Girl in the train...Part 2
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|   Jul 09, 2017
Girl in the train...Part 2

अब तक : कहानी के पहले भाग में आप सबने पढ़ा ....ट्रेन में मिली अनजान लड़की शुभांगी के विषय में...जो बदहवास सी ट्रेन में चढ़ी और काफी कुरेदने पर उसने अपने विषय मे बताया। उसके साथ विश्वासघात हुआ था। अब आगे.....

शुभांगी रोते हुए कहने लगी.. दीदी मैं सीतापुर की रहने वाली हूं लखनऊ में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही थी। यहां पर मेरी फ्रेंडशिप एक लड़के के साथ हुई उसका नाम राहुल था..जो मेरी तरफ से सिर्फ फ्रेंडशिप ही थी..मगर राहुल के मन में पता नही क्या था..हम बहुत अच्छे फ्रेंडस थे ...मस्ती करते ,पढ़ाई करते ,हँसते खिलखिलाते ..हमारे 2 साल बीत गए ..पढ़ाई पूरी हुई और हम अपने अपने घर आ गए...! समय बीतने लगा और हम दूर होकर भी संपर्क में रहे। अक्सर हमारी फ़ोन पे बातचीत हो जाती। 

एकदिन मेरे पापा ने मेरी शादी फिक्स कर दी और मैं भी तैयार हो गयी। मैने अपनी इंगेजमेंट पर अपने दोस्तों को बुलाने को सोचा...मैने सबको फ़ोन किया राहुल को भी ..  राहुल का बात करने का तरीका थोड़ा अलग था..लेकिन उस वक़्त मैं ज्यादा समझ नही पाई ...फिर मेरी इंगेजमेंट में वो आया पर इस बार वो एकदम नार्मल था... मेरे मंगेतर से भी बहुत अच्छे से मिला वो..! मैं खुश थी कि राहुल ठीक हो गया। कुछ दिन बाद राहुल ने मुझे फ़ोन किया और कहा कि उसकी इंगेजमेंट है होटल है कान्हा श्याम ..! उसने डेट और एड्रेस दे दिया। मैं तैयार हो गयी..चूंकि वो घर आ चुका था मेरी इंगेजमेंट पे इसलिए मेरे घर पे सबने परमिशन दे दी। ..औऱ मैं इलाहाबाद आ गईं। 

मैंने स्टेशन पहुच कर उसको फ़ोन किया तो वो बोला वो रिसीव करने आ रहा है। मुझे कुछ अजीब लगा । अपनी इंगेजमेंट पे वो खुद रिसीव करने आएगा..? खैर मैने ज्यादा ध्यान न दिया मुझे लगा मुझे ज्यादा खास समझकर ऐसा कर रहा है वो..!  

वो आया और मैं गाड़ी में बैठी उसके साथ होटल पहुची वहां वो बोला कि तुम रेडी हो जाओ और हॉल में आओ..मैने उसके फैमिली के बारे में पूछा तो वो बोला सब हॉल में हैं... वो रूम में चला गया था मैं थोड़ा डर गई। फिर मैंने सोचा की वो भी रेडी होने गया है।...मैं तैयार होकर जल्दी ऊपर हॉल में जाने के लिए लिफ्ट में घुसी । ऊपर पहुची.. तो मैंने देखा.. पूरा हॉंल अंधेरा है...मुझे लगा शायद फंक्शन यहां नही किसी दूसरे जगह पर है। पर तभी वहां लाइट जल गई और राहुल दूल्हे के वेश में खड़ा दिखा..!

मैं बिल्कुल चौंक गयी कि अरे ये क्या हो गया? मैने कहा: राहुल ये क्या नाटक है? तुमने तो कहा था तुम्हारी इंगेजमेंट है? तुमने मुझसे झूठ बोला? 

