हमारी पहली शिफ्टिंग !!!
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|   Jun 30, 2017
हमारी पहली शिफ्टिंग !!!

शादी के इन तीन सालों में गृहस्थी का सामान कितना बढ़ गया था आज अहसास हो रहा था । वो दिन भी आ ही गया जिससे डर लगता था ।ये घर छोङना था ...मकानमालिक के लङके की शादी थी...दूसरा घर देख लिया था बस तीन किलोमीटर दूर था इस घर से।

आर्यन सवा साल का ही था तो हमारे लिये खुद पैकिंग करना आसान नहीं था। शिफ्टिंग के लिये सबसे पहले अग्रवाल पैकर्स मूवर्स से बात की क्योंकि पङोस वाले गुप्ता जी के तबादले पर उनकी शिफ्टिंग उसी ने कराई थी और एक कप भी नहीं टूटा था।लेकिन लोकल शिफ्टिंग के लिहाज से उनके रेट ज्यादा लगे तो 2-3 अन्य कंपनियों से बात की।एक लोकल कंपनी जिसके मालिक का नाम भगेलू था, से बात तय हो गयी।

भगेलू ने भी हमें पूरा आश्वासन दिया कि चिन्ता न करें , आपका सामान सही सलामत शिफ्ट करेंगे।हम सब पैक करेंगे ।अपने कीमती सामान पैक कर लेना ,हो सके तो थोङा किचन का सामान समेट लेना।

मम्मी अपने अनुभव के आधार पर बोल रहीं थीं कि परदे तो निकाल लो ,थोङा किचन का बिना जरूरत का सामान तो पैक कर लो,पर हमने उनकी एक न मानी।आराम से डिनर किया ,टीवी देखा ।फिर भगेलू की बात का अक्षरश: पालन किया और निश्चिंत होकर सो गये।हालांकि मम्मी चिन्ता के कारण न सो सकीं।

सुबह आराम से उठकर नाश्ता किया ,टीवी देखा फिर कीमती कपङे और आभूषण एक सूटकेस में रख लिये।मम्मी दोपहर के खाने की तैयारी में लग गयीं और हम आर्यन को नाश्ता कराकर भगेलू का इंतज़ार करने लगे।भगेलू तय समय से आधा घण्टा लेट आये।साथ में मैले कपङों मे चार दिहाङी के मजदूरों को लाया।हमारी उससे बहस भी हुई कि ये आदमी तो प्रशिक्षित भी नहीं है।

अब भगेलू ने सामान की ओर देखा और अपना सिर पीट लिया ,बोला "हे भगवान ,सारा सामान वैसे का वैसा रखा है,आपने तो कुछ भी नहीं किया।हम चार घण्टे में एक घर की शिफ्टिंग कराते हैं ,आपकी शिफ्टिंग में ही शाम हो जायेगी।माफ करिये हम आपकी शिफ्टिंग नहीं कर पायेंगे।"

अब हमारी बारी थी भगेलू को मनाने की- "भगेलू भैया ,आपने जैसा बोला था हमने वैसा ही किया।अब शिफ्टिंग तो आपको ही करानी है।छोटा बच्चा भी है आप समझो ना ।" बहुत गुस्सा आ रहा था पतिदेव पर सच में...किसी तरह भगेलू पाँच सौ रूपये ज्यादा लेकर काम करने को तैयार हुआ।

हम अब भी असमंजस में थे कि क्या क्या सामान साथ में रखें ।शुरू में तो भगेलू व उसके आदमी हमारी सुनते रहे,फिर उन्होंने सभी सामान अपने मन से चादर और परदों की पोटली बना बना के पैक कर दिया।

अब सारी पैकिंग के बाद घर से निकलने की बारी आई तो हमारी चप्पलें नदारद थीं ( हम महाराष्ट्र में थे जहाँ चप्पलें बाहर ही रखते हैं)मैं और पति एकदूसरे पर दोषारोपण करने लगे कि इतना भी ध्यान नहीं दिया ,हालांकि अब एक ही उपाय था कि ट्रक से चप्पलें निकाली जायें ।पर निकालें तो निकालें कैसे,इतनी पोटलियाँ और पीछे की तरफ बङे बङे सामान...अब हम बिना चप्पलों के ही कार में बैठ गये। जब नये अपार्टमेंट में पहुँचे तो नीचे वाले   एक घर में कोई कार्यक्रम था इसलिये बहुत भीङ थी ...हमारे वाले तल के पङोसी , जिनसे हम मिल चुके थे वो भी वहीं मौजूद थे।

अब नंगे पैर कार से उतरते हुये तो हमें बहुत ही शर्मिंदगी हो रही थी...मन ही मन मैं भगेलू पर गुस्सा हो रही थी ...और  इस तरह हम बिना चप्पल अपार्टमेन्ट में प्रविष्ट हुये...तो ये थी हमारी अनेक उतार चढ़ाव भरी यादगार पहली शिफ्टिंग ,जिसको यादकर आज छह साल बाद भी हम हँसते हँसते लोटपोट हो जाते हैं...

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