अहमियत काम की,और सिर्फ काम की
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|   Jul 23, 2017
अहमियत काम की,और सिर्फ काम की

क्या फटाफट काम करती है,,,हवा का रुख रखती है,,,उसके जैसा तो होगा ही नही......क्या बच्चों की देख रेख करती है,,,,दुसरो के घरो में जाकर देखो,कितना साफ़ सुथरा घर रहता है,,,हेर चीज़ अपनी जगह व्यबस्थित,,,थकती नही है सारा दिन लगी रहती है,,,,उसकी तुलना करना किसी से तो लोहे के चने चबाना है,,,,और कुछ लिखू या मेरे हिसाब से काफी हे,,,,

इसका उसका दुसरो का,,,,क्या बस दुनिया में काम की ही अहमियत हे,,,,इंसान की नही ,,, क्या इस दुनिया में हर इंसान परिपूर्ण हो सकता हे,,,,,,क्यों लोग तुलना करते हे,,,,क्यों वो खुद के पास जो हे या जैसा हे उससे खुस नही होते,,,,क्या जरुरी हे हर बार किसी का उदाहरण रखना,,,,,उससे क्या प्रूफ होगा,,,,या अपनेआप को प्रूफ करना जरुरी हे,,,इस दुनिया में इंसान को' इंसान हे ,समझ के याद किया जाता हे या उसके काम और अपनी जरूरत के लिए,,,,,इस दुनिया में कोई इंसान मशीन की तरह काम करता हे तभी वो किसी की जिंदगी में अहमियत रखता हे,,, 

क्या जो इस तरह के सवाल उठाते हे वो अपनी जिंदगी में परफेक्ट हे,,,शायद उन्हें गोल्ड मेडल मिला होता होगा प्रमाणपत्र के साथ ,,,,इसीलिए दुसरो को जज कर लेते हे,,,,

इतना सब कुछ बोलने का मतलब ये नही हे की मैं कोई दूध की धूलि हु,,,मैं भी उसी भीड़ का हिस्सा हु जो जरुरत पड़ने पर लोग की याद करे या किसी के काम को देख कर ही उसकी तारीफ करे,,,,निकम्मा बेठा इंसान किसको अच्छा लगता हे,,

प्यार उमीदे ,,,सब इसी से जुडी हुई हे,,,,इंसान की कोई कीमत नही हे,बस काम ही अहमियत हे जब शादी करके एक लड़की किसी के घर जाती हे तो कोई उससे ये नही पूछता की बेटा तुम्हारी क्या इच्छा हे ,,क्या ख्वाहिशे हे ,,,तुम अपनी जिंदगी में क्या चाहती हो,,क्या हम कुछ मदद कर सकते हे,,,हम भी अब तुम्हारे परिवार के जैसे एक परिवार हे,,,,

कोई नही पूछता,,,पहला सवाल होता हे तुम घर सम्भाल लेती हो न,,,तुम्हे रसोई संभालनी तो आती होगी न,,,,घर का सारा काम तो आता होगा न,,,खाना बना लेती हो,,,,,

क्यू कोई इंटरव्यू चल रहा हे बाई का, जो उस लड़की को पास होना जरुरी हे,,, पास नही हुई तो तुम्हे नाकारा साबित कर दिया जाएगा,,,इस घर में तुम इंसान होने के नाते नही आ रही हो या सद्स्य बन रही हो बल्कि तुम्हारा काम ही तुम्हारी पहचान होगा,,,,

चलो पलट के बार करते हे उस लड़की का जवाब,,,नही मुझे घर संभालना नही आता क्योंकि माँ बाप ने अभी तक सारी जिम्मेदारी उठाई हे ,तो कभी जरूरत ही नही पड़ी,,,खाना बनाना नही आता माँ ने कभी रसोई की शक्ल देखने ही नही दी,,बस माँ बाप ने पढ़ाया लिखाया और बनाया नवाब ,,,उस बारे में पुछलो कुछ भी,,,डिक्टेशन से पास होकर दिखायेगे,,,अब हर इंसान हर फील्ड में तो अब्बल नही हो सकता तो क्या वो नाकारा हे,,,,,क्या उससे दुसरो की जरूरत के हिसाबसे निपुण होना चाहिए,,,,

मुझे नही लगता किसी को भी किसी के लिए प्रूफ की जरूरत हो,,,,,हर इंसान का अपना एक हुनर है,,,ये कोई रील लाइफ नही हे जहाँ कोई अपने आप को साबित करने के लिए पैतरे अपनाता रहता हे और एक हीरो या हेरोइन की तरह जीत उससे की होती हे,,,,,,

धन्येवाद

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