जिदंगी भर साथ चलने वाले रिश्तों को कुछ मौके जरूर दें।
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|   May 22, 2017
जिदंगी भर साथ चलने वाले रिश्तों को कुछ मौके जरूर दें।

कुछ दिन पहले मैंने इक ब्लॉग लिखा था "कुछ बातें जो माँ के बाद भी मायके को मायका बनाये रखती है"। मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि आप सब ने बहुत पसंद किया और दिल खोल के अपनी राय भी रखी। बस एक दो बातें जो मै सबके कमैंट्स पडने के बाद कहना चाहती हूँ, इस ब्लॉग के जरिये कह रही हूँ। एक रिश्ता तभी निभ सकता है जब निभाने की चाहत दोनों तरफ से हो। इक तरफ़ा प्यार ज्यादा दूर तक नहीं चलता और खटास ही बढ़ती है। न मै किसी भाभी/बहू की तारीफ या निन्दा कर रही हूँ और न ही किसी ननंद/सास की। बस बात है तो सिर्फ खुद की, खुद इक औरत की। इक औरत जो किसी की भाभी/बहू भी है और ननंद/सास भी। 

मेरी सहेली रिया को हमेशा शिकायत रहती कि उसकी भाभी ठीक से बात तक नहीं करती। उससे कुछ कहो तो खीज जाती है, जब देखो लेटी रहती है। अब मै उस से क्या कहूँ कि रिया मैडम, तुम और तुम्हारी बड़ी बहन सारा दिन उसे काम मे लगाए रखती हो। तुम दोनों उसकी थोड़ी बहुत हेल्प कर दोगी तो घिस थोड़ी जाऒगी। काम जल्दी निपट जायेगा और उसे इक ही बार रेस्ट कर के चैन भी मिलेगा और बार बार मौका देख के आराम करने की जरुरत नहीं पडेगी। मै बता दूँ कि उसकी भाभी प्रेग्नेंट थी। रिया का और परिवार का खुद उस हालत मे भाभी का ख्याल रखना तो छोडो बल्कि उसकी भाभी खुद अपना ख्याल भी नहीं रख पा रही थी। और उसका भाई सब कुछ जानते हुए भी अन्जान बना हुआ था और कभी बस चलता भी तो सिर्फ उसकी बीवी की ही शामत आती। अब बताइये कौन सी भाभी सम्मान देगी।

अब सुनिये रिया की शादी के बाद का किस्सा। अब हमेशा उसे ननंद से शिकायत रहती है कि सारा दिन उसे काम मे लगाये रखती है। कभी अचछे से बात नहीं करती। जब देखो रौब झाडती रहती है। मेरे पति को मेरी शिकायत लगा देती है और पति तो सिर्फ अपनी माँ और बहन की ही सुनते है।

अब बताइये ये पढ़ के आपको हँसी आयी या गुस्सा।  उसे ननंद के रूप मे भाभी से बिना कुछ किए सम्मान चाहिए और भाभी के रूप मे बिना कुछ किए ननंद से। उसकी ननंद उसका रोल ही अदा कर रही है जो उसने अपनी भाभी के साथ किया। उसे भाभी गलत लगती थी तो ननंद से शिकायत का सवाल ही पैदा नहीं होता। 

मै सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ कि हँसता-खेलता, भरा-पूरा सुखी परिवार किसे अच्छा नहीं लगता। हम अपने आप को ठीक रखें। अपने किसी फ़र्ज़ से पीछे न हटें। हमे किसी पे गुस्सा आता है तो जरुरी नहीं कि सामने वाले के मुख से हमारे लिए फूल झडेंगे। हम भी उनको बुरे लगते होंगे। हम किसी और को नहीं सुधार सकते, न किसी ननंद या भाभी को न किसी सास या बहू को। ये रिश्ते ऐसे हैं जो ज़िन्दगी भर साथ चलेंगे। और आमना सामना भी होता रहेगा। कुछ मौके दीजिये लोगों को भी और रिश्तो को भी। सामने वाला भी निभाए तो बहुत अचछा, ज़िन्दगी प्यार से और ख़ुशी से निकल जाएगी। और नहीं निभाए तो भी अचछा, अपने रास्ते पे अपने असूलों के साथ चलते रहिये और अपने आत्मसम्मान को बनाये रखिये। किसी और के लिए अपना खून मत जलाइये। 

नियति का चक्र है, सब लौट के आता है। बहू या भाभी गलत है तो उसे जरूर एहसास होगा कि मैंने भी थोड़ा प्यार लौटाया होता तो सब ठीक होता। ननद को भी एहसास होगा कि उसने सम्मान दिया होता तो आज मायके मे माँ की बातें भाभी से साँझा कर लेती। सास को भी एहसास होगा जब सेवा की जरुरत होगी। 

बाद मे खुद को आत्मग्लानि से बचाने के लिए कुछ मौके जरूर दीजिये। सब ठीक हो जाए तो इस से अचछा कुछ भी नही है, फिर भी बात न बने तो... छोडिए न... जाने दीजिये!!!

"लोग तो भगवान से भी परेशान हैं। हम तो फिर भी इंसान है"।

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Pooja Garg.

 

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