अहंकार की वजह से खराब होता सास बहू का पवित्र रिश्ता|||
338038
21
14
|   Apr 29, 2017
अहंकार की वजह से खराब होता सास बहू का पवित्र रिश्ता|||

"मुख से निकली बात और धनुष से निकला बाण कभी वापस नही आता" इसलिए कहा जाता हैं हमेसा सोच समझ कर बोलना चहिये। कब किसकी बात किसके दिल को चोट पहुचा दे ये कोई नई जानता। शायद ऐसी ही कोई गलती हुई एक बहू से क्योंकि गलती तो बहू ही कर सकती हैं सास नही। एक चंचल, नादान बेटी बहू बन सपने सजा कर आई ससुराल, सोचा पति के प्यार के साथ साथ माँ बाप के रूप में सास ससुर मिलेंगे छोटी बहन और दोस्त के रूप में ननद। पर ये तो सब फिल्मी दुनिया की बातें हैं असल जिंदगी में तो कुछ और ही होता हैं। बहू बहुत भावुक और चंचल स्वभाव की और सासु माँ एकदम कड़क। मुस्कान तो दिखती ही नही थी सासु माँ के मुख पर। बहू जब से ससुराल आई थी सास से आपनी माँ जैसा प्यार पाने को तरस रही थी पर सासु माँ का स्वभाव ही कुछ अलग था। उनका सिध्दांत तो "पनी ढपली अपना राग'' वाला था। सास बहू में कभी तो थोडा प्यार पर मन ही मन आपसी मनमोटाव चल रहा था। शायद बहू उनके सिद्धन्तो पर खरी नही उतर रही थी। बहू कोशिस किया करती कि शायद सासु माँ का दिल पिघल जाये पर कोशिस अभी तक नाकामियाब हुयी। न जाने किस गलती की सज़ा भुगत रही है बहू। ऐसे ही न जाने किनती कहानियां है। एक कहानी आपके सामने................

वीणा अपने पति(वेद) के साथ बहार रहती है| शादी को 3 साल बीत गये है। शादी करने के समय वीणा को संस्कारी, सुन्दर, सुशील और सर्व गुण संपन्न बताया गया। वीणा और देव एक दूसरे के साथ बहुत खुश है। वो एक दूसरे से बहुत प्यार करते है| देव वीणा को किसी भी चीज कमी मैहसुस नही होने देता उसकी हर खुशी न खुशी का अच्छे से ध्यान रखता है। पर वीणा को एक ही बात का बहुत दुख है कि सास ससुर का प्यार नही मिलता। वीणा को एक अवसर मिला अपनी सासू माँ से प्यार पाने का क्योंकि उनके घर नया मेहमान आने वाला था| वीणा और देव शिमला घूम कर आये उसके 10 दिन बाद वीणा को पता चला वो ''माँ ''बनने वाली है। "OMG I am pregnant (खुशी से झूम उठी) Thank you God, Thank you so much"। देव को अभी बता दू? नही अभी नही anniversary पर गिफ्ट देती हूँ। (1-2दिन बाद) नही मुझसे रुका नही जा रहा। सुबह सुबह वीणा "सुनो जी!" देव "हाँ बोलो, बोलो क्या हुआ?" वीणा "ये देखो(test report)"। देव "Oh really! I am very happy today. I love you so much"| (दोनो बहोत खुश थे) वीणा ने अभी ये बात अपनी सास से नही बतायी।

कुछ दिन बाद सासूमाँ का anniversary पर फ़ोन आया वो अपने बेटे से बात कर रही थी। वीणा ने फ़ोन लिया "हेलो माँ! कैसी हो आप।" सासू माँ "हा थीक हूं, और बताओ तुम थीक हों?" वीणा "हा माँ। माँ आपको कुछ बताना था,(बहुत उत्साहित होते हुए)"आप दादी बनने वाली हो"। सासू माँ "अच्छा, बडिया है। (कुछ ख़ास उत्साह नही)| वीणा को लगा सुन कर माँ बहोत खुश होगी, पर उनकी बात से उतनी खुशी वीणा को मैहसुस नही हुयी। न जाने किस बात से खाफा थी। वीणा अपने इस खुशी से बहोत खुश थी। जैसे जैसे समय बढता गया कुछ न कुछ शरीरिक समस्या वीणा को होने लगी। पर उसको एक समस्या और थी जो समय के साथ और ज्यादा बढती ही जा रही थी| उसे पति का तो साथ और प्यार मिल रहा था पर अपनी सासु माँ के प्यार को पाने के लिये परेशान थी। वीणा बहोत रोती, क्यों माँ मुझसे थीक से बात नही करती? क्यों??? देव बहोत समझाते "मत रोया करो, माँ का स्वभाव ही ऐसा है, क्यों रोती हों, बच्चे पर इसका असर पड़ेगा"। पर वीणा ये सारी बाते दिल से लगा बैठी थी। रात रात जागती रह जाती, रोती, परेशान होती, घुटन मेहसूस होने लग गया था। ऐसा लगता था जान निकल जाएंगी। घर में अकेले रहना मुश्किल हों गया था। फिर भी वीणा चहती थी deleivery के समय सासु माँ उसके साथ रहे। माँ ने तो अब बात करना ही बंद कर दिया था, कभी 1-2 महीने में बात हो जाती। वीणा ने फ़ोन किया "माँ आप डिलेवरी के समय कुछ दिन के लिये ही मेरे पास आ जाइये"। सासु माँ "नही हम नही आ पायेंगे, ज्यादा दिन नही रुक सकती तुम्हारे घर में, मुझे प्रॉब्लम होती है"।

