मेरी बेटी 
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|   Jan 28, 2017
मेरी बेटी 

29जनवरी 2011की सुबह मेरे जीवन में बहुत खास थी। मेरी बेटी का जन्म हुआ और मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उस समय की अपनी भावनाओं को शब्दों में बाँधने की कोशिश कर रही हूँ                                                                                   

सुबह सवेरे खिल जाता है जैसे आँगन में फूल कोई 

फूलों की मुस्कुराहट लिए यूँ आई मेरे जीवन में बिटिया मेरी 

असीम वेदना को सहकर जब मैंने पाया उसे 

तो यूँ लगा फूलों से भर गई झोली मेरी

ईश्वर का वरदान है वो मेरे लिए जिसके छूूने से खिल उठी रूह मेरी 

उसको देखकर लगा जैसे कि उसके बिना अधूरी थी जिंदगी मेरी

उसको मैंने अपनी बांहों में जब जब 

उसके चेहरे में नजर आया रब मुझको 

यूँ लगा पूरी हो गई इबादत मेरी 

हर पल हर लम्हा मैं उसके संग जीने लगी 

धीरे-धीरे वह बड़ी होने लगी 

उसके संग बढने लगी खुशियां मेरी 

उसको ऊंगली पकड़कर जब मैं चलना सिखाने लगी 

यूँ लगा अपने जीवन को मैं एक नई राह पर ले जाने लगी

उसको अपनी गोद में लेकर जब सुलाने लगी

यूँ लगा एक फरिश्ते को मैं चैन सुकुन दिलाने लगी

सोचती हूँ मेरी बिटिया जब बड़ी हो जाएगी 

संस्कारों से परिपूर्ण अच्छा इंसान वो बन जाएगी 

पढ लिखकर नाम वो मेरा रोशन करेगी   

कौन कहता है बेटी बेटा नहीं बन पाएगी 

  22अक्तूबर 2013फिर से मेरे जीवन में एक खुशी आई जब मेरी दूसरी बेटी का जन्म हुआ। बहुत खुश थी मैं। पहली बेटी के जन्म के समय जो अहसास जो खुशी मन में थी वो दूसरी बेटी के समय भी थी लेकिन इस दुनिया की सोच को देखकर बहुत हैरानी हुई। एक बेटी भी एक बेटे की तरह अपनी माँ का अपने पिता का अंश होती है, फिर वो किसी परिवार की वारिस क्यूँ नहीं बन सकती?  क्या यह सोच कभी बदल पाएगी?   मुझे गर्व है कि मैं दो बेटियों की माँ हूँ। लोग कहते हैं कि बेटी का पालन पोषण बहुत जिम्मेदारी का काम है। मुझे बहुत खुशी होती है यह सोच कर कि मैं कितनी खास हूँ कि ईश्वर ने मुझे इस जिम्मेदारी के लिए चुना। 

आओ मिल कर यह सोच बदले.....

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