# Are our kids safe at school. सतर्क और सावधान रहें..... कुछ आसान तरीकों से
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|   Aug 11, 2017
# Are our kids safe at school. सतर्क और सावधान रहें..... कुछ आसान तरीकों से

माँ बाप होने के नाते हम अपने बच्चों का भविष्य उज्ज्वल और सुरक्षित बनाना चाहते हैं, जो कि अपने बच्चों को दिया सबसे खूबसूरत तोहफा होता है। पर तब क्या करें जब अपने बच्चों के सपनों को पंख लगाने वाले स्कूल ही उनके सपनों के हत्यारे बन जाएं।

स्कूलों में बढ़ते यौन शोषण से शायद ही कोई माता पिता अनभिज्ञ होंगे फिर चाहे वो आसाम के गाँव का छोटा सा स्कूल हो या मुम्बई जैसे मेट्रो सिटी का हाई स्टैंडर्ड स्कूल। ऐसी घिनौनी हरकतें करने वालों का कोई क्लास ही नहीं होता। इसी के चलते बच्चों के लिए सही स्कूल चुनना बड़ा कठिन काम है। 

आइये आप सबकी इस मुश्किल को कुछ हद तक कम करने के उपायों पर एक नज़र डालते हैं :-

  • Sexual Harresment Committee : CBSE के मापदण्डों के अमुसार हर स्कूल में। इस कॉमेटी का होना अनिवार्य है। इस कॉमेटी  में महिलाओं का होना ज़रूरी है। इनका   काम हैै स्टूडेंट्स और टीचर्स के साथ कोई अनहोनी न होने के लिए करबद्ध होंना। अपने बच्चे का एड्मिसन कराने से पहले स्कूल प्रशासन इसकी जानकारी अवश्य लें। हालांकि बहुत कम ऐसे स्कूल हैं जो इन    गाइडलाइन्स का पालन करते हैं।
  • बच्चों को सतर्क बनाएं : बच्चे आपके और  हमारी सोच से कहीं अधिक स्मार्ट हैं। स्कूल जाने के  कुुुछ दिनों पहले से ही उन्हें good touch और bad touch के बारे में समझाएं। उन्हें प्यार से कहेें कि कोई भी अगर उनके private parts को छूता है तो आपको बताएंं। यकीन मांंने ये मैने अपनी बेेटी( 3.3 साल) के साथ आज़माया और वो 4 से 5 दिनों में सीख गयी कि good touch और bad touch में क्या फर्क है।
  • समय निकालें : कभी कभी समय निकाल कर बच्चे केे स्कूल जाएं,वहाँ के वातावरण को समझें। छोटे बच्चों के मामले में उन्हें टॉयलेट कौन और कैसे करता है इसका ध्यान रखेें और  स्कूल वालों से इस बारे में बात करने में  कदापि न हिचकिचाए, याद रखें बच्चे इतने छोटे होते हैं कि उनके साथ क्या हो रहा है वो समझ ही नहीं पाते और इसका ध्यान आपको रखना है।
  • बच्चों की बात को समझें: कई बार बच्चे स्कूल न जाने के बहाने बनाते हैं, लेकिन जब  ये रोज़ की बात हो जाये तो सतर्क हो जायें और स्कूल  जाकर मामले की जांच करें।
  • बच्चों के दोस्त बनें: अपने टीनएजर बच्चों के दोस्त बनें ताकि वो अपनी किसी भी समस्या को आपके सामने खुल कर रख सकेंं।जब आप उनका विश्वास जीत लेंगे, यकीन मानें  आप उनकी सुरक्षा आसानी से  कर सकेते हैं।

हम हमेशा अपने बच्चों का हाथ पकड़ कर नहीं चल सकते इसलिए उन्हें खुद की सुरक्षा के बारे में जागरूक करना हमारी ही ज़िम्मेदारी है। कोई समाज परफेक्त नहीं होता और हम भी ऐसे ही समाज में रहते हैं। लेकिन थोड़ी सी सावधानी से हम अपने बच्चों को दरिंदों का शिकार होने से बचा सकते हैं।

आप सभी से गुजारिश है कि आपनी बेटियों के साथ साथ बेटों की भी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें क्योंकि ऐसी बीमार मानसिकता वाले दरिंदे लड़का या लड़की नहीं देखते। 

आपकी सहेली 

स्वपनिल

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