आई की ऐना"
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|   Apr 12, 2017
आई की ऐना"

आज पूरे 18 बरस बीत गए । जैसे लगता है कल की ही तो बात है। मैं ठीक इसी तरह कुर्सी पर बैठे बीती जिंदगी की तस्वीरें देख रही थी। कैसे वक्त हमारी जिंदगी को तस्वीरों में कैद कर देता है पता ही नहीं चलता। उस दिन भी तो ऐसी ही भयानक तूफानी रात थी ।कितनी जोर -जोर से बिजली कड़क रही थी। बरसते बादल, बिजली की टंकार और बारिश थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। ऐसा मौसम मैंने अपने 78 साल की जिंदगी में इन पहाड़ों पर कभी नहीं देखा। लगता था मानो प्रकृति अपनी अथाह वेदना से तड़प रही हो ...छटपटा रही हो .....। .......तभी अचानक ...दरवाजे पर किसी ने तीन बार खटखटाया । मैंने दीवार पर टंगी घड़ी की ओर देखा, 8:30 बज रहे थे। पहाड़ों पर रात को 8:30 बजे बहुत देर रात मानी जाती है। घबरा तो मैं गई थी पर अब दरवाजा तो खोलना ही था। एल्बम को किनारे रखकर मैं दरवाजे पर गई। तो जो देखा वो आज तक भूल ही नहीं पाई। ....... मेरे सामने तकरीबन 7 साल की छोटी सी बच्ची खड़ी थी। बारिश ने उस पर भी अपना कहर दिखाई दिया था। उसके बदन और कपड़ों से रिस-रिस कर टपकता पानी, उसकी आंखों से बह रहे आंसू के मुकाबले कुछ भी नहीं था। मैं उससे कुछ पूछकर उससे जान पहचान कर पाती ; उससे पहले उसके चेहरे की भाउकता और उदासी ने मेरे मन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। .......क्या बात है बेटा ? क्या चाहिए ?इतनी रात गए..... तुम्हारे साथ कौन है ?बच्ची ने रुंधे हुए गले से बोला -"मेरे नानू -नानी मुझसे बात नहीं करते.... वो बोलते -बोलते चुप हो गए।" अपनी छोटी सी उंगली से दूर सड़क की ओर इशारा करते हुए मुझे वहां चलने की ओर संकेत और प्रार्थना दोनों की ।उसके छोटे- छोटे हाथ की पकड़न आज भी मैं महसूस कर सकती हूं ।हां.... हां..... चलती हूं बस 2 मिनट ठहर जा बेटा । अवी..... अवी........ बेटा जल्दी आ । हां माँ क्या हुआ ? इतनी घबराई हुई क्यों हो? बताओ तो सही। अभी सुन तू बस जल्दी से जा, अलमारी में मेरा पर्स पड़ा है ....उसे ले आ... और सुन उसमें थोड़े पैसे और डाल लेना ।चल जल्दी कर ....जल्दी ......।हां ....हां ..मां और सुन बेटा ! थाने पर फोन घुमा दे , कि यहां सामने वाली सड़क पर जल्दी पहुंचे। .......पुलिस की गाड़ियों के सायरन से वह सुनसान सड़क कुछ ही समय में हलचल से भर उठी। सामने खड़ी कार का हाल ,पूरी दास्तां बयां कर रहा था। शायद ....यह एक्सीडेंट किसी ट्रक से हुआ है। पुलिस वाले आपस में कुछ ऐसे ही बातचीत कर रहे थे ।चलो जल्दी करो .......जल्दी......... इन्हें पास के अस्पताल ले चलो। .....हम तीनों वार्ड के बाहर खड़े अंदर से खबर के आने का इंतजार कर रहे थे। तभी इंस्पेक्टर साहब मेरे बगल में आ खड़े हुए। उनकी आंखों की निराशा और कुछ पल बाद उनकी जुबां पर भी वही शब्द आए - मैडम ! सॉरी .......। ये दोनों वहीं पर ......ऑन स्पॉट .......डेथ...। आप जानती थी इन्हें ?क्या लगते थे ये आपके? ..... काफी समय की जांच पड़ताल के बाद ये पता चला कि इस बच्ची का नाम "ऐना" है । ऐना जब 5 बरस की थी तभी उसकी मां गुजर गई और उसके पापा तो ऐना के इस दुनिया में आने से पहले ही उसे अलविदा कह चुके थे। ...... उस छोटी सी ऐना को इस भरी आबादी के सामने अकेला खड़ा देख, चिंता की रेखाओं ने मुझे घेर सा लिया था। 