शादी के बाद ......प्यार हो गया
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|   Apr 17, 2017
शादी के बाद ......प्यार हो गया

21 वाँ साल चल रहा था मेरा..... जब लड़के वाले मुझे देखने आए..... फिर.....फिर वही सिलसिला शुरु हुआ  जब दो कुल मिलते हैं ....दो अनजान लोगों को मिलाने के लिए।                                                                                     ना जाने क्यों मुझे लगा  मैं शादी करने के लिएअभी  तैयार नहीं हूं....लेकिन मैं अपने बड़ो की बातों का उलंघन भी नहीं कर सकती थी।                                       मेरी फोटो मेरे ससुराल भेजी गई  और लड़के की फोटो मेरे मायके आई । परिवार वालों को लड़का पसंद आ गया  पर मैंने नहीं देखा ।                                               मेरे अंदर शादी को लेकर कोई उत्सुकता नहीं थी जैसा कि मैंने और लड़कियों में देखा था । मैंने सोचा मैं अपने पति से प्यार कर भी पाऊंगी या नहीं क्योंकि मेरी कभी उनसे मुलाकात तो हुई नहीं सुना था मिलकर बातचीत होती है लड़का लड़की एक दूसरे को पसंद करते हैं तब वह शादी अच्छी मानी जाती हैं । लेकिन मैं गलत थी।                                                                                 मेरी शादी हो गई.... और मैं पहुंच गई उस दूसरे कुल में.... अपने जन्म स्थल को छोड़ अपने कर्म स्थल।               वही से मेरे जीवन का नया अध्याय शुरु हुआ... वैसे यह समय तो हर लड़की के जीवन में आता है सबको पता है लेकिन मेरे लिए बड़ा ही मार्मिक बड़ा संवेदनात्मक और बड़ा ही खूबसूरत पल था।                                जब मेरी मुलाकात मेरे पति से हुई मैं डरी- डरी सहमी सी उनसे पहली बार मिली उनसे मेरी बातचीत हुई उन्हें मैंने जाना समझा, कहीं ना कहीं...मेरे दिल के... किसी कोने में एक छवि जो बनी थी... मैं हैरान थी.. कि वह छवि तो उन्हीं की थी। तब मुझे एहसास हुआ कि कुछ भी यूं ही नहीं होता हम चाहे या ना चाहे... पर ईश्वर तो वही करता है, जो हमारे लिए ठीक होता है. शनै-शनै...... मुझे कब उनसे प्यार हो गया मुझे पता ही नहीं चला.... मैं गलत साबित हुई कि शादी के बाद प्यार नहीं होता।                                                                                    और मैं .... दिल की गहराइयों से उनके प्यार में डूबती चली गई..... डूबती चली गई.... .....                            और फिर मेरे जीवन में वह सुनहरा पल भी आ गया जिसका इंतजार दुनिया की हर औरत को रहता है हमारा अंश.... मेरे पति का अंश.... मेरी रूह में समा चुका था... मैंने एक बेटे को जन्म दिया।                                    मेरी शादी का वह बेशकीमती दिन 16 वीं बार मेरे जीवन में आ रहा है इसी महीने की 20 तारीख को मुझे मेरे जीवन का मकसद मिला... एक ऐसा सहारा मिला... जिसे मैं ताउम्र चाहती हूं जिसने मेरे दुख में सुख में हमेशा मेरा साथ निभाया है मैं उस ईश्वर की सदा आभारी रहूंगी... जिसने मुझे "मेरे जीवन साथी" के रूप में ऐसी खूबसूरत सौगात दी है.......                     उन्होंने मुझे समझा.... हमेशा समझा.... कभी भी अपने पति प्रधान होने का अधिकार नहीं जताया.... मुझे वाकई उन्होंने अपनी अर्धांगिनी समझा... हर कदम पर मेरा साथ दिया है.....                आज मुझे मेरे पति के लिए इन चंद लाइनों को लिखने के लिए मुझे मेरे.... अतीत में... दूर... कहीं नहीं जाना पड़ा मुझे यादों के सागर में गोते नहीं लगाने पड़े....  वो तो हमेशा मुझ में समाए हैं मुझे सब कुछ याद है... जैसे यह कल की ही बात हो!!!!

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