डे-केयर ही अच्छा है मेरे बेटे के लिए
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|   Mar 07, 2017
डे-केयर ही अच्छा है मेरे बेटे के लिए

पिछले कुछ समय से मेरे मन में हमेशा ही तूफान चलता था कि क्या स्कूल के बाद डे-केयर सही है मेरे बेटे के लिए? क्या मुझे जॉब छोड़ कर उसके साथ रहना चाहिए? मैं कई तरीकों से बेटे को पूछा करती थी कि उसे क्या पसंद है लेकिन कुछ संतुष्ट करने वाला उत्तर नहीं मिल रहा था |

कुछ दिन पहले किसी कारण से मैं काफी समय घर पर रही तो उसको भी डे-केयर नहीं भेजा और उन्हीं दिनों मुझे अपना जवाब मिला | मैं ज्यादा से ज्यादा उसके साथ रहती, खेलती, टाइम स्पेंड करती पर थोड़ा बिजी या किसी काम में लगती तो बोर  होना शुरू हो जाता, यहां तक कि अगर घर से बाहर कहीं जा रहे हैं तो घर से निकलते ही बोलना शुरू मम्मा आप तो ड्राइव कर रहे हो पर मैं तो बोर हो रहा हूं, आप खाना बना रहे हो मैं तो बोर हो रहा हूं |

आखिरकार एक दिन उसकी सब्र का बांध टूट पड़ा और वह बोला आप बहुत दिन से ऑफिस नहीं जा रहे हैं आप का काम पेंडिंग होगा, आपके फ्रेंड आपको मिस करते होंगे, मैंने उत्सुकता से पूछा कि आप इतनी चिंता क्यों कर रहे हो तो बेटा उदास होकर कहने लगा क्योंकि मेरे फ्रेंड भी मुझे मिस कर रहे होंगे मुझे भी  वहां बहुत काम होता है हम सब बच्चे गेम खेलते हैं, मस्ती करते हैं, पर घर पर तो मैं…

मुझे मेरा जवाब मिल चुका था कि अब उसकी आदत हो चुकी है, जैसे ऑफिस जाना मेरा रूटीन था वैसे ही डे-केयर जाना उसका रूटीन बन चुका था, जिसे वह बहुत इंजॉय करता है, सही मायने में मुझे भी अच्छा लगा घर पर टीवी, गैजेट्स,  मोबाइल  में अपना समय बर्बाद करने से अच्छा है कि वह डे-केयर में कुछ सीख रहा है अपनी उम्र के बच्चों के साथ, एक वर्किंग मम्मा को और क्या चाहिए?

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