वो चार दिन
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|   Jul 27, 2017
वो चार दिन

"अरे रुको किसी को छूना मत पाप लग जाएगा, फिर तुम्हारे कारण सबको इसका पाप पड़ेगा"
एक दम से ये आवाज सुन राधिका का हाथ टॉवल पर जाते जाते रह गया। उसे समझ ही नही आया ऐसा क्या पाप होने वाले था उससे जो सबको लगता। उसे आज बहुत दर्द हो रहा था पेट और पॉव में इसकी वजह से उलटी आ गयी ।मुँह साफ़ करने के लिए टॉवल ही तो लेने जा रही थी। शायद बहुत बड़ी कोई गलती करने जा रही थी तब ही तो मम्मी जी और फिर पापा जी ने भी  मम्मी जी के बताने पर उसे कई बाते बताई । वो भी तब जब पापाजी वहाँ थे ही नहीं फिर भी सब पता है उन्हें। 

उसे याद आया उसे तो सबसे बड़ी बीमारी हुई है जो हर लड़की को हर महीने होती है।  इन चार दिन के लिए वो और उस जैसी सभी लडकिया अछूत हो जाती है। जिस कारण वो परिपक्व हो नए जीवन को इस संसार में लाने की काबिलियत रखती है वही उसकी सबसे बड़ी बीमारी है।हाँ उसके छुने से इंसान क्या निर्जीव चीजे भी नापाक हो जाती है । 

राधिका सोच ही रही थी कि उसे याद आया 1 घण्टे हो गए उसे पानी मांगे हुए। अब तो प्यास से गला भी सूख चूका और न जाने कितना इंतजार करना होगा। घर में आते ही सभी के सामने चाहे वो घर वाले ही क्यों ना हो गिलास लिए हमेशा खड़ी रहने वाली लड़की को खुद इस तरह प्यासा रहना पड रहा है। 

अभी थोड़े दिन पहले ही एक दूर के रिश्तेदार आए थे वो सबसे दूर कमरे में साइड से बैठ कर खाना खा रही थी , उन्होंने देखते ही ऐसा मुँह बनाया की खाना उसके गले में ही अटक गया। ऐसा लगने लगा जैसे कोई गलती कर दी है उसने। उनके जाने के बाद से सासुमा ने अब खाना भी बाहर ही देना शुरू कर दिया है।

हाँ चाहे उसे सब छुने की मनाही क्यूँ ना हो इन चार दिनों के लिए उसके लिए बहुत काम होते है। जैसे पुरे घर के परदे , सोफे के कवर , बेडशीट , अनाज बीनना, शायद ये सभी काम बस इन्ही दिनों के लिए छोड़ दिए जाते है। 

वो चार दिन शायद दुनिया के सबसे मुश्किल दिन होते होंगे राधिका और उसके जैसी लड़कियो के लिए जिनके घर में आज भी संकीर्ण सोच के कारण उनसे उनकी ज़िन्दगी छिन ली जाती है।

इसी कारण कई लड़कियां इन दिनों स्कूल ,कॉलेज जाना तो दूर घर से बाहर भी नही निकलती। उनका आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है, और कई बार इस दौरान होने वाले दर्द और तकलीफ को किसी को बता भी नही पाने के कारण समय पर इलाज  नही हो पाने से कई बीमारियो से घिर जाती है । ना ही  ये कोई बीमारी है ना पाप। हमे खुद को साथ ही सबको समझाना होगा ।  ये तो शरीर की खुद को साफ़ करने की एक छोटी सी कवायद है। 

वो चार दिन राधिका को नैराश्य में पहुँचा देते है पर अब बस आज सुबह की पहली किरण के साथ खुद से वादा किया है अब से ये चार दिन वो खुद के लिए ज़िएगी खुद के शौक पूरा करेगी , जैसे किताबो से उसका प्यार , उसे याद आया कितने दिनों से उसने कढ़ाई नही की , अब इन्ही कामो में वो खुद को व्यस्त रखेगी।

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