अब क्या करूँ मै!  देव वीणा से, तुम अपने घर चली जाओ। मजबूरन मुझे अपने मायके जाना पड़ा।  Delivery की date आगे बढ़ गयी और वीणा को होस्पिटल में admit होना पड़ा। सभी को बेसब्री से खुशखबरी का इंतजार था, सब का फ़ोन आया, लोग मिलने आये पर सासु माँ का फ़ोन नही आया वीणा के पास। वीणा का ऑप्रेशन हुआ और वीणा को भगवान ने एक प्या`रा सा बाल गोपाल दिया। Hospital  में वीणा के मायके के सभी लोग थे और देव। पर वीणा की आँखे अभी भी ससुराल पछ को ढूढं रही थी। अब तो वीणा भी नाराज़ थी "नही जाऊँगी ससुराल, नही दिखाऊँगी बच्चे को"। पर कहाँ, वीणा नही कर सकती ऐसा, वीणा तो बहु हूँ। (हॉस्पिटल में सास और ससुर जी आये मिलने पर दिल से नही)|

3 महीने बाद देव वीणा को ससुराल लेकर गये। पर कोई खुशी का मॉहोल नही था। सब के साथ बात चीत हुयी और गलती सिर्फ वीणा की निकाली गयी, क्योंकि सास तो कभी गलत होती नही। वीणा ने सासू माँ से पूछा मेरी गलती क्या है? सासू माँ ने कहा "तुम जब से आयी हो मेरे दिल में कोई जग़ह नही बना पायी, तुम मेरी नही हो, "मेरे दिल  में तुम्हारे लिए कोई जगह नही है"| अब तो बात साफ थी, अगर सासु माँ ने वीणा को अपनी बेटी न सही बहु होने का हक और थोडा स प्यार, सम्मान दिया होता तो शायद आज इतनी खुशी के मैके पर वो कठोर न होती। वीणा ने तो एक बेटे को जन्म दिया था, उनकी खुशी तो चार गुना बढ़ जानी चहिये, लेकिन वो किसी भी परिस्थिति में कोई समझौता नही करना चहती। आज न ही वीणा खुश है, न ही सासु माँ, पर कोई सबसे ज्यादा दुखी है तो देव। सास और बहु के बीच एक बेटा पिस रहा है। वो पूरा प्रयास करते है कि दोनो एक हो जाये, लेकिन माँ इस बात को नही समझ रही। आज अगर माँ  खुश होती तो सभी खुश होते। उनकी नारजगी से न वो खुश, न बेटा, न बहु और न ही बहु के मायके वाले।

मेरा blog लिखने का ये उद्देश नही है कि मै एक सास की कमियां बताऊ या फिर बहु की बढ़ायी। ये कहानी आज ज्यादा से ज्यादा घर की है। किसी घर में सास villain तो किसी घर में बहु। पर इससे होता क्या है??? सिर्फ दुख! जाने अंजाने में लोग बस एक दूसरे को तकलीफ देते है। मेरा ये blog आज जो पढ़ रहा है वो एक माँ होगी, सास होगी, बहु होगी, ननद होगी, बहन होगी, भाभी होगी। एक औरत के सारे ही रूप होगे। आज ये पढ़ने के बाद अगर ये समझ आया हो कि इस सब से बस दिल टूटता है और दूँरिया बढ़ती है तो please एक लड़की को अपने घर ला कर पराया मत करो| अगर वो बहु है उसे बेटी नही बना सकते तो बहु ही बना कर रखो और बहू भी सास को अपनी माँ समझ कर उसकी बातें सुन लो। इससे न ही क्लेश होगा और न ही दिल टूटेगा। कोई अपना अपने से दूर नही होगा। सारे रिश्ते अच्छे लगेंगे। न कोई सास न कोई बहु न कोई ननद अपना घर नही फोडेगी| और न ही एक बेटा माँ और बीबी के बीच पिसेगा।  

Read More

This article was posted in the below categories. Follow them to read similar posts.
LEAVE A COMMENT
Enter Your Email Address to Receive our Most Popular Blog of the Day