यू देखा जाये तो हिंदी बहुत फ़ेवर करती है स्त्रियों को..
1008
1
1
|   Jan 17, 2017
यू देखा जाये तो हिंदी बहुत फ़ेवर करती है स्त्रियों को..

हिंदी, यानि की हमारी मात्र भाषा किसी भी व्यक्ति, वस्तु, या काम को स्त्री या पुरुष रूप देकर व्यक्त करती है. जैसे अंगेजी भाषा में सहायक क्रिया हम करता के हिसाब से लगा कर वाक्य बनाते है, मैं जाता हू 'I Go' और वो जाता है 'He Goes' होता है उसी तरह हिंदी में हम करता या क्रिया को स्त्रीलिंग या पुलिंग मान कर व्यक्त करते हैं. जैसे की, हवा चलती है; इस वाकया में हवा को स्त्रीलिंग मानकर बात कही जा रही और गुस्सा आता है; इस वाक्य में गुस्से को पुल्लिंग में व्यक्त किया जा रहा.

मज़े की बात तो ये है की हिंदी स्त्रीलिंग को ज्यादा से ज्यादा अच्छे शब्द देती है और बड़े सारे बुरे शब्द पुल्लिंग माने जाते हैं. देखिये ज़रा, ख़ुशी होती है पर दुःख होता है. अब ख़ुशी जो सब चाहते हैं वो स्त्रीलिंग माना जाता है और दुःख बेचारा पुरुष के रूप में व्यक्त किया जाता है. अब गौर कीजिये ज़रा की आप किसी को कोयल या बुलबुल कहे वो व्यक्ति खुश ही होगा. ये कोयल भी स्त्रीलिंग से है और बुलबुल भी दोनों गाती है गता नहीं. पर यु अगर आप किसी को कौवा या गिद्ध कह दे तो फिर सामने वाला आपसे चिढ़ने में देर नहीं करेगा. ये कौवा और गिद्ध तो पुरुष मने जानते है हिंदीं भाषा के.

इसी तरह नदी को स्त्रीलिंग और पहाड़ को पुल्लिंग मानती है ये भाषा. किसी की तुलना नदी से की जाये तो मतलब होता है तारीफ पर किसी को पहाड़ कहो तो मतलब कतई तारीफ वाला नहीं होगा.

परीक्षा होती है यानि स्त्रीलिंग पर रिजल्ट आता है यानि पुल्लिंग. कृपा होती है पर श्राप लगता है.

दवाई आती है पर रोग लगता है. मित्रता (दोस्ती) होती है पर द्वेष (झगड़ा) होता है बिल्डिंग बनती है पर पेड़ काटते हैं.

शादी होती है पर तलाक होता है. सभी अच्छे त्यौहार स्त्रीलिंग जैसे होली आती है,

दिवाली आती है, ईद आती है. रौशनी होती है यानि स्त्रीलिंग पर अँधेरा होता है यानि पुल्लिंग.

मन की भावनाओ को देखिये, मुस्कान या हँसी आती है पर रोना आता है दुःख होता है. मज़ा आती है पर डर लगता है.

प्राकृतिक आपदाये जैसे भूकंप सुनामी पुल्लिंग है और प्रकृति के वरदान जैसे हवा, धूप, बारिश स्त्रीलिंग.

ये सभी बातें ये इशारा करती है की हिंदी भाषा स्त्रियों का कितना सम्मान करती है तभी तो सब अच्छी अच्छी बातें स्त्रीलिंग में की जाती है हिंदी में. खैर ये बस एक नजरिया है जिसके खिलाफ भी बहुत सारे तर्क है और मैं किसी स्त्री/ पुरुष या भाषा का अपमान करने के लिए नहीं लिख रही.. बस हिंदी भाषा का ये एक रोचक नजरिया देखिये.

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day