हर लड़केवाले ऐसे नहीं होते......
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|   Apr 20, 2017
हर लड़केवाले ऐसे नहीं होते......

कभी ख़बरों में , तो लेखों में तो कभी चर्चाओं में अक्सर ये सुनने को मिलता हैं कि ...हमारी बहन बेटियाँ विवाह के पश्चात अपने ससुराल में सुखी नहीं है या ख़ुश नहीं हैं.कोई दहेज की वजह से ,किसी को जॉब करने की स्वतंत्रता नहीं ,किसी को अपने हिसाब से कपड़े पहनने की स्वतंत्रता नहीं या फिर परिवार का सारा कार्यभार उनके काँधे पर डाल दिया जाता है ओर सहयोग के लिए कोई नौकर चाकर भी उपलब्ध नहीं कराया जाता है ।

समाज में चंद ऐसे लोग होते हैं,जो अपनी ख़राब मानसिक प्रवृति की वजह से दूसरों की बहन-बेटियों को परेशान व दुःखी करते है.ओर ऐसे ही चंद लोगों की वजह से सभी लड़केवालो को आजकल बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है.कहावत भी है ना कि गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है.

मेरी सहेली मीत एक दिन मेरे घर आयी उसने बताया कि ...मेरी बहु के रिश्तेदार का फ़ोन आया मेने हाल चाल पूछा फिर बातो ही बात में वो अपनी लड़की का ज़िक्र करने लगी ....बेटी ने इंजेनेरियंग की पड़ायी करके एम॰बी॰ए॰ कर लिया है,आई टी कम्पनी में जॉब कर रही है,बस सोचते है अच्छा लड़का मिल जाए .....तो शादी करदे...! मेरी सहेली ने पूछा.....आपको कैसा घर परिवार चाहिए ?

वो बोली भाभी जी हमें तो आपके जैसा छोटा परिवार चाहिए,जहाँ ज़्यादा झंझट नहीं हो .अब लड़की नौकरी करती है तो सबका खाना थोड़े बनाएगी ?मेरी सहेली ने जैसे तैसे बात ख़त्म करके फ़ोन रख दिया .वो सोचने को मजबूर हो गयी की आख़िर मेरा जैसा परिवार ही इनको क्यों चाहिए ?मेरा परिवार तो अधूरा है,ना पति है...ना बेटी बस दो बेटे ओर में...! क्या सचमुच लड़कीवालो की आज ये सोच बन गयी है ?किपरिवार में जितने कम सदस्य होंगे उतने ही उनकी लड़की के लिए झंझट मतलब परेशनियाँ कम होंगी .

आप बताये क्या परिवार झंझट होता है ?हम चाहे कितने हीआधुनिक हों,कितने ही पड़े लिखें हो ,कितने ही सुख सुविधाओं से लेस क्यों ना हो ?पर क़ुदरत के आगे किसी का ज़ोर नहीं चलता. कब ? कौनसी ? परेशानी जीवन में आ जाए ,ईश्वर ना करे बच्चों के साथ कभी कोई अनहोनी हो या कोई अचानक कोई समस्या आ जाए,उस समय ये ही परिवार मतलब झंझट ही होता है जो उनके साथ खड़ा रहता है.

वर्मा आंटी बता रही थीं, कि जब वो अपने बेटे के लिए रिश्ते ढूँढने जाती है तो लड़की वाले कैसे कैसे सवाल करते है.....आपके बेटे का पैकिज कितना है.....क्या भविष्य में विदेश में नौकरी करने का प्लान है.....आप बेटे के साथ रहतीं है या अलग...? क्योंकि बच्चों को तो आजकल स्पेस चाहिए होती है.हमने तो अपनी लड़की को बहुत लेविश्ली पाला है.......!!

लड़कीवालो की इतनी सब चाहते क्या किसी दहेज माँगने से कम हैं ?नहीं तो पहले लोग ये देखते थे कि लड़के का परिवार अच्छा है ,संस्कारी लोग है ,लड़का अच्छा कमाता है ,उसमें कोई बूरी आदतें (सिगरेट,शराब )तो नहीं है ?ये सब बातें तर्क संगत लगतीं थीं क्योंकि जिस लड़के को या परिवार को वो अपनी अमानत (बेटी)सौपने जा रहे हैं ,वो लोग उसे ठीक से संभाल पाएँगे.

वर्मा आंटी ने अपना सारा जीवन बच्चों का भविष्य बनाने में लगा दिया ओर पारिवारिक दायित्वों को भी बख़ूबी निभाया ओर अब पति भीनहीं रहे तो आगे की ज़िम्मेदारियाँ भी उन्हे अकेले निभानी है,ऐसे में वो तो ये ही चाहेगी ना कि उन्हें ऐसी बहु ऐसी मिले जो उन जिम्मदारियों के बोझ को कम करने में उनकी मदद करे,जो वह अबतक अकेले ढो रहीं थीं,ओर उनके जीवन से जो ख़ुशियाँ रूठ कर चली गयी है वो उन्हें पोते पोती के रूप लोटाए,नाकि जो ख़ुशी उनके पास है(उनका बेटा)उसे भी उनसे दूर करदे मतलब विदेश ले जाए या अलग रहे..उन्हें लड़कीवाले चाहे दहेज में दुनियाभर की दौलत दे दें.....उनके लिए तो सच्ची दौलत बहु बेटे का साथ है..!!!

