#Momspiration : माँ कुछ अंश मुझमें तुझ सा... तेरी शक्ति तेरा विश्वास
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|   May 10, 2017
#Momspiration : माँ कुछ अंश मुझमें तुझ सा... तेरी शक्ति तेरा विश्वास

मैं पछतावे के बोझ तले दबा हुआ महसूस कर रही थी, आज मैंने एबॉर्शन कराया था। मेरी बेटी सिर्फ 2.6 साल की है और मेरा सारा वक़्त भी उसकी देख भाल के लिए कम पड़ता है। ऐसे में दूसरे बच्चे की ज़िम्मेदारी लेने के लिए न मैं त्यार थी न मेरे पति और इसलिय हमने यह कठिन फैसला लिया। पर अब मुझे अपने आप से घृणा सी हो रही थी। पति ने मुझसे इसके बारे में ससुराल में बताने से माना कर दिया था,क्योंकि वहाँ सबको दूसरे बच्चे की उम्मीद है, और यह खबर परिवार में तूफान ला देती। मैं बहुत परेशान थी और इसलिए अपनी माँ को फ़ोन करा। मेरी आवाज़ सुनते ही वो भांप गयीं की मैं किसी उलझन में हूँ। माँ अब भी वैसी ही हैं, मेरे कुछ बोले बिना ही सब जान लेती हैं, उनकी आवाज़ सुनकर मुझे थोड़ी राहत मिली और माँ ने शाम को मेरे घर आने की बात कही। मैं उनकी राह देख रही थी , तभी डोर बेल बजी और माँ मेरे सामने थीं। मैं खुद को संभाल नहीं पाई और माँ की बाहों में जाते ही फूट फूट कर रोने लगी। माँ ने मेरी बेचैनी का कारण पूछा तो मैंने सब कुछ उन्हें सच सच बता दिया। माँ ने मुझे पानी पिलाया और मेरे सर पर प्यार भरा हाथ फेरा।  माँ ने मुझे बड़े सुकूंन से समझाया कि ये फैसला सही था और मुझे पछताने की कोई ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा तुमने अपनी 2.6 साल की बेटी के हित के लिए ये निर्णय लिया है जो बिल्कुल सही है, उसे तुम्हारी ज़रूरत है। तुमने जो दर्द आज सहा है वो कल तुम्हें कड़वी याद तो देगा लिकेन तुम्हारी बेटी की मुस्कान उस दर्द को फीका कर देगी। आज माँ ने मुझे एक और सच बताया जो अभी तक उनके दिल में कैद था। माँ ने भी मेरे लिए अपनी एक संतान की कुरबामी दी थी। मैं तब 1.5 साल की थी और माँ पापा ने एबॉर्शन के निर्णय में थोड़ी देर कर दी थी, क्योंकि वो एक छोटे शहर में रहते थे और वहाँ के डॉक्टर भी खास अच्छे नहीं थे। मेरी माँ के एबॉर्शन में दो सर्जरी हुईं क्योंकी एक बार में सब कुछ बाहर नही निकल पाया था। और दोनों बार डॉक्टरों ने मेरे भाई के अंग मेरे पापा के हाथ में थमाए थे, जिन्हें देख कर पापा की रूह कांप गई थी। उसके बाद माँ ने एबॉर्शन के कई sideffects झेले, पर आज तक मुझे यह सच नहीं बताया।  माँ की आवाज़ आज भी यह बोलते बोलते लड़खड़ा रही थी, पर वो रुकी नहीं और उन्होंने मुझे बोला कि" तुम हमारा सपना हो,हमारी उम्मीद हो तुमसे बढ़ कर हमारे लिए कोई नहीं है बेटा, इसलिए अपना ख्याल रखा करो।मैन तुम्हे ये बात इसलिए बताई ताकि तुम समझो कि तुम हमारे लिए कितनी इम्पोर्टेन्ट हो, तो शोक मत करो। 2कजो मैंने 27 साल पहले किया था वही तुमने आज किया है। मैंने भी तुम्हारे अजन्मे भाई के बदले तुम्हें चुना था और आज तुमने अपनी बेटी को चुन कर कोई पाप नहीं किया है।  माँ मुझे समझा कर चलीं तो गयीं लेकिन मैं उस पल से बदल सी गई। मैं सोच में पड़ गयी की 27 साल पहले एक लड़की के लिए अपने अजन्मे लड़के को कुर्बान करना आसान नहीं रहा होगा, जबकि लड़का होना तो वरदान माना जाता था और आज भी माना जाता है। मैंने सोच लिया था कि आज के बाद से अपना ध्यान रखूंगी, अपने माता पिता के संघर्षों का मान रखते हुए उनका नाम रोशन करूँगी। वैसे हमेशा से माँ मेरी प्रेरणा स्रोत रही हैं, पर आज उन्होंने मुझे मेरे जीवन का नया नज़रिया दिया है। मुझे मेरे अंधेरों से निकालकर मुझे बताया कि मैं सिर्फ एक माँ नहीं बल्कि उनकी बेटी भी हूँ जिसका मुझे उतना ही ध्यान रखना है जितना मैं खुद की बेटी का रखती हूँ। 

आज मैंने सीखा की माँ चाहे किसी भी समय की हो अगर वो अपने निर्णयों में मज़बूत है तो उसे कोई परिस्थिति नहीं तोड़ सकती। मेरे मन में अपनी माँ के लिए इज़्ज़त और बड़ गयी है। चाहती हूँ माँ मुझे ऐसे ही जीवन के हर मोड़ पर आने वाली चुनौतियों के लिए सकारात्मक ऊर्जा से भर्ती रहें। कोशिश करूँगी की कुछ उनकी तरह बन सकूँ, जो कल को मेरा जीवन भी मेरी बेटी के लिए प्रेरणा स्रोत बन सके।

          " कितने दर्द तूने सहे होंगे मेरी साँसों के लिए,

          न जाने कितने ज़ख्म रह गए होंगे भरने के लिए

                 अब तुझे कोई दर्द न छू सकेगा माँ,

       क्योंकि ढाल बनकर तेरे रास्ते में अब खड़ी होगी तेरी                                         बिटिया।"

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