Meri raat meri sadak हाँ हूँ मैं घर के बाहर
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|   Aug 12, 2017
Meri raat meri sadak हाँ हूँ मैं घर के बाहर

फिर लेट हो गया तुम्हें, छोड़ दो ये  नोकरी , क्या सही में ऑफिस में ही रहती हो काम की वजह से या कोई और कारण है। कोई चक्कर तो नही ना। और ये तैयार क्यूँ हो कर जाती हो, जरूरी है क्या ऐसे जाना। ये किसका नम्बर है , जो तुम्हे मैसेज कर रहा हैं, होगा त्यौहार अपनी जगह, बधाई देने के लिए तुम ही मिले ,क्या जरूरत है किसी को भी नम्बर देने की। सब को मेरे नम्बर दो ।औरत जात हो वैसे रहो। राजीव इतना नही इसके भी ज्यादा बहुत कुछ बोल गए।

चेक किया उसने खुद का मोबाइल किसका मैसेज आया है जो उसे इतना सुनना पड़ा, ये तो ऑफिस का ग्रुप है जहाँ सब सिर्फ काम के लिए ही जुड़े हैं । किसी ने उसे पर्सनल मैसेज तो किया नहीं । क्या गलत हैं इसमें।

जरा खुद को एकबार फिर आईने में देखने पर जाना , नार्मल ही तो लग रही हैं वो, कौनसा मेकअप करके जा रही हैं। हाँ लेट हो जाती हैं आने में हो भी क्यूँ ना ऑफिस से निकल कर बस का  इतजार करो। कभी कभी तो आधे से एक घंटे लग जाते हैं इस 15 मिनट के सफर में। कितनी बार गाड़ी का कहा उसने पर हमेशा कोई ना कोई बहाना बना मना कर दिया जाता हैं।कितनी बार जब वो ऐसे ही नार्मल रहती हैं तो राजीव ही उसे बताते हैं देखो वो लड़की कितनी सुंदर लग रही हैं, उसकी हेयर स्टाइल देखो। कितने बढ़िया कपड़े पहने हुए हैं।हाँ ऐसे कपड़े उसे ना कोई लेने देता हैं ना दिलाता हैं।

क्यूँ उससे पूछा जाता हैं ऑफिस में काम ही करती हो या कुछ और। ऑफिस में काम के अलावा कुछ और करती तो कौन उसे इतने साल अपने यहाँ रखता। हर साल मिलने वाला बोनस ओर इन्क्रीमेंट बिना काम किये ही तो मिलता हैं जिसे ले कर उससे ज्यादा घर वाले खुश रहते हैं।उसे याद है उसके एक एक पैसो का हिसाब रखा जाता हैं । नोकरी छोड़ भी देतो क्या राजीव उसे उसकी जरूरत की चीजें दिला देगे।एक बार ऐसा करके भी कर चुकी हैं, अब वही गलती नही दोहराने वाली।

रोज की खबरों ने उसे इतना परेशान कर रखा है कि ऑटो या टैक्सी लेने का तो सोच भी नही सकती। बस में साथ वालो के साथ कम से कम safe तो महसूस करती हैं। 

क्यों डरती हैं वो सब से। क्या कुछ गलत किया है उसने ,अपनी पहचान साबित करना गुनाह हैं उसका। क्यों नही उसको हक़ अपनी पसंद के कपड़े पहनने का, अपने लिए जीने का।रात में लेट हो जाए तो इतना डर लगने क्यों लगता हैं उसे। 

बस बहुत हुआ, कभी राजीव ने उससे नही पूछा मै जाऊ की नहीं।ना ही कभी उसके लिए खाने का वैट किया। उसे तो राजीव की इनकम ही नही पता है तो हिसाब क्या लेगी । अब वो अपनी ज़िंदगी दुसरो के मुक़ाबित नही ज़िएगी , जब राजीव को हक़ हैं लेट आने का तो उसे भी हैं । उसने भी इस घर की जिम्मेदारी बराबर अपने ऊपर ले रखी हैं और शायद राजीव से ज्यादा भी ।

कोई नही होता उससे ये बोलने वाला तुमने कैसे कपड़े पहने है, कैसे चल रही हो, या किससे बात कर रही हो। वो खुद समझदार हैं और अपनी रक्षा करना जानती हैं। यही सब उससे गर प्यार से कहा जाए तो सब सुनने और मानने को तैयार है पर थोपा जाए तो उसकी ना ही मिलेगी 

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