“बस आखिरी बार ........”.
13934
80
|   Apr 21, 2017
“बस आखिरी बार ........”.

यही कोई शाम के 6॰00 या 6.15 बज रहे थे | अपनी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल की बाल्कनी मे खड़ी , मै बाहर चल रही सर्द हवा के झोंको से खुद को बहुत तारो ताजा महसूस कर रही थी की अचानक याद आया और एक झटका सा लगा की अरे मुझे तो क्लास जाना है और मै यहाँ ...........| गीली-गीली सड़क जो कुछ देर पहले हुई बारिश से मुझे अवगत करा रही थी | मै अपने कदमो को तेजी से बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थी की अचानक जैसे मेरे पैर शिथिल हो गए और मेरी आंखो के सामने 6 -7 साल के छोटे –छोटे बच्चों का झुंड, खूब ज़ोरों चीखते- चिल्लाते , हुड़दंग मचाते धूए करने वाली के पीछे जा रहा था ,जो मच्छर मारने के लिए प्रयोग मे लायी जाती है | मैं अचानक से जैसे अपने बचपन मे जाकर खड़ी हो गयी और अगल – बगल मेरे वो संगी साथी जो अब तो बहुत सलीकेदार हो गए हैं पर तब बहुत छोटे – छोटे और बेहद शरारती हुआ करते थे , मेरे आस–पास खड़े हो गए | अचानक से फिर कुछ याद आया ,अरे ! मै फिर ..................| मेरे कदमों ने फिर से गति पकड़ ली पर दिमाग था जो अभी भी अवचेतन अवस्था मे अपनी बचपन की की मंडली मे खेल रहा था | वही एक दूसरे से लड़ना –झगड़ना फिर एक हो जाना ,जैसे अब हम कभी नही झगड़ेंगे | तभी बड़ी झुंझलाहट सी हुई। अरे वो दिन क्यों चले गए जब हर मन कितने निश्छल हुआ करते थे , प्रेम कितना पारदर्शी था और एचएम कितने बेफिक्र हुआ करते थे | पर अब जैसे किसी ऐसी दिशा की ओर जा रहे हैं झ पैरो के नीचे रास्ता तो है पर वो रास्ता कहीं खत्म होते नही दिखता | पता नहीं कब वो मंजिल मिलेगी जिसे इन नजरों ने प्रतिक्षण ढूंढा है | कब मन मे फिर वही छुटपन की बेफिक्री महसूस कर सकेंगे ? फिर कब वो बिछड़े संगी –साथी एक दूसरे को पीटने पाटने  के बाद भी अपनी छोटी- छोटी बाहों से हिलमिल कर , कान पकड़ते हुए ये कहेंगे कि अब कभी भी नहीं लड़ेंगे हम ................| बस आखिरी बार माफी दे दो .......................... 

                                     - प्राची प्रांजल 

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day