एक नारी  ऐसी भी.........
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|   Jul 05, 2017
 एक नारी  ऐसी भी.........

आज तक हम लोगो ने लड़कियों पर हो रहे अत्याचार के बारे मेंं सुना और देखा हैं ये कहानी एक लड़के की है जिसकी बीबी ने ही उस पर जुल्म किआ और उसके प्यार को उसकी कमजोरी .......... बहुत  खुश था वीर आज उसकी शादी थी उसके माता पिता और 2 बड़े भाई और उनकी बीबी इतने ही लोग थे परिवार मे वरमाला डालते समय उसने कभी सोचा भी नहीं होगा की उसकी जिंदगी कितनी बदलने वाली थी. नयी दुल्हन की घर में एंट्री हुई जैसा की हर घर में होता है रस्मरिवाज शुरू हुए आखिरकार मुँह दिखाई की बारी आयी जो लेेडीज संगी साथ शुरु हुुई लेकिन ये क्या एक लेडी मुँह देखने आयी बहु ने तो घुगट ही पकड़ लिया बोली मुझे शर्म आ रही तो मुँह नहीं दिखाउंगी कई बार सबके समझाने पर रसम पूरी हुई सबको लगा कोई नही बहु जय्दा शर्मीली है रस्म पूरीु हुई 2 दिन आराम से निकल गए ! बाकी अगली सुबह नजारा कुछ यु था बहुरानी जी ने खुद को कमरे में बंद कर रखी थी नास्ता भी नहीं किआ सास-ससुर दरवाजे के बाहर नास्ता लेकर, खड़े थे की प्रिया कुछ खा लो आखिर कई मिन्नतों के बाद दरवाजा खुला पूछने पर भी जब बड़ी मुश्क़िल से बताया मुझे अपनी फॅमिली की याद आ रही है तो जाना है सबको लगा घर छोड़कर आयी है तो सबकी याद आ रही होगी.... प्रिया केे पापा को फोन कर बुलाया गया बो चली गयी...अभीतक तो सब सामान्य सा ही लग रहा था फोन से अच्छे से बात करती सब सामान्य फिर दिन आया बहु को लाने का जैसे ही घर आयी ,और उसने रंग दिखाना शुरु किआ उसकी जेठानी खाना बनाये और घर का दोनों लोग मिलकर काम करे जैसा हमेशा से करती थी घरबालो के साथ हसी खुशी रहती थी ..अब घर एक और बहु आयी थी सबसे छोटी थी प्रिया तो ससुराल में सबका प्यार मिला जब तक किसी ने प्रिया से काम नहीं करवाया तब तक ठीक था लेकिन जब कोई भी संयुक्त परिवार में रहता है तो आप सबने देखा होगा सब मिलकर घर के काम करते है प्रिया रूम से आये खाना खाये और चली जाये और सारा दिन रूम में रहे बाकि बहुये और सास काम करे कई दिनों बाद सास ने प्रिया से कहा अपनी जेठानी के साथ काम में थोड़ा मदद करा लिआ करो बो बोली देखिये मम्मी जी काम नहीं आते और मेँ खाना नहीं बनाने बाली नौकरानी नहीं हु ....कई बार समझाने पर जब नहीं मानी तो बाकी 2 बहु भी बोली हम भी नौकर नहीं जो काम हम करे और ये आराम फिर प्रिया के पापा से बात हुई बो बोले आप जानो और प्रिया हम बीच में नहीं पड़ते आख़िर लड़की के सससुराल की बात है जायदा परेशानी है तो हमारी बेटी को अलग कर दो बड़ी फैमिली में शायद उसे एडजस्ट  करने में परेशानी हो रही हों फिर वीर से बताया गया बो तैयार नहीं हुआ पर रोज उसका नया रूप देख सबकी खुशी को बो अलग रहने लगा उसी घर में .. अब वीर की बारी थी ऑफिस से घर आये और खाना भी ना मिले कुछ दिन होटल से आया पर हमेशाा कोई होटल से नहीं खा सकता वीर ऑफिस आये और खुद ही खाना बनाये इसी बात को लेकर दोनों में झगड़े होने लगे जब मन हो बैग लेकर प्रिय मायके चली जाये फिर एक दिन दोनों में झगड़ा होने लगा फॅमिली के लोग भी एक ही घर में रहते थे तो सब बहार से देखने लगे लेकिन प्रिया ने चाकू से अपना हाथ काट लिआ और पुलिस को बुलाया और पतिदेव को अंदर करवा दिया दहेज़ उत्प्रीड़न और घरेलु हिंसा के तहत वीर और उसकी सारी फैमिली को 2 दिन चौकी पर रखा गया क्योकि लड़की की बात मानी जाती है इन मामलो में सो सब को अंदर करवा दिआ 2 दिन बाद बहू ने जाकर बोला की सर चेतावनी दे कर छोड़ दे है तो मेरी फैमिली ऐसा ही हुआ सब घर आये और अब नई कहानी थी अब उसका कहना था प्रॉपर्टी मेरे नाम करवा ���ीजिये ...अब सब समझ चुके थे उसको सिर्फ प्रॉपर्टी से मतलब था लेकिन वीर उसका क्या दोष था लड़की के माता पिता लड़की के साथ थे आये दिन घर में पुलिस आती वीर को ले जाती ना घर से प्रिया कही जाती और ना वीर को जाने देती कहा सुनी हो तो पुलिस की धमकी 2 साल हो गए अब लेकिन वीर की हालत आज भी वैसी है बस जब जायदा परेशान हो जाता है तो कही कुछ दिन को लापता हो जाता है . हमारे देश के कानून में औरतो की ही सुनवाई ज़्यदा होती है जो सही भी है ........ लेकिन कुछ लड़कियों इसका गलत इस्तेमाल कर रही है पुलिस को भी दोनों पक्षों की बात सुननी चाहिए ये नहीं की लड़की गलत सही कुछ भी करे और लड़का और उसकी फैमिली असाहय रहे और बो अपनी प्रॉपर्टी नाम भी करा दे प्रिया के तो उसकी क्या गेरेंटी की बाद में प्रिया कोई बखेड़ा नहीं करेगी .........औरतो पर अत्याचार गलत है लेकिन कोई औरत अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करे ये भी तो सही नही.......

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