राहुल  : हां शुभी..! मैंने तुमसे झूठ बोला क्योंकि मैं प्यार करता था तुमसे ..! झूठ ही तो बोला तभी तो आज तक यह नहीं बताया कि मुझे तुमसे प्यार है.. मुझे लगा कि शायद तुम इंकार कर दोगी ..इसलिए कभी तुमसे कह नहीं सका. पर उस दिन ..तुम्हारी इंगेजमेंट के दिन.. जब तुमने अपने मंगेतर को अंगूठी पहनाई... तब मुझे लगा कि, मैं नहीं रह सकता तुम्हारे बिना ..! 

मैंने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा कि : यह सब क्या बोल रहे हो ?तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? प्यार व्यार तो दूर की बात है राहुल.. तुमने मुझे अकेले यहां कैसे बुलाया ?

राहुल ने कहा: प्लीज शुभी इंकार मत करना... तुम भाग चलो मेरे साथ ..शादी कर लो मुझसे ..! अभी इसी वक़्त.. देखो ना.! होटल में मैंने शादी की सारी तैयारियां कर रखी है ..और इसीलिए मैंने तुम्हें बुलाया ..मैं जानता था कि, तुम जरुर आओगी ! मुझसे प्यार करती हो ना तुम..!! शायद तुम भी नहीं जानती जैसे मैं नहीं जानता था.." 

 मैं बिल्कुल अवाक रह गई मैंने सोचा भी ���हीं था कि वह यह सब प्लान करके बैठा है ! मैं तो उसकी इंगेजमेंट में शिरकत करने आई थी..  मुझे क्या पता था कि ,आपने परिवार वालों और मेरे परिवार वालों और खासकर मुझसे झूठ बोल कर उसने मुझे यहां बुलाने की साजिश रखी थी..! 

 मैंने राहुल से कहा : ओह! तो तुम प्यार करते हो मुझसे.. और तुम्हें लगता है कि मैं भी तुमसे प्यार करती हूं! तो साफ साफ सुन लो मैं तुमसे प्यार नही करती..! तुम साबित क्या करना चाहते हो ?प्यार का मतलब क्या होता है राहुल ? इस तरह होता है प्यार ?? वाह राहुल वाह..!!  शर्म आती है मुझे कि तुम मेरे दोस्त हो ..! और हां अब दोस्त भी नहीं हो।.... 'तुम्हें क्या लगा कि तुम इस तरीके से, फिल्मी स्टाइल में मुझे प्रपोज करोगे और मैं तुम्हारे लिए हां कर दूंगी कभी नहीं मैंने तुमसे कभी प्यार नहीं किया!  तुमने यह सोच कैसे लिया कि मैं तुमसे प्यार करूंगी ? मैं गुस्से से कांपते हुए बोली।

 मेरी बातें सुनकर राहुल जैसे पागल हो गया ..उस ने जबरदस्ती मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा कि ,नहीं शुभी !तुम ऐसा नहीं कर सकती ...तुम मेरी हो ..सिर्फ मेरी ..तुम मुझसे शादी करोगी..!! कहकर उसने मुझे दबोच लिया मैंने  उसकी पकड़ से खुद को छुड़ाने की काफी कोशिश की और जब मेरा जोर नहीं चला तो मैंने दांतों से उसके हाथ पर जोर से काट लिया.. वह दर्द से तिलमिला उठा और उसने अपनी पकड़ छोड़ दी ..मैं भागने की कोशिश करने लगी पर उसने दरवाजा लॉक कर रखा था.. मैंने राहुल को बहुत हाथ जोडे.. पर वह मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा..उस ने मुझे  मारा भी..फिर हमारे बीच की हाथापाई में और अपने आप को बचाने की कोशिश में एक फूल दान पर मेरा हाथ गया और मैंने उसके सिर पर वो दे मारा ..! खून की धारा मेरे चेहरे मेरे कपड़ों पर भी पड़ गई और वो दोनों हाथों से अपना सिर पकड़ कर बैठ गया मैंने भागकर दरवाज़ा बाहर से लॉक कर दिया। दूसरे कमरे में ,हाथ पांव धोये..! चेहरा ठीक किया,कपड़े बदले.. कि होटल में किसी को शक न हो...! और जैसे तैसे भाग कर ऑटो पकड़कर स्टेशन आ गई मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था मुझे लगा कि अब तक तो राहुल ने किसी को मेरे पीछे भेज दिया होगा.. जैसे तैसे लखनऊ की ट्रेन देखकर मैं इस में बैठ गई ..! जब तक ट्रेन स्टेशन से चल नही दी थी ...तब तक मुझे फिर इस बात का डर था कि कहीं राहुल मुझे आकर फिर से ना पकड़ ले उसने धोखा दिया मुझे दीदी..विश्वासघात किया मेरे साथ..!! 

