Life of working Bahu
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|   Jul 26, 2017
Life of working Bahu

पल्लवी एक कामयाब महिला होने के साथ साथ सोसाइटी में अपनी एक पहचान रखती है | उसने अंतराष्ट्रिये स्तर पर छात्रवृति मिली और उसने Masters In Public Health की पढाई विदेश जा कर पूरी की | कई लोगों ने उससे सलाह दिया यही शादी करके बस जाओ क्या रखा है भारत में | माँ पिता की देखभाल के लिए यही से पैसे  भेज दिया करना | मगर वो नहीं मानी, छात्रवृति लेते समय जो उसने अपने देश लौटने का वादा किया था वो उसे वहां रुकने नहीं दिया | वो वापस अपने देश आई | नौकरी ढूंढने में काफी परेशानी हुई मगर वो आगे बढ़ रही थी | कभी कभी उसे अकेलेपन और एक दोस्त की जरुरत महसूस होती थी | उसे वो दोस्त मिला भी रिषभ |  एक मिडिल क्लास फॅमिली में पला बढ़ा मगर जब अपने माँ और बहनों के प्रति उसकी सोच को देखा तो मन में उसके लिए इज्ज़त होने लगी मगर तब तक वो मुझे शादी के लिए सही नहीं लग रहा था और अपने पैरों पर खड़े होने की वजह से  शादी करो इसका कोई दबाव भी नहीं था | रिषभ ने समाज से लड़कर अपनी दोनों बहनों को अच्छी शिक्षा  दिलवाई और बाद में उन्हें नौकरी करने के लिए दिल्ली भी भेजा | जब उसने शादी के लिए प्रस्ताव रखा तो मैं भी उसके परिवार से जा कर मिली मुझे लगा इनके रहने के तौर तरीके सोच मुझसे बिलकुल नहीं मिलते | उसके माँ की सोच  एक टिपिकल indian बहु से जो होनी चाहिए वो थी | पिता घर में  ही रहा करते थे मगर सास बहु सीरियल  के दोनों जबरदस्त फैन  फौलोवर थे | मैं शादी के लिए तैयार नहीं हुई क्योंकि मुझे लगा मैं अपनी नौकरी नहीं छोड़ सकती क्योंकि मुझे मेरे माँ बाप की भी जिम्मेदारी उठानी थी | मैंने जब रिषभ को अपने मन की शंका बताई तब उसने कहा की आज के समय में इस तरह की बातें कौन सोचता है हम एक काम करने वाली रख लेंगे दोनों जन अच्छा कमा  रहे हैं कोई परेशानी नहीं होगी |मुझे उसकी बातों  पर विश्वाश नहीं हो रहा था और एक अजीब से डर के साथ मैंने उससे शादी कर ली | दो महिना काफी अच्छा बिता क्योंकि मैं भी जोश में थी सुबह उठकर खाना बनाना शाम को 8 बजे लौट कर फिर से खाना बनाना और बाकि के लोग ऐसे बर्ताव  कर रहे थे जैसे ये सिर्फ मेरा काम | मेरी सास थोडा बीमार रहती थी मगर ज्यादातर मन से क्योंकि वो घर की जिमेद्दरियों में हाथ नहीं बटाना चाहती थी | बेटियां भी दोनों माँ के ऊपर गई थी जो सिर्फ अपने फ्यूचर को सिक्योर करने में लगी हुई थी मैं और उसका भाई जो कर रहें थे वो हमारा फ़र्ज़ था और उनका डिमांड करना | रिषभ माँ का प्यारा और आज्ञाकारी बेटा था जो मुझसे शादी करके माँ बाप को दुखी किया इसलिए वो चुप रह कर उनको खुश करने में लगा रहता था रिषभ की माँ और बहन का मेरे प्रति जो बर्ताव था ये उसे दिख  नहीं रहा था या देखना नहीं चाहता था | मेरे जॉब में मुझे काफी टूर करने होते हैं मैंने  रिषभ को कहा maid रख लेते है लेकिन वो  तैयार नहीं हुआ " अरे सब मिल कर कर लेंगे न चार लोग तो हैं " जब मेरी बेटी हुई उसके बाद वो maid रखने के लिए तैयार हुआ मगर सिर्फ घर के कामों के लिए दोनों वक़्त का खाना बनाना अभी भी एक जंग   के जैसा था  | मेरी सास maid को परेशां करने लगी ताकि वो काम छोर कर चली जाये मगर मेरे बर्ताव के वजह से maid ने काम नहीं छोड़ा बाद में मुझे अहसास हुआ की उसका मुझसे शादी करना कोई प्यार मोहबत नहीं  बल्कि मैं कमाती थी उसके लिए एक सहारा  बन सकती थी उसके जिमेदारियों और सपनो  को शेयर करने में और ये सच  हुआ भी | शादी के पहले साल में ही उसने पुराने घर को तुड़वाकर नया घर बनवाया जिसके लिए मेरे पास जितने पैसे जमा थे सब ले लिए मुझे भी लगा चलो घर बन जायेगा तो सबको थोडा आराम होगा | मुझे दुःख तब ���ुआ जब मेरे सास ससुर और रिषभ ने अपने रिश्तेदारों को ये बताया की घर को बनाने  में मैंने कोई मदत नहीं की और उन लोगों को मेरे पैसे  से कोई मतलब नहीं | मेरे सास ससुर अक्सर घर में छोटेबातों पर झगडा सुरु कर देते हैं और मेरा पति भी उनके बातों में आ कर बुरा सुलूक करता है मैं पढ़ी लिखी हूँ मेरी अपनी पहचान है दूसरों को मैं सलाह देती हूँ ऐसे लोगों के बिच  में नहीं रहना जहाँ आपको लगे की जिन्दगी रुक गई है | मैंने कई बार रिषभ को डाइवोर्स की बात कहीं मगर उसका अजीब सा इमोशनल ड्रामाशुरू  हो जाता था  बच्चे से दूर नहीं रह सकता और न जाने क्या क्या | हमारे झगडे और सास ससुर के व्यवहार को मेरी ३ साल की बेटी भी अब समझने लगी हैं | भारतीय परिवेश में गलत आदमी से शादी करके एडजस्ट करना समाज को बुरा नहीं लगता मगर डाइवोर्स की बात पर इनकी आँखे तन जाती हैं | पल्लवी को यकीं है की वो इस परिस्थिति से बाहर निकल जाएगी |पल्लवी की कहानी सुनकर  सिर्फ उन लड़कियों को सलाह देना चाहती हूँ की शादी अपने शर्तों पर करें प्यार होना  अच्छी  बात है मगर कहीं आपको ये प्यार कमज़ोर   न बना दे आपकी आज़ादी, आताम्विश्वाश को न तोड़ दे, आपकी कमाई पर सिर्फ आपका हक़ है और आपका फैसला होना चाहिए, अपने भविष्य के लिए जरुर बचत करें पति का साथ दें  मगर उसकी रेस्पोंस्बिलिटी को पूरा करने के लिए आप अपना और अपने बच्चों का भविष्य मत ख़राब करें | जो रिश्ता पैसे के लिए बना हो वो जरुरत तक हीं साथ देगा | ये एक पल्लवी की कहानी नहीं ये हर उस कमाऊ बहु की कहानी है जो फैसला लेने में दिल से ज्यादा सोचती हैं | 

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