बेटियां
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|   Apr 19, 2017
बेटियां

बोए जाते हैं बेटे उग आती है बेटियां खाद पानी बेटों में पर लहलहाती हैं बेटियां एवरेस्ट पर ठेले जाते हैं बेटे पर चढ़ जाती हैं बेटियां रुलाते हैं बेटे और रोती हैं बेटियां कई तरह से गिराते हैं बेटे पर संभाल लेती हैं बेटियां" ......... कभी-कभी सोचती हूं कि क्या उपर्युक्त पंक्तियां किसी कवि की एकमात्र कविता है या सचमुच एक सच्चाई Iअभी-अभी आमिर खान की फिल्म दंगल में भी तो इन्ही पंक्तियों को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया हैl महावीर की दोनों बेटियां गीता और बबीता जैसे हजारों बेटियां हमारे देश की मिट्टी में खेल रही हैं लेकिन; कमी है तो महावीर जैसे पिता की जो उन्हें हौसला दे सकें lयह सच है कि दुनिया की कोई ऐसी सफलता नहीं है जो यह कहती हो कि वह हमारी बेटियों को नहीं मिलेगी l जैसा कि महावीर ने कहा की" गोल्ड तो गोल्ड है फिर उसे बेटी लावे या बेटा" सच कहूं तो आज बेटियों के लिए कोई ऐसा एवरेस्ट नहीं है जिसे वह चढ़ ना सकेl ..... मां के गर्भ से लेकर दंगल के मैदान तक गीता, बबीता जैसी कई बेटियों ने संघर्ष किया है l किंतु अगर माता-पिता भी ठान लें तो उनकी बेटी सिर्फ उनकी ही नहीं अपितु पूरे देश की धरोहर बन जाती हैl ..... इस छोटे से लेख के माध्यम से मैं ,आप सभी से कहना चाहूंगी कि हमें अपनी बेटियों का हक छीनने का अधिकार किसी ने नहीं दिया है l वह जिस क्षेत्र में चाहे उस क्षेत्र के दरवाजे तक ,हमें स्वयं अपनी बेटियों को पहुंचाना चाहिए l फिर वह खेल हो ,फिल्मी दुनिया हो ,प्रशासन हो ,राजनीति हो या कोई और क्षेत्र l यदि देश के हर मां बाप महावीर जैसे हो गए तो उनकी बेटियों को गीता, बबीता बनने से कोई रोक नहीं सकताl

" खिलने दो खुशबू पहचानो ,कलियों को मुस्काने दो आने दो रे उनको ,इस जीवन में आने दोl जाने किस किस प्रतिभा को तुम ,गर्भ में मार रहे हो जिनका कोई दोष नहीं तुम ,उन पर धर तलवार रहे हो बंद करो कुकृत्य पाप यह, नई सृष्टि रचना जाने दो " अंत में बस मैं इतना ही कहूंगी कि नए वर्ष में हमें बाहें फैलाकर हमारी हर बेटी का इस दुनिया में स्वागत करना चाहिएl - शीला सिं

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