मधुर सम्बन्धो के लिए अपने बच्चों को criticism से बचाए |
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|   Apr 12, 2017
मधुर सम्बन्धो के लिए अपने बच्चों को criticism से बचाए |

आजकल की competition भरी जिंदगी मैं हम किसी न किसी तरह की criticism के शिकार हो ही जाते है| criticism हमारे और हमारी संतान के जीवन के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है ये में आपको अपनी पुरानी सोच और दिनचर्या के माध्यम से बताना चाहूँगा | मेरा बेटा अभी ५ साल का है और  मुझे ये अनुभव अपने बेटे की बढती उम्र के साथ हुए है| जो अनुभव मेरे साथ हुए है, उन्हें मैंने एक पत्र में देखा  है, और  आज मैं उन पलो मैं आपको सहभागी बनाना चाहता हु |  

“सुनो बेटे ! मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हु तुम गहरी नींद में सो रहे हो , तुम्हारा नन्हा सा हाथ तुम्हारे नाजुक गा्ल के निचे दबा है और तुम्हारे पसीना पसीना ललाट पर घुंघराले बालबिखरे हुए है में तुम्हारे कमरे में चुपके से दाखिल हुआ| अभी कुछ मिनिट पहले जब में हाल में किताब पढ़ रहा था , तो मुझे बहुत पश्चाताप हुआ इसीलिए तो किसी अपराधी की तरह,आधी रात को मैं तुम्हारे पास खड़ा हु |

जिन बातो के बारे में मैं सोच रहा था वे ये है बेटे, मैं आज तुम पर बहुत नाराज हुआ | जब तुम स्कुल जाने की लिए तैयार हो रहे थे ,तब मेने तुम्हे खूब डाटा...तुमने खाना खाने के बाद टावेल के बजाय परदे से हाथ पोछ लिए थे |तुम्हारे जूते गंदे थे , इस बात पर भी मैंने तुम्हे कोसा | तुमने फर्श पर इधर उधर चीजे फेक रखी थी ..इस पर मैंने तुम्हे भला बुरा कहा |

             नाश्ता करते वक्त भी में  तुम्हारी एक के बाद एक गलतियाँ निकलता रहा | तुमने डाइनिंग टेबल पर खाना बिखेर दिया था | खाते समय तुम्हारे मुह से आवाजे आ रही थी | मेज पर तुमने कोहनिया भी टिका रखी  थी |तुमने ब्रेड पर बहुत सारा butter भी लगा लिया था | यही नहीं जब में आफिस जा रहा था और तुम खेलने जा रहे थे और तुमने मुड़कर हाथ हिलाकर “ बाय –बाय डैडी “ कहा था , तब भी मेने भ्रकुटी तानकर टोका था “ अपनी कालर ठीक करो,बेटा”.

शाम को भी मेने यही सब किया ऑफिस से लोटकर मेने देखा की तुम दोस्तों के साथ मिट्टी में खेल रहे थे| तुम्हारे कपड़े गंदे थे , तुम्हारे मोजो में छेद हो गए थे मैं  तुम्हे पकड़कर ले घर में ले गया और तुम्हारे दोस्तों के सामने तुम्हे अपमानित किया| और कहा “मोज़े महगे है – जब तुम्हे खरीदने पड़ेंगे तब तुम्हे इनकी कीमत समझ में आएगी |” जरा सोचो तो सही, एक पिता अपने बेटे का इससे ज्यादा दिल किस तरह दुख सकता

 है ?

क्या तुम्हे याद है जब में लाइब्रेरी में पढ़ रहा था तब तुम रात को मेरे कमरे में आये थे , तुम्हारी आखे बता रही थी की कितनी चोट पहुची है और मैंने अख़बार के उपर से देखते हुए पढने में बाधा डालने के लिए तुम्हे झिडक दिया था “ कभी तो चैन से रहने दिया करो | अब क्या बात है ?” और तुम दरवाजे पर ही ठिठक गए  थे |

तुमने कुछ नहीं कहा बस भागकर मेरे गले में अपने बाहे डालकरमुझे चूमा था और “गुड नाईट “ कहकर चले गए थे | तुम्हारे नन्ही बाहों की जकडन बता रही थी की तुम्हारे दिल में ईश्वर ने प्रेम का ऐसा फूल खिलाया है जो इतनी उपेक्षा के बाद भी नहीं मुरझाया और फिर तुम सीडियो पर खट खट करके अपने कमरे में  चले गए |