कुछ दिनो पहले की बात है ,में अपने मायक़े गई हुई थी ....ओर जैसा कि अक्सर होता है मायक़े जाओ तो दिल करता है की आस पड़ोस ,या अपने क़रीबी लोगों से मिलकर जाओ,फिर कब आना हो.......? ये ही सोचकर में अरोरा आंटी से मिलने चली गयी.......अरोरा आंटी से हमारे पारिवारिक सम्बंध हैं,सदैव वो हमारे दुःख सुख में हमारे परिवार के साथ देते आए है.कुछ वर्ष पहले ही अरोरा अंकल का देहांत हो गया था.दोनों पति पत्नी स्वभाव से बहुत हँसमुख,दयालु ओर हर समय दूसरों की मदद में सबसे आगे रहते थे......रात के २बजे भी कोई मदद के लिए दरवाज़ा खटखटाता तो उन्होंने कभी ना नहीं किया.अपने पैसे से भी दूसरे की मदद करते थे.उनके घर मेहमानों का ताँता लगा रहता था. घर में हमेशा ख़ुशी का माहौल रहता था .

बड़ें बेटे की शादी के बाद ,तो मानो उनके घर की ख़ुशियों को किसी कि नज़र लग गयी.बहु की आज कोई डिमांड तो कल कोई होती थी.वैसे वो साधारण परिवार से थी,शादी का अतिरिक्त ख़र्चा भी अंकल ने ही उठाया था.अंकल आंटी को बेटी नही थी इसलिए वो उसकी हर फ़रमाइयश पूरी करते थे यानी खाने पीने ,घूमने की आज़ादी सब.शादी के चार साल बाद बेटी हुई ,अंकल आंटी बहुत ख़ुश हए थे .पर शायद अंकल के नसीब में पोती का प्यार नहीं था ,उनका कुछ समय बाद देहान्त हो गया .

अंकल के जाने के बाद ,वो आंटी पर दबाव बनाने लगी कि वो मकान उनके नाम करदे चूँकि उनका मकान दो मंज़िला है,नीचे वे स्वयं रहते है ओर ऊपर का पोर्शन। किराये पर दिया हुआ है,अब जो एकमात्र आंटी की कमाईं का ज़रिया है .आंटी ने मना किया तो उनके ऊपर पुलिस केस कर दिया,अब आंटी ने बताया कि कोर्ट में में भी मुक़दमा भी दायर कर दिया है,सबको कहती फिरती है में इनको नाकों चने चाबवाऊँगी.पति से कहती है.......तेरी माँ मर जाए,तेरा भाई ट्रक के नीचे आ जाए तो सब मेरा हो जाएगा. आंटी को तो। वो ............तेरी माँ.......बुढ़िया.....जैसे नामों से बुलाती है.बेटी को पिता से नहीं मिलने देती ना ही दादी से .उसे सारा दिन कमरे में बंद रखती है,बच्ची सहमी सहमी रहती है .वो इतना नहीं समझती की इन सब बातों का उस मासूम पर क्या पड़ेगा.....? क्या संस्कार दे। रही है वो अपनी बच्ची। को... ?क्या करे वो बेचारी औरत ?एक तो पति नहीं ,ओर ऊपर से बुढ़ापा.जो उम्र शांति से बैठकर खाने की होती है ,उस उम्र में वह कोर्ट कचहरी के धक्के खा रही है........जिस उम्र में कहा जाता है कि अब तो पूजा पाठ भजन कीर्तन करो.....उन्हें तो सुबह से शाम तक बहु के कड़वे वचन,ताने सुनने पड़ते है ओर जो इज़्ज़त उन्होंने इतने सालों में बनायी थी उसकी तो उसने वाट लगा रखी है .घर मे क्लेश के चलते लोगों ने उनके घर आना छोड़ दिया है,रिश्तेदारों ने भी किनारा कर लिया है..........ऐसे में कहाँ जाए ऐसी माँ........?किसको सुनाये अपना दर्द......?

ना जाने कौन सिखाता है बेटियों को ये बातें? क्यों धीरज नहीं रखतीं..?आख़िर सास ससुर का जो भी है ,उनके बाद उनका ही तो है.

मेने ऐसे भी सास ससुर देखे हैं जो बहु को अपनी बेटियों से ज़्यादा प्यार देते है ,अपनी सामर्थ्य से ज़्यादा उनके लिए सुख सुविधा जुटाते हैबेटियाँ ये तक कहने लगती है कि......बहु क्या आयी आप तो हमें भूल ही गए...!!

कम्फ़र्ट्स की कोई सीमा नहीं होती....जितने हो कम होते है .जिन्हें ख़ुश रहना होते है ,वो थोड़े में भी रह लेते है ओकुछ ऐसे होते है ,जिनके क़दमों में सारी दुनिया की नियामत लाकर रख दो वो दुखी ही रहते है.

कई बार लड़के वाले चाहते हैं कि विवाह सादगी से हो ,ज़्यादा पैसों की बर्बादी ना हो ,किंतु लड़कीवालों का कहना होता है कि हमारा समाज में एक स्टेटस है,हम तो शादी धूमधाम से करेंगे .......!!!!

माना कि समाज में कुछ ऐसे ऐसे लोग होते है,जो दूसरे की बेटियों(यानी अपनी बहुओं) के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते है ,दहेज के लिए प्रताड़ित करते है तरह तरह की यातनाएँ देते है,उनकी कड़ी से कड़ी निंदा होनी चाहिये उनके ख़िलाफ़ बेटियों को आवाज भी उठानी चाहिए ओर ठोस करवाहि भी करनी चाहिए..... पर इसमें 'सब' शब्द को नहीं लाना चाहिए.. ........ क्योंकि,पाँचो उँगलियाँ ek si नही होती है----

हर सिक्के के दो पहलू होते है ,हर लड़केवाले ऐसे नहीं होते है......

मेरे विचारों से आप कितने सहमत हैं, अवश्य बताए........

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