अपने बच्चों को बेटा बेटी नहीं संतान की तरह पालें
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|   Feb 28, 2017
अपने बच्चों को बेटा बेटी नहीं संतान की तरह पालें

 मेरी शादी को तीन साल तीन महीने हो गए हैं और मेरा एक 11 महीने का बेटा है। हमते समाज में हमेशा लड़को को ज़्यादा अहमियत दी जाती है। परिवार में पहला बच्चा लड़का हो ये हर किसी की ख्वाइश होती है खासकर हमारे बड़ो की क्योंकि उन्हें लगता है कि लड़का होगा तोह उनका वंश बढ़ेगा। मेरा कोई भाई नही है लेकिन शादी होने तक हमें कभी भाई की कमी नही लगी क्योंकि हमारे माता पिता ने हमें कभी ये एहसास ही नही होने दिया की तुम लड़कियां हो न ही उन्होंने कभी जाती बिरादरी की बात की इसलिए आज तक कभी मन में ये बात आई ही नही की इस जाती में ये होता है या लड़के से वंश बढ़ता है। मैं हमेशा से पक्षपात के खिलाफ रही हूँ चाहें वो किसी भी क्षेत्र में हो।      लेकिन शादी के बाद सारे अंतर समझ आने लगे। एक लड़के के लिए और एक लड़की के लिए सबके विचार समझ आने लगे और जब मैं पहली बार गर्भवती हुई तो मेरे मन में पहले लड़के की नही लड़की की इच्छा हुई सिर्फ इसलिए जिससे मैं अपने परिवार की प्रतिक्रिया देख सकूँ। जल्दी ही मुझे ये एहसास हो गया कि मैं भी वो ही गलती कर रही हूँ जिसके मैं खिलाफ हूँ। अगर लड़की की अपेक्षा कोई लड़का चाहता है और ये गलत है तो ये भी गलत है कि मैं लड़के की अपेक्षा लड़की चहुँ। लड़का हो या लड़की वह मेरी संतान है और मैं उसकी परवरिश बिना किसी पक्षपात के करना चाहती हूँ। अपनी संतान को लाड़ प्यार करना, उसकी हर ज़रूरत का ख्याल रखना, उसको कोई परेशानी न हो इसका ध्यान रखना, उसको अपने पैरों पर खड़ा कर काबिल बनाना और सबसे बड़ी बात उसको एक अच्छा इंसान बनाना फिर चाहें वह लड़का हो या लड़की।     मेरे लिए कोई रिश्ता इतना बड़ा नही जितना इंसानियत का है। मैं अपने बेटे का ख्याल इसलिए नहीं रखूंगी की कल को वो मेरा ख्याल रखे, मैं अपने बेटे को इसलिय नही पढ़ाऊंगी लिखूंगी की कल वह मेरा सहारा बने। वह मेरा रिटायरमेंट प्लान नही है की आज मैं उसमें निवेश करूँ और कल उसके फायदे उठाऊं। मैंने उसे जनम दिया है और उसकी ज़िम्मेदारी मेरी है। लोग कहते हैं कि हमारा बेटा है उसे अपने माता पिता का ख्याल रखना चाहिए, लड़के ने अपने माँ बाप को छोड़ दिया वगैरह वगैरह। मैं ये सब नही मानती।मुझे अपनी ज़िन्दगी खुद ख्याल रखना है। अगर हम अपने बुढ़ापे की प्लानिंग भी खुद कर लें तो हमें किसी की ज़रूरत नही। हमें अपना जीवन समाज के कल्याण के लिए लगाना चाहिए। ज़रूरतमंदों की मदद करके। इतनी छोटी ज़िन्दगी है समाज कल्याण और भगवान् में जिस दिन खुद को लगा दिया तो ज़िन्दगी कम पड़ जाएगी। हमें तो अपने बच्चों को समाज के लिए तैयार करना है।उनके अंदर इंसानियत का प्यार भरना है। अगर हम अपने बच्चों को एक अच्छा इंसान बनने में कामियाब हो गए तो हमें क्या जब भी , किसी को भी उनकी ज़रूरत होगी तो वो हर मुमकिन कोशीश करेंगे उसको पूरा करने की।      मैं उसे किसी त्यौहार या संस्कृति का पालन करने के लिए दबाव नही डालूंगी।बल्कि मैं तो चाहूंगी कि वह इन सबके बारे में पहले पढ़े समझे और अगर उसे सच में ख़ुशी हो मन करे उसका जश्न मनाने का तब वह मनाये और वो भी अपने तरीके से जैसे उसका मन करे। मैं उसको कभी ये नही कहूँगी की तुम घी का दीपक जलाओ , धुप जलाओ, प्रशाद भोग लगाओ ; मैं तो ये ही सिखाऊंगी की तुम खुद को ईश्वर से जोड़ो जितनी देर के लिए भी।     ये सब मैं उसे सिखाऊंगी पर ये ही सब मानने के लिए मैं उस पर कभी दबाव नही डालूंगी। वो अपने आस पास की दुनिया को खुद परखे, समझे और सही और गलत का खुद फैसला ले। वो अपने फैसले खुद ले। मैं उसे समाज के बंधनों में बाँध कर नही रखना चाहती बल्कि उसे खुला आसमान देना चाहती हूँ जिससे वह ज़िन्दगी को जीए काटे नही। दुनिया की भेड़चाल और बेवजह की दौड़ में अपना जीवन बर्बाद न करे। खुश रहे। अपनी ज़िन्दगी में ख़ुशी से बिताये पलों के रंग भरे। जब भी पीछे मुड़कर देखे तो उसे संतुष्टि हो।     आज कल लड़के लड़कियुं में शराब पीने का बहुत चलन है और बच्चों में ही क्यों स्टेटस के नाम पर सभी छोटे बड़े शराब का सेवन कर रहे हैं। बच्चे अपने बड़ो के सामने पी रहे हैं, बड़े अपने बुज़ुर्गो के सामने पी रहे हैं, ओफिस में अपने साथियों का साथ बॉस का साथ देने को पीते हैं और कम पीने वाले ये तर्क देते हैं कि साथ के लिए पीना पड़ता है या हमारी कास्ट मेज तो ये सब आम बात है। मैं अपने बच्चों को कभी इस दलदल में पड़ने की सलाह नही दूंगी। हर बात के फायदे नुक्सान को जानें और अपनी अच्छी आदतों को अपने उसूल बनाये। जब आप अपने उसूलों पर चलोगे तो कोई भी आपसे वो काम नही करवा सकता जो आप नहीं करना चाहते । बल्कि थोड़े समय के बाद लोग आपको सराहेंगे। ये जाती धर्म के नाम पर अगर आपसे कोई गलत काम करवा रहा है तो अपनी आँखें खोलो और वो काम बिलकुल भी मत करना। ये ही हमें अपने बच्चों को सीखना है। चाहें लड़का हो या लड़की उन्हें एक अच्छा और ज़िम्मेदार इंसान बनाइये।

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