पर निकाल देते हैं क्योंकि एक वही है जो आपको सबसे ज्यादा कमजोर दिखता है.

आप सोचिये आप भले ही कितने ही गुस्से में क्यों न हों लेकिन क्या आप अपने बॉस अपने मालिक पर अपना गुस्सा निकाल सकते हैं ?नहीं न ?तो फिर बेचारे मासूम बच्चे के साथ ऐसी ज्यादती क्यों. खासकर जबकि वह आपका अपना बच्चा है .

पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार न करें इसके लिए पेरेंट्स को स्विच ऑफ तकनीक सीखने की ज़रुरत है .

स्विच ऑफ के लिए आप कोई अच्छी किताब पढ़ सकते है, अच्छा म्यूजिक सुन सकते हैं, वाक पर जा सकते है. लेकिन अपनी परेशानियों का रिएक्शन अपने बच्चे पर न निकालें. वैसे भी बच्चे जो भी सीखते हैं आप से ही सीखते है आप जिस तरह से अपने स्ट्रेस से डील करते हैं बच्चा भी आपसे वही सीखता है.

बच्चे के साथ जब भी रहें सिर्फ बच्चे के साथ रहें अगली पिछली सारी बातों को भूल जायें.

बच्चे सोशल स्किल्स या सामाजिक कौशल अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों से सीखते हैं. आप बच्चे को उसके आसपास होने वाली हर छोटी बड़ी घटना से सोशल स्किल सिखा सकते है. फिर चाहे वह घर में होने वाला गेट टू गेदर हो या खेल खेल में बच्चों की लड़ाई .

                                           

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आपकी ब्लॉगर ललिता गोयल !!

 

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