वो हर जन्म में मुझे ऐसी ही माँ दे.....
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|   Apr 13, 2017
वो हर जन्म में मुझे ऐसी ही माँ दे.....

माँ का नाम आते ही मन श्रद्धा ओर प्रेम से भर जाता है .वैसे तो माता पिता दोनों ही बच्चों के लिए अहम होते है ,किंतु कहीं ना कहीं माँ बच्चों के दिल के ज़्यादा क़रीब होती है ..,उनका दुःख दर्द बिना कहे ही भाँप लेती है . कुछ वर्ष पहले की बात है ....मेरी सहेली मीना के बड़े बेटे रोहित की १२वी बोर्ड की परीक्षाएँ शुरू होने वाली थी ..रोहित पड़ने में बहुत होशियार था ......हमेशा कक्षा में अवल्ल आता था.इस बार तो उसने पूरे वर्ष बहुत मेहनत की थी ...वह इंजीनियेर बनना चाहता था,ओर इसके लिए उसके पास मात्र एक ही विकल्प था कि १२वी की परीक्षा में अच्छे अंक आए....क्योंकि उस समय प्रवेश परीक्षाओं का प्रावधान नहीं था .सब कुछ ठीक चल रहा था ...परीक्षा शुरू होने में शेष दो दिन रह गए थे ...मीना बेटे के साथ बैठी थी,क्योंकि मीना ने भी रसायनशास्त्र में एम॰एसससी॰ की थी तो बेटे को जहाँ कही दिक़्क़त होती ...वह मदद करती .अचानक पति के ऑफ़िस से फ़ोन आया कि उनकी तबियत बिगड़ गयी थी,ओर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है .मीना को तो मानो काटो तो ख़ून नहीं ,ऐसी हालत हो गयी....बेटा भी घबरा गया ओर रोने लगा .बेटे को रोते देखकर ....मीना ने अपने आपको सम्भाला ओर रोहित को ढाँढस बँधाने लगी....सब ठीक हो जाएगा -'मैं हूँ ना '.तुम केवल अपनी पड़ायी पर ध्यान दो .रोहित की पूरी परीक्षा के दौरान मीना के पति के दो मेजर ऑपरेशन हुए ,उसका एक पाँव घर में व एक अस्पताल में रहता ....पर उसने .अपने आत्मविश्वास को कम नहीं होने दिया.....बड़े धेर्या के साथ दोनों बच्चों को अकेले सम्भाला.सदैव चेहरे पे मुस्कान लिए रहती ओर रोहित को भी प्रोत्साहित करती रहती.....परीक्षाएँ समाप्त हो गयी......मीना के पति भी सकुशल अस्पताल से घर आ गए .कुछ ही दिन में रोहित का रिज़ल्ट आ गया .....उसने अपने विद्यालय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान पाया साथ ही राज्य स्तर पर भी मेरिट में स्थान पाया...मीना ओर उसके पति तो ख़ुशी के मारे फूले नहीं समा रहे थे .... सब लोग बधाई दे रहे थे .......ओर सफलता का सारा श्रेय रोहित को दे रहे थे..रोहित के विद्यालय मे ऐसे बच्चों को सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन रखा गया ,जिन्होंने १२वी बोर्ड की pariksha में विद्यालय का नाम रोशन किया था....अविभावको को भी बुलाया गया था .मीना रोहित के साथ सबसे आगे की पंक्ति में बैठी थी. कार्यक्रम शुरू हुआ ....... कुछ औपचारिकतायो के बाद स्टेज पर रोहित को बुलाया गया .......प्रिन्सिपल व मुख्यअतिथि ने रोहित की पीठ थपथपाई ओर हाथ में मायिक थमाते हुआ कहा ......बेटा अपनी सफलता का श्रेय आप किसको देना चाहोगे ..........मेरी सफलता के पीछे मेरी माँ का समर्पण है ....सब के लिए ये सामान्य सी बात हो किंतु माँ के लिए वो समय किसी चुनौती से कम नहीं था .एक तरफ़ पापा का ऑपरेशन करवाना तो दूसरी ओर मेरी परीक्षा सुचारू रूप से सम्मपन्न करवाना ......,..उस कठिन समय में भी उन्होंने अपना मनोबल बनाए रखा ओर मेरा भी उत्साह बनाए रखा.......जिसके पास ऐसी ममतामायी,धेर्यशाली मॉ हो वो जीवन की हर कठिन से कठिन परीक्षा में। सफल हो सकता है.... ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ.....वो हर जन्म में मुझे ऐसी ही माँ दे.............!!!

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