माँ तू क्यों रोती है?
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|   Jan 05, 2017
माँ तू क्यों रोती है?

माँ तू क्यों रोती है?

जब मैं तेरे पेट में आया उस दिन तू रोई थी. जिस दिन मैने पहली बार लात थी मारी उस दिन तू रोई थी. जब ना खाना खाया जाता तुझसे बेबस होकर रोती, मुझे कहती माफ़ कर दे आज मुझे मैं कल तुझे अच्छे से खिला दूँगी.

जब पहली बार मुझे तूने मॉनिटर पर देखा खुशी के आँसू रोई तू.

जिस दिन मैं दुनिया में आने वाला था दर्द से तू कितना रोई पर जैसे ही मेरा चेहरा देखा अपना दर्द भूल कर मुझे छाती से लगाकर फूली ना समाई और हँसी और रोई साथ में.

जब मैं पहली बार बीमार पड़ा तू रात भर जागी, मेरी सेवा की और चिंता में रोई. जब पहली बार तुझे माँ बुलाया गर्व से तू रोई.

और बड़ा जब हुआ किया तुझे परेशान. तूने मुझको एक थप्पड़ लगाया. जब मैं सो गया मेरे सिरहाने बैठकर तू कितना रोई.

जब मैं पहली बार स्कूल गया मारे खुशी, चिंता, और दूर होने के एहसास से भी तेरी आँखें बही. धीरे धीरे मैं बड़ा होता गया, तेरी ज़रूरत कुछ कम होती गई. अब तेरा बात बात पर टोकना अखरता मुझे. अपने दोस्तो के साथ ज़्यादा मज़ा आता.

मेरे सामने तू कुछ न कहती पर अकेले में रोती. सोचती बेटा तू छोटा ही अच्छा था, मेरे पास तो ज़्यादा होता था. भोला था सो मेरी हर बात तुझे अच्छी लगती, पर अब..

इतने में मैं आया स्कूल से दुखी होकर. तूने पूछा, ठीक तो है तू? मैं तेरे गले लगकर रोया की माँ मेरे सबसे प्यारे दोस्त ने मुझे धोखा दिया. मेरा कोई दोस्त नही अब.

तूने मुझसे प्यार से बोला, मैं हूँ ना! जब तक जिउन्गि तेरी दोस्त बनी रहूंगी. तुझे कभी धोखा ना दूँगी. मेरे आँसू देखकर फिर तू रोई.

माँ तेरे आँसू तेरी शक्ति, कमज़ोरी, प्यार, दुलार, सब कुछ है.

अब मैं जाना माँ तू क्यों रोती है!

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