तुम्हारा कोई भाई नहीं है?
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|   Jan 19, 2017
तुम्हारा कोई भाई नहीं है?

बचपन में लोग जब मुझसे मेरे परिवार के बारे में पूछते थे, और मैं बताती थी की मेरे परिवार में मम्मी पापा और हम दो बहनें हैं, तो बहुत से लोगों का अगला सवाल यही होता था कि तुम्हारा कोई भाई नहीं है?  मेरा मन करता था कि बोल दूँ " भाई है न, पर छुपा कर रखते उसे इसलिए नहीं बताया" । अगर भाई होगा तो बताउंगी नहीं क्या? ये जानकर की मेरा कोई भाई नहीं है उन्हें बुरा लगता था हमारे परिवार के लिए।पहले तो मुझे समझ नहीं आता था क्यों, पर जैसे जैसे बड़ी होने लगी तो समझ आया की हमारा समाज कैसे लड़के और लड़की में फर्क करता है। ज्यादा दुःख की बात तो ये थी कि ऐसी बातें ज्यादातर खुद महिलाएं ही करती थी, और यहाँ तक की आज भी करती हैं।

"लड़कियां तो पराया धन होती हैं, वंश का नाम तो लड़के आगे बढ़ाते है" ।

"बुढापे में तो लड़का ही माँ बाप का सहारा होता है"।

"बहनो को भाई की जरुरत होती ही है"।

न जाने ऐसी कितनी ही बातें हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। जब मेरी बेहेन का जनम होने वाला था तो कई लोगों ने माँ से कहा कि लिंग निर्धारण (sex determination) टेस्ट कर वालो। लेकिन माँ ने साफ़ मना कर दिया। फिर जब मेरी छोटी बहन का जन्म हुआ तो कई लोगों ने कहा, दूसरी भी बेटी हुई, कोई बात नहीं अगली बार लड़का हो जायेगा। यहाँ तक की कोई पंडित ने माँ को कहा कि अगली संतान लड़का होने के योग है। जैसे की लोगों ने पहले से ही मान लिया की अब तो एक और बच्चा चाहिए ही क्योंकि फिर लड़की हुई है। पर मेरे माँ पापा ने ये तय कर लिया था कि उन्हें दो ही बच्चे चाहिए, लड़का हो या लड़की कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कभी हमें लड़को से कम नहीं समझा। हमेशा हमारी इच्छाओं का सम्मान किया, जो हमने अपनी जिंदगी में करना चाहा, उसमे हमें हमेशा सहयोग दिया। आज हम जो भी हैं उनकी उनकी वजह से हैं।

मुझे हमेशा लगता था की ये लड़के और लड़की में फर्क करने वाली सोच सिर्फ पुराने लोगों में है, आज के पीढ़ी तो ये सब नहीं मानती। पर एक छोटी सी घटना से मुझे गलत साबित कर दिया। बात उन दिनों की है जब मेरी शादी की बात चल रही थी, और मेरे घरवाले ज़ोर शोर से लड़का ढूंढने में लगे थे। तब एक रिश्ता आया, घर और लड़का सब ठीक लगा मेरे परिवार को, तो मैंने सोचा लड़के से बात करके देखते हैं। 1-2 दिन हमने फ़ोन पर बात की, और उसी दौरान उसने कुछ ऐसा कहा कि मेरी नज़र में उसकी कोई इज़्ज़त नहीं रह गई। उसने कहा " तुम्हारा कोई भाई नहीं है, सिर्फ तुम दो बेहेन हो, तो ऐसे घर में बहुत से लोग शादी करना पसंद नहीं करते"  उसका मतलब था कि मेरे मां पापा की ज़िम्मेदारी आगे जाकर दोनों बहनों पर आएगी, तो हमारे ससुराल वालों को ये अच्छा नहीं लगेगा।और अगर वो ये ज़िम्मेदारी ले रहा है मेरे साथ तो अहसान कर रहा है मुझ पर। उस दिन उसकी सोच जानकर मैं हैरान रह गई, और बहुत बुरा भी लगा। मुझे लगा किस जमाने की बातें कर रहा है ये। मैंने मना कर दिया उसे। 

तो क्या हुआ की मेरा कोई भाई नहीं है। मुझे मेरे माँ पापा ने इस लायक बनाया है कि मैं अपना और उनका खयाल रख सकती हूँ। किसी के अहसान की हमें ज़रूरत नही है।

(आज मैं एक पत्नी, बहु, और माँ हूँ।पर सबसे पहले मैं एक बेटी हूँ, और ये बेटी अपने माँ बाप को कभी अकेला नहीं होने देगी, ये मेरा खुद से और उनसे वादा है।)

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