7 साल की ऐना कब 25 बरस की हो गई मुझे पता ही नहीं चला। इन तस्वीरों में ऐना के 18 साल के सफर को जब -जब देखती हूं तो मुझे उसका सिर्फ एक ही रूप दिखाई देता है। वह 7 बरस की ऐना जब हमारे घर हमेशा के लिए रहने को आई, तब भी वह बड़ी हो चुकी थी ...वक़्त की बदौलत... और आज तो उम्र ने ही उसे बड़ा कर दिया है। ...... जिंदगी को शायद जिंदगी से ज्यादा समझती है मेरी ऐना। सबके साथ मिल जुलकर रहना, हंसना बोलना, सब कुछ ऐना ने सीख लिया ।पर मुझसे अपनी आंखों की मायूसी को छुपाना नहीं सीख पाई वो । ..... अरे ! इतनी रात हो गई इस लड़की का अभी तक कोई पता नहीं । कहां रह गई ये? पीछे से ऐना ने अपनी बाहों में आई को भर लिया। आई ! मैं आ गई आई । कहां रह गई थी तू ? पिछले 1 महीने से मैं देख रही हूं कि तू रोज एक घंटा देरी से आती है और आज.... आज तो तूने इतनी देर कर दी । क्यों सताती है मुझे तू ऐना ।आई, तू तो जानती है ना कि उस पहाड़ी वाले झरने को घंटो देखना मुझे कितना पसंद है। समय कब बीत जाता है मुझे पता ही नहीं चलता। तुझे क्या मिलता है वहां ऐना...... तू बस मुझे परेशान करने के बहाने खोजती है ..बस । नहीं आई, मुझे उस झरने के गिरते पानी बहुत अच्छे लगते हैं। और जब उस झरने का पानी नीचे जाकर खुद को संभाल लेता है तो मुझे उससे बहुत ताकत मिलती है। उस झरने के पानी से, ताकत लेने तो गई थी मैं ....... इसलिए बस देरी हो गई। ऐना तू समझती क्यों नहीं अब तू बड़ी हो गई है। और तुझे तो पता है ना अगले हफ्ते लड़के वाले तुझे देखने आ रहे हैं । अब तो .....। अरे आई ! इसलिए तो देरी से आती थी ना ।मतलब ? साफ- साफ बता, क्या कहना चाहती है? आई ! मेरी आई की ऐना बहुत बहादुर है । और ......और ......मैं और लड़कियों की तरह नहीं हूं आई । जिन्हें जिंदगी का सफर तय करने के लिए किसी का साथ चाहिए। साथ तो कमजोर लोग ढूंढते हैं ना। और आई ,मेरे सारे रिश्ते तो तुझसे ही है ।ऐना की जिंदगी तो तू है ..आई । फिर मैं किसी का साथ क्यों ढूढूं । जिसकी जिंदगी में ऐना की कमी होगी वो खुद आएगा न तेरी ऐना को ढूंढते । और तेरी ऐना ,अपनी जिंदगी को कभी अकेला नहीं छोड़ सकती। कभी नहीं ....आई। और मेरी जिंदगी तो तू है। आई !आई ! वो अवी भइया.....। क्या अवी भइया? क्या कोई खत आया उसका ? नहीं आई .....खत तो नहीं आया । हां वह भला खत क्यों लिखने लगा इस बूढ़ी आई को ? 12 साल हो गए उसे USA गए ,पर अब तक सिर्फ तीन दफे उसने मुझे खत लिखा। अब तो ......... उन खतों ने भी रास्ता भुला दिया यहां का । किसे परवाह है इस से बूढी आई की? बता तू.... क्या अवी भइया कर रही थी ऐना ? नहीं..... कुछ नहीं ,आई। बता अब तू । आई ! वो मैंने तुझे एक बात नहीं बताया ।पिछले महीने अवी भइया के सर्वेन्ट का फोन मेरे पास आया था ऑफिस में। उसने कहा कि अवी भइया अब यहीं सेटल हो चुके हैं । अब इंडिया शिफ्ट होना नहीं हो पाएगा उनका । अवी भइया की ओर से तुझे यह मैसेज देने को कहा ,आई। अरे आई ! तू रोती क्यों है? तेरी ऐना है ना तेरे पास । तू चिंता मत कर आई। मैं तुझे कभी छोड़कर नहीं जाऊंगी । मेरी प्यारी आई ......लव यू सो मच ....।और..... भइया ने ऐसे ही कह दिया होगा। तू क्यों परेशान होती है ? मैं बात करूंगी ना । तू रो मत बस। मेरी आंखों की झुर्रियों के अनुभव ,ऐना की समझ के सामने बेजुबान हो चुके थे । आई .....! कॉफी बनाती हूं ........,साथ दोगी मेरा । इस बारिश में गरम-गरम कॉफी पीने का मजा ही कुछ और है। -प्राची प्रांजल

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