और यह सब बता कर..वह फूट फूट कर रोने लगी.. मैं उसे दिलासा देने लगी चुप कराने लगी कि भूल जाओ ,शुभी सब कुछ ...एक बुरा सपना समझ कर भूल जाओ..!  जो होता है अच्छे के लिए होता है ..कम से कम तुमने हिम्मत नही हारी..! तुमने अकेले इस परिस्थिति से लड़कर बुरे वक्त को पीछे छोड़ दिया है।  अब राहुल तो क्या उसका साया भी तुम्हारे पीछे नहीं आ सकता जो होगा देखा जाएगा मैं भी तुम्हारे साथ हूं अगर घर में तुमसे कोई सवाल करें राहुल के विषय में तो तुम यह बता देना कि, मैं भी तुम्हारे साथ गई थी ..! हम किसी को कुछ नहीं बताएंगे हम सिर्फ यह बताएंगे कि उसकी इंगेजमेंट हुई उसके बाद क्या हुआ हमें नहीं पता... लेकिन शुभांगी सच में बहुत गलत हुआ तुम्हारे साथ ..! तुमने राहुल पर इतना भरोसा किया था ..तुम्हारे घर वालों ने इतना भरोसा किया ..और उसके फैमिली फंक्शन में भेज दिया लेकिन इस से एक सीख तो जरूर मिलती है कि.. हम लड़कियों को हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए ...हम कहीं भी किसी अनजान से मिलने जाए तो अपने घर से किसी ना किसी को साथ लेकर जरुर जाएं आज अगर तुम्हारे साथ कोई अनहोनी हो जाती तो क्या होता?  यह तो भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि तुम बच गई और तुम सही सलामत इस ट्रेन में बैठ गई !उस हैवान के चंगुल से तुमने बहुत बहादुरी से अपने आप को छुड़ाया..!  कितना सहा तुमने मेरी छोटी बहन..!!  लेकिन मुझे तुम पर फख्र है..। तुम किसी भी चीज के लिए पश्चाताप बिल्कुल मत करना.. राहुल के साथ तुमने जो किया बिल्कु��� सही किया ...!आत्मरक्षा में उठाया गया कोई भी कदम सही होता है!  इस घटना को एक बुरा सपना समझ कर भूल जाना ..और अपने आने वाले कल की तरफ ध्यान दो..इसका जिक्र किसी से मत करना तुम बहुत बहादुर हो..!                    उसने कहा: आपसे ये सब बातें बता कर मुझे काफी हल्का महसूस हो रहा है।और आपकी बातों से मेरा डर भी कम हुआ दीदी,..आपको बहुत बहुत शुक्रिया... उसने मेरा हाथ थाम कर कहा.. । 

फिर मैंने माहौल को हल्का बनाने के लिए उसको छेड़ते हुए कहा, अरे हां ! तुमने मुझे यह नहीं बताया कि शादी कब है तुम्हारी ?आखिर मुझे भी तो तुम्हारी शादी में आना है..!! और शिवांगी मुस्कुराकर मेरे सीने पर चिपक गई बोली:  हां दीदी!  बिल्कुल आपको तो मेरी शादी में जरुर आना होगा . ..अरे बातों बातों में टाइम का पता ही नही चला और लखनऊ चारबाग रेलवे स्टेशन आ गया..!  फिर हम दोनों मुस्कुराते हुए,सामान उठाकर स्टेशन पर उतरने लगे... मैंने उससे सीतापुर की बस पर बैठा दिया... वह अपनी मंजिल की ओर बढ़ चुकी थी और मैं अपनी..!! 

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कविता जयन्त श्रीवास्तव...

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