" ब्लू व्हेल :- मौत की सौदागर "
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|   Aug 03, 2017
" ब्लू व्हेल :- मौत की सौदागर "

आखिर किस समाज का हिस्सा है हम ,कल से दिमाग बस इसी सवाल पर अटका है ,सुरक्षा नाम की कोई चीज होती भी है । मैं इस बात को लेकर बहुत संशय में हूँ ।

खुद को पता नहीं क्या समझता है इन्सान ,पर उसकी औकात आकाशगंगा में शामिल उन अनगिनत तारों जैसी ही है जिनकी किस्मत ही टूट कर बिखर जाना है ,जानती हूँ की एक दिन सबको मरना ही है ,कोई अमृत पी कर नहीं आया है । पर प्राकृतिक मौत में और हत्या में फर्क तो होता है ना , हम आज तक बलात्कार,हत्या ,आंतकवाद ,प्राकृतिक आपदा ,घरेलू हिंसा ,नक्सल वाद को ही हल नहीं कर पाये है । वहीं दूसरी तरफ शातिर अपराधी सिर्फ एक गेम की मदद से आपकी जिन्दगी के साथ गेम खेल रहे है ,पहली बार जब सुना तो विश्वास ही नहीं हुआ क्या सच में ऐसा कोई खेल है ,जिसके खिलाड़ी बनते ही आप अपनी मौत के कागजों पर दस्तखत कर देते है ।पर सांच को आंच नहीं ,ब्लू व्हेल सच में एक ऐसा गेम है जिसके खत्म होने पर आप आत्महत्या कर लेते है ।  कितना खतरनाक है ना यह..... आजकल की भागती दौड़ती जिन्दगी में डिप्रेशन में आ जाना कोई बड़ी बात नहीं ,और यह खेल आपको इसी तरह से जाल में फँसाता है ।जब आप इस गेम को खेलना शुरु करते है तो आप खुद को डिप्रेशन से दूर ले जानें की कोशिश कर रहे होते है पर होता कुछ और ही है  खूनी ब्लू व्हेल खेल की शुरुआत रूस से हुई है। मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप के जरिए खेले जाने वाले इस खेल में 50 दिन खिलाड़ी को अलग-अलग टास्क मिलते हैं।रोज टास्क पूरा होने के बाद अपने हाथ पर निशान बनाना पड़ता है जो 50 दिन में पूरा होकर व्हेल का आकार बन जाता है. और टास्क पूरा करने वाले को खुदकुशी करनी पड़ती है। यह इंटरनेट पर खेला जाने वाला गेम है, जो दुनियाभर के कई देशों में उपलब्ध है. इस गेम को खेलने वाले शख्स के सामने कई तरह के चैलेंज रखे जाते हैं. ये सभी चैलेंज 50 दिन के अंदर पूरे करने होते हैं. इसमें अंतिम चैलेंज के रूप में आत्महत्या को रखा गया है। इंटरनेट पर खेले जाने वाले इस गेम में 50 दिन तक रोज एक चैलेंज बताया जाता है. हर चैलेंज को पूरा करने पर हाथ पर एक कट करने के लिए कहा जाता है.चैलेंज पूरे होते-होते आखिर तक हाथ पर व्हेल की आकृति उभरती है. चैलेंज के तहत हाथ पर ब्लेड से एफ-57 उकेरकर फोटो भेजने को कहा जाता है. हॉरर वीडियो या फिल्म देखने के लिए चैलेंज है. हाथ की 3 नसों को काटकर उसकी फोटो क्यूरेटर को भेजना भी एक चैलेंज है. ऊंची से ऊंची छत पर जाने को इस गेम में कहा जाता है. व्हेल बनने के लिए तैयार होने पर अपने पैर में 'यस' उकेरना होता है.तैयार होने पर खुद को चाकू से कई बार काटकर सजा देना भी चैलेंज का हिस्सा है. सभी चैलेंज पूरे करने वाले को खुदकुशी करनी पड़ती है। इस गेम के पीछे एक से अधिक लोग हैं, लेकिन फिलहाल जो गिरफ़्त में है, उसका नाम है फिलिप बुदेकिन. 21 साल का फिलिप रूस का रहने वाला है और माना जाता है कि रूस से ही इस जानलेवा खेल की शुरुआत हुई थी. गेम के एडमिन में से एक फ़िलिप को इसी साल मई में नौजवानों को ख़ुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था. 'पीड़ित हैं कूड़े की तरह'

