बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !... जब.....
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|   Feb 15, 2017
बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !... जब.....

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !... जब लोग भगवान से बेटे कि जगह बेटी मांगेंगे ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होगी..... उस दिन !... जब उनके पैदा होने पर माँ कॊ ताने नहीँ बधाई मिलेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !.... जब उसके पैदा होने पर मिठाई बटेंगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !.....जब उसके पैदा होने पर मातम सा नहीँ ज़शन सा माहौल होगा ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !....जब उसे बचपन से ही लडको के बराबर सम्मान मिलेगा ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !.... जब लोग उसके कपडो और रहन-सहन पर टिप्पणी करना बंद करेगे।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी....उस दिन !.... जब उन पर होने वाले अपराध ख़त्म हो जायेंगे ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होगी....उस दिन !.... जब उन्हे छूने वाला हर अपराधी डर से कापेगा ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !... जब वो दिन और रात मे निडर होकर घर मे या बाहर रह सकेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होगी.... उस दिन !... जब वो अपनी तरफ़ उठने वाली हर नज़र का सामना कर सकेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !....जब उस पर निर्णय थोपे नहीँ ,बल्कि उसकी सहमति से लिये जायेंगे ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी...... उस दिन !.....जब देर से घर आने पर उसके भाई से भी वही सवाल किये जायेंगे ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी...... उस दिन !....जब वो अपनी शादी का फैसला अपनी नींव मजबूत होने पर अपने आप करेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !.... जब उसे घर के काम उसकी आत्मनिर्भरता के लिये सिखाये जायेंगे ना की ससुराल जाने के लिये ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !.... जब उसे ससुराल जाते हुए सबके सम्मान के साथ खुद के आत्मसम्मान कॊ बनाये रखने की सीख भी दी जायेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !.... जब उनका रिश्ता नारियल और सिक्के के शगुन से होगा ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !...... जब उन्हे दहेज के लिये ताने नहीँ सुनने पडेंगे ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !.... जब वो प्रताडित होकर आत्महत्या करना बंद कर देंगी। 

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !.... जब दहेज लोभी उनकी हत्या करना उन्हे जिंदा जलाना बंद कर देंगे ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !.... जब वो ससुराल मे भी मायके सा स्नेह और दुलार पायेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी.... उस दिन !.... जब वो सास ससुर मे माता पिता सा अपनापन पायेगी।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !.... जब वो ससुराल से मायके पूछ कर नहीँ बता कर जायेगी ।

बेटियां बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !....जब खाने मे उनकी भी पसंदीदा डिश बनेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन !.... जब वो औरों से पहले खुद के लिये सोचेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी..... उस दिन जब !...वो भी सप्ताह मे एक छुट्टी पायेगी ।

बेटियाँ बोझ नहीँ होंगी...... उस दिन !....जब वो खुद माँ बन कर फ़िर से वही सम्मान पायेगी ॥

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