आपकी मुक्ता 
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|   May 03, 2017
आपकी मुक्ता 

बेटी कैसी माँ की परवरिश, बहू कैसी सास की तरबियत

मुझे यह पन्क्ति मेरे जीवन के बहुत ही प्रेरणास्रोत व्यक्ति ने कही थी. सच में मैंने महसूस किया कि यह बात शत प्रतिशत सही है. मेरी दो छोटी बेटियाँँ हैंं. कल बडी़ होंंगी, अपने पैरोंं पे खडी़ होंंगी. उनकी भी शादियाँँ होँगी. आज मै अपनी बेटियो को हर उस तरह का वातावरण देने की कोशिश करती हुँँ, जिस से वह एक अच्छे व्यक्तित्व और सकरात्मक सोच वाली बने. अभी वह स्कूल नही जाती पर शायद मेरे लिए हमेशा उनका सम्पूर्ण विकास उनके ग्रेड्स से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा. क्योंकि वह ग्रेड्स तो कभी भी सुधार लेगी किन्तु मैंने अगर उनके व्यक्तित्व के विकास में चूक कर दी तो उस समय को वापस पल्टाना मुश्किल ही नही नामुम्किन हो जायेगा. मेरे निजी जीवन की कोई भी कड्वाहट मै उनके सामने नही आने देती. मुझे भलिभान्ति पता है मेरे आस पास जो भी लोग है उनमे से कितने सच में मेरे पति, मेरे और मेरे बच्चो के शुभ्चिन्तक है. विडम्बना यह भी है कि मैंं सब जानते हुए भी उनके बारे में कुछ कह नही सकती. पर हाँँ मै सचैत रहती हूँ. जी मैँ हू मुक्ता आपकी मुक्ता. आप सब ने मेरा वह कदम बहुत सराहा जब मैंने फैसला लिया कि अब मैंं अपने जीवन में नकरातमक तत्वोंं को कोई जगह नहींं दूँँगी. आप यह अनुमान नहींं लगाइयेगा कि रातोंं रात आपकी जि़न्दगी बदल जायेगी. लोग ना बदलते हैँ ना बदलेंंगे. लेकिन निर्णय आपको करना है कि आप ख़ुद को adjustment के नाम पे खो नही देंंगी. मैंने ख़ुद को आपके साथ मिल के उबारना है. मै ख़ुद का इतना ज्यादा आंंक्लन करने लगती हूँ क्योंकि मेरे व्यक्तित्व को इतना नुक्सान पहुचाया जा चुका था कि हर बात पे मै स्व्यम को ग़लत समझने लगती हूँ.

आने वाले अंकों में आप से अपने जीवन की कुछ मत्वपूर्ण पल बाटूँँगी. शायद आपको भी अपने उलझन की सुलझन मिल जाये. यह कहानी सास बहू की नही व्यक्तित्व की है.

ख़ुद को पहचानिये और खुश रहिये. जल्द मिलेंंगे. 

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