हैरानी की बात यह है कि फिलिप ने रूसी प्रेस से कहा था कि उसके पीड़ित 'जैविक कूड़े' की तरह हैं और इस तरह वह 'समाज को साफ़' कर रहा है. उसे सेंट पीटर्सबर्ग की जेल में रखा गया है. बीबीसी की रूसी सेवा के पत्रकारों के मुताबिक बुदेकिन ने पहले ख़ुद को निर्दोष बताया था और कहा था कि उसका कोई बुरा मक़सद नहीं था और वह सिर्फ मज़े ले रहा था. रूसी अख़बार नोवाया गैज़ेटा के मुताबिक, बुदेकिन जैसे एडमिन गेम में हिस्सा लेने वालों से उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इसके सबूत मिटाने के लिए कहते थे. जांच अधिकारी एंटन ब्रीडो के मुताबिक, उन्हें एक ऐसे टीनएजर ने सबूत दिए थे, जो गेम के आख़िरी चरण में था, लेकिन उसने जान नहीं दी. ब्रीडो कहते हैं, 'बुदेकिन बखूबी जानता था कि मनचाहे नतीजे कैसे मिलेंगे. उसने 2013 में ये काम शुरू किया था और फिर उसने अपने हथकंडे सुधारे और ख़ामियां दूर कीं. फिलिप और उसके साथियों ने सबसे पहले वीके (सोशल नेटवर्क) ग्रुप पर बच्चों को डरावने वीडियोज़ के ज़रिये आकर्षित किया.' ब्रीडो के मुताबिक, 'वह ज़्यादा से ज़्यादा ऐसे बच्चों को जाल में फंसाते थे जिसके मनोविज्ञान से आसानी से खिलवाड़ किया जा सके.' हालांकि माना जाता है कि इस गेम के पीछे वह इकलौता शख़्स नहीं है. बाकी लोगों की तलाश की जा रही है। बेंगलुरू के सेंटर फ़ॉर इंटरनेट ऐंड सोसाइटी के विशेषज्ञ उद्भव तिवारी बताते हैं, "यह ऐसा गेम नहीं है जिसे मोबाइल आदि पर डाउनलोड करके खेला जा सके और इस चैलेंज में इंटरनेट का किरदार एकदम ही अलग है. यहां ग्रुप के किसी सदस्य के द्वारा कुछ चैलेंज दिए जाते हैं और खेलने वाला इस चैलेंज को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर ले सकता है. यह चैलेंज किसी भी प्लेटफॉर्म पर दिया और लिया जा सकता है. न केवल इंटरनेट, वेबसाइट या सोशल मीडिया पर बल्कि एक बंद कमरे में बैठे लोगों के बीच भी ये ब्लू व्हेल चैलेंज खेला जा सकता है." इस तरह के गेम मे जो भी टास्क दिए जाते हैं, उससे खेलने वाले की उत्सुकता बढ़ने के साथ ही यह भावना भी पैदा होती है कि 'मैं यह करके दिखाऊंगा'। उसे यह पता ही नहीं होता कि उसका अंजाम क्या होगा।" आप भी अपने आस पास नजर रखिये ,क्या पता हमारा कोई अपना इस खूनी खेल का हिस्सा बना हुआ हो ।आत्महत्या करनें वालों के पास सबसे ज्यादा अपनों की कमी होती है ।उस अपने की जिससे वो दिल की बात कह सके ।कोशिश किजिये अगर किसी अपने के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन आया है । तो आप उसके दिल की बात जान सके ।यकीन माने आत्महत्या बहुत कम हो सकती है ,पर एक दोस्त एक हमदर्द अगर साथ हो तो ...... " नेहा अग्रवाल नेह "

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