यह कैसी जन्नत ??
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|   May 30, 2017
यह कैसी जन्नत ??

कुछ दिन पहले Netflix पर एक documentary देखी। नाम था ‘Among the Believers’ यह documentary पाकिस्तान के मदरसों पर आधारित है विशेषकर लाल मस्जिद मदरसों पे जो काफ़ी सुर्ख़ियो में रहता है। Documentary में दर्शाया गया कि कैसे बच्चों को मदरसों में दाख़िल किया जाता है? उन्हे वहाँ कया सिखाया जाता है? कैसे दूसरे स्कूलों को यह मदरसे बंद करवा देते हैं इत्यादि । एक छोटे बच्चे को उसके अब्बा मदरसे लेकर आये। मौलवी जी ने कुछ इस तरह से उनकी counselling की- " जैसा आप जानते हो क़ुरान में लिखा है कि जो बच्चा क़ुरान की सारी आयते ज़ुबानी याद कर लेगा वह तो जन्नत जायेगा ही , उसके परिवार के दस सदस्य भी जन्नत जायेगें भले ही उन्होंने कितने भी गुनाह कयूँ न करे हो।"

कितना आसान रास्ता है जन्नत पाने का! अब्बा बच्चे को ख़ुशी ख़ुशी मदरसे छोड़ गये। कुछ जन्नत के लालच में , कुछ मुफ़्त रहने खाने के मोह में तो कुछ समय पर मिलने वाली मदद की रक़म की मजबूरी से अपने बच्चों को मदरसे छोड़ जाते हैं। पढ़ाई में मुख्यत : क़ुरान की आयातों को रटना ही है। बिना समझे हिल हिल कर ज़ुबानी रटना । परिक्षा में भी सिर्फ़ बिना रूके आयातों को सुनाना ही है। जब सब याद हो जायेगा तब उन्हे समझाया जायेगा।

अक्षर सिखाने की जो किताब है उससे आपके रोगटें डे हो जायेंगे । आपने  बच्चों को अ से अनार, आ से आम सिखाया है ! मदरसे में उन्हे ब से बन्दूक़ , से काफ़िर ,म से मुजाहिद्दीन और ज से जिहाद  सिखाया जा रहा है तस्वीरों के समेत। ट से टक्कर है और साथ में अमेरिका के twin towers से टकराते हुये हवाई जहाज़ की तस्वीर है। बचपन से यह कैसा ज़हर बोया जा रहा है? नफ़रत की यह कैसी फ़सल तैयार की जा रही है?

बच्चे सिर्फ़ मौलवी साहब की शिक्षा ही सही मानें उसके लिए काफ़ी इंतज़ाम हैं। वह कोई अख़बार नहीं पढ़ सकते, टेलिविज़न नहीं देख सकते, कोई किताब नहीं पढ़ सकते। यहाँ तक कि गाना और खेलना भी उनके लिए 'हराम ' है। आप समझ सकते हो कि पढ़ाई के नाम पर जानबूझकर उन्हे ज़ाहिल बनाया जा रहा है । जब मैंने पाँच -छह साल के बच्चों को यह नारे लगाते सुना कि जो मुसलमान नही वह काफ़िर है और काफ़िर को मारने से जन्नत मिलती है तो मेरा 'माँ का दिल 'दहल गया। उन मासूम बच्चों के लिए अफ़सोस हुआ जिनका बचपन यूँ बेदरदी से छिन लिया गया है।

बच्चे तो फ़रिश्ते होते हैं उन्हे किस जन्नत का लालच देकर धरती पर दोज़ख़ बनाने की तैयारी हो रही है। साथ में अपने बच्चों के भविष्य का डर भी लगा। महात्मा बुद्ध की अहिंसा का मंत्र पढ़े हमारे बच्चों का सामना इन बच्चों से होगा जो हथियार समझ कर ही पाले जा रहे हैं। रात में मैं सो नही सकी। यही documentary मेरे ज़हन में घूमती रही। वो मासूम चेहरे दिखते रहे जिन्हें उनके माँ- बाप से दूर , हर कोमल एहसास से दूर कर दिया गया है और दिन रात उनके दिमाग़ में नफ़रत बोयी जा रही है ताकी हिंसा का कारोबार चलता रहे। कैसे करेंगे आप बातचीत से शांति जब आपके सामने बन्दूक़ ताने इंसान के बचपन से कोई दलील सुनना ही नही सिखाया गया? कैसे जीतेंगे आप प्रेम से दुश्मन को जब आपके दुश्मन को नफ़रत से ही सींचा गया हो?

यह ब्लाग किसी विशेष सम्प्रदाय के ख़िलाफ़ नहीं है । यह मदरसों के नाम पे ज़हरीली पढ़ाई के ख़िलाफ़ है।

कहते है बच्चे किसी एक क़ौम के नहीं होते वह तो सबके साझा होते हैं। क्यूँ हम अपने बच्चों का मासूम बचपन यूँ मौक़ापरस्त दरिदों के हाथों लुटने से नहीं रोकते? क्यूँ हम ऐसे मदरसों पर प्रतिबंध नहीं लगाते?

उसी रात मैंने यह कविता लिखी थी जो मेरी व्यथित हृदय से निकली थी। हदय जो अब सर्व प्रथम माँ का है!

 

जन्नत से उतरे चंद रोज़ पहले यह फ़रिश्ते

किसे जन्नत का ख़्वाब दिखा भरमाते हो

 

 

मतलब जिनका न समझा न समझाया

कयूँ आयत वह ज़ुबानी रटवाते हो

 

 

मोहब्बत का सबक़ सीखता जिनसे ज़माना

उन मासूमों को नफ़रत का पाठ पढ़ाते हो

 

खुदा बसता है इनकी बेबाक़ हँसी में

बचपन छिन कर ख़ौफ़ जिन्हें सिखाते हो

 

सवाल न करे तुम्हारे गुनाही मनसूबों पे

तालिम के नाम पे ज़ाहिल इन्हें बनाते हो

 

सुकून फ़तह कर सकते है यह ज़र्रे आदम के

बाँट इस्लामी-काफ़िर में ख़ून क्यों बहाते हो

 

जंग है हर इंसान की भीतर छुपे शैतान से

बख़्श खुराफाते इसकी किसे जिहाद बताते हो

 

कैद कर सोच इनकी,हराम बता इलमो-तालीम

मुनाफिक आसमां में कैसी परवाज़ सिखाते हो

 

मुहम्मद ने सिखाया सबक़ तुमहे अमन का

हाफिज बन क़त्ल को रजा उसकी बताते हो

 

किसी मासूम माँ की गोद के नूर-ऐ-नज़र से

कितनी और मासूम माँओं की गोद उजाड़ते हो

 

अल्लाह को न होगी क़बूल यह नमाजे कभी

उसकी नेमतों को मुजाहिद्दीन बनाते हो

 

रहमत है खुदा की यह जिदगी ज़मीं पर

जन्नत के  सराब से रोज़ दोज़ख़ जिसे बनाते हो

-शालिनी सिंह

मुनाफिक - hypocrisy

हाफ़िज़  - one who has memorized Quran

नेमत - gift

# Lalmasjidmadrasa # madrasateaching# Jehad # Islamicfundamentalism

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