बड़े शहर की औरतें !.......
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|   Feb 06, 2017
बड़े शहर की औरतें !.......

मुझे ऐसा लगता है जैसे महानगरो मे दो तरह की शादीशुदा औरतें होती है, एक तो वो !....... जो शादी के बाद घर मे भारी साड़ी या सूट पहन कर सिंदूर से लम्बी सी माँग भर कर , चमकदार बिंदी लगा कर ,पैरो मे छम छम करती पायल और बड़ी सी तीन बिछीया पहनती है । क्युँकि!....उन्होंने बचपन से अपने घर मे दादी, चाची, बुआ और मम्मी को ऐसे ही देखा और ये भी सुना कि ये सब सुहाग की निशानी है, इन्हे सुहागन औरत को हमेशा पहन कर रखना चहिये नही तो पति की उम्र कम हो जाती है। पर वो उस समय सोच मे पड़ जाती है जब वो अपने पति के साथ बड़े शहर मे रहने जाती है। क्युँकि !.... वहाँ ये सब उन्हे थोड़ा सोचने पर मजबूर करता है पर ये बड़ी चतुराई से इसके बीच का एक रास्ता निकाल लेती है। जैसे बिंदी का साइज़ थोड़ा छोटा करके, सिंदूर तो बीच की माँग मे भर कर साइड के बाल बना लेती है, पायल थोड़ी हल्की कम घुँघरू वाली और बिछीया तीन से दो और वो भी थोड़ी छोटी । ये बखूबी जानती हैं की अगर ये जीन्स या कोई और फेन्सी ड्रेस पहन रही है तो उसके साथ इनका बिंदी का साइज़ भी वैसा ही छोटा और फेन्सी हो... चूड़ियों की जगह कंगन या ब्रेसलेट और पायल बिछीया वो तो ये हर ड्रेस के साथ पहनती ही है क्युँकि इनका कोई सबसटिटयूट नही मिल पाता और इनके बिना ये रह भी नही सकतीं। क्युँकि!........इन्हे सिखाया यही गय़ा।....कि पति की उम्र इनसे ही बढ़ती है.....। और दूसरी तरफ़ होती है वो ।......जो भले ही किसी ने कुछ भी सिखाया पढाया हो वहीं करती है जो उन्हे पसंद है । जैसे वो बिंदी चूड़ियां तभी पहनती है जब उन्होने साड़ी, सूट या ऐसे कोई लिबास पहने हो जो इनके बिना अधूरे से लगते है । और फेन्सी ड्रेस पर तो ये बिंदी और कंगन से दूर ही रहती है। माँग वांग भरना !........ इनके लिये कोई रोज ज़रूरी भी नही है ऐसा नही है की इन्हे अपने पति की लम्बी उम्र की चिंता नही।..... होती है.... बस वो उसे किसी और चीज़ से जोड़ना पसंद नही करती। 

इसमे कौन सही है ?.....या कौन गलत?.....ये धारणा नही है बस अपना अपना विश्वास और जीवन जीने का ढंग है । पर दोनो के ही जीवन मे उनके पति की महत्ता उतनी ही होती है ।

पुरुषों के साथ ऐसा क्यों नही है ?..क्यों उन्हे नही फिक्र होती अपनी पत्नी की लम्बी उम्र की...? या होती तो है पर उन्हे इसके प्रदर्शन किसी साज श्रॄंगार की या किसी व्रत त्यौहार की आवश्यकता नही तो फ़िर महिलाओं कॊ क्यों होती है ॥

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