तो बेटे इस घटना के बाद मेरे हाथ से अखबार छुट गया और मुझे बहुत ग्लानी हुई| यह क्या होता जा रहा है मुझे ? गलतियाँ ढूढने की, डाटने डपटने की आदत से पड़ती जा रही है मुझे? अपने बच्चे के बचपने का में यह पुरस्कार दे रहा हु| ऐसा नहीं है बेटे की मैं तुम्हे प्यार नहीं करता , पर में एक बच्चे से जरुरत से ज्यादा उम्मीदे लगा बैठा था | मैं  तुम्हारे व्यवहार को अपनी उम्र के तराजू पर तोल् रहा था |

            तुम इतने प्यारे हो, इतने अच्छे और सच्चे हो  | तुम्हारा नन्हा सा दिल इनता बड़ा है जैसे चोडी पहाडियों के पीछे से उगती हुई सुबह | तुम्हारा बड़प्पन इसी बात से नजर आता है की दिन भर डाटते रहने वाले पापा को तुम रात को “ गुड नाईट किस “देने आये| आज की रात और कुछ भी महत्त्व पूर्ण नहीं है , बेटे | में अँधेरे में तुम्हारे सिरहाने आया हु और में यहाँ पर घुटने टिकाये शर्मिंदा बैठा हूँ |”

            यह एक कमजोर पश्चाताप है | में जानता हु  की अगर में तुम्हे जगाकर यह सब कहूँगा, तो शायद तुम नहीं समझ पाओगे | पर कल से में सचमुच तुम्हारा प्यारा पापा बनकर दिखाऊंगा | मैं तुम्हारे साथ खेलूँगा, तुम्हारी मजेदार बातें मन लगाकर सुनुगा , तुम्हारे साथ खुलकर हसूँगा और तुम्हारी तकलीफों को बाटूंगा | आगे सी तुम्हे जब डाटने के लिए मुह खुलेगा , तो इससे पहले अपनी जीभ को अपने दातोंमैं दबा लूँगा | में बार बार किसी मन्त्र की तरह यह कहना सिखुगा , “ वह तो अभी बच्चा है छोटा सा बच्चा !”

 मुझे अफ़सोस है की मेने तुम्हे बच्चा नहीं , बड़ा मान लिया था | परन्तु आज जब में तुम्हे गुडी मुड़ी और थका थका सा पलंग पर सोया देख रहा हु , बेटे तो मुझे एह्सास होता है की तुम अभी बच्चे ही हो | कल तक तुम अपनी माँ की बाहों में थे , उसके कंधे पर सर रखे हुए थे |मैंने तुमसे कितनी ज्यादा उम्मीदे की थी , कितनी ज्यादा |”

*”फादर फोर्गेट्स”, लेखक डब्ल्यू लिविंग्स्टन लार्नेद*

ज्यादातर माँ बाप अपने बच्चो को criticize करते है, ऐसे माँ बाप को मैं एक ही सलाह देना चाहूँगा की बच्चो को criticize करने से पहले उपर लिखे लेख को पढ़ ले |

  1. Criticism बहुत खतरनाक है क्योकि इससे उस व्यक्ति का बहुमूल्य आत्मसम्मान आहत होता है, उसके दिल को ठेस पहुचती है और वह आपके प्रति दुर्भावना रखने लगता है |
  2. किसी को criticize करने का कोई फायदा नहीं होता, क्योकि ऐसा करने से आपके उस व्यक्ति के साथ सम्बंध बिगड़ सकते है |
  3. Criticism या निंदासे कर्मचारियो, परिवार के सदस्यों और दोस्तों का मनोबल कम हो जाता है, और उस स्थिति मे कोई सुधारनहीं होता है, जिसके लिए criticism किया जाता है|
  4. हमेशा यही होता है , यही मानव स्वभाव है , हर गलत काम करने वाला अपनी गलती के लिए दुसरो को दोष देता है , परिस्थियों को दोष देता है , परन्तु खुद को दोष नहीं देता है , हम सब यही करते है |
  5. अगर आप और मैं कल किसी के मन में अपने लिय विद्वेष पैदा करना चाहते है , जो दशको तक चलता रहे और मौत के बाद भी बना रहे, तो हमें और कुछ नहीं करना है सिर्फ चुनिन्दा शब्दों में चुभती हुई criticism करनी है | इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की हमारी criticism कितनी सही या जायज है |
  6. बच्चो को criticize करने के बजाय हमें उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए | हमें यह पता लगाना चाहिए की जो काम वे करते है, उन्हें वे क्यों करते है यह काम, किसी को criticize करने से बहुत रोचक और लाभदायक होगा, यही नहीं इससे सहानुभूति, सहन शक्ति और दयालुता का माहोल भी बनेगा और आप बिगड़े हुए संबंधनो को आसानी से सुधर सकते है |

अपने बच्चों को criticism की बाढ़ से बचाइए और अपने रिश्तो को जीवनभर के लिए मधुर बनाइये|

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