" जादूगरनी "
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|   Jun 13, 2017
" जादूगरनी "

" फिर क्या सोचा है आपने दादीसा " 

बड़ी बीन्दणी ने अपने सर पर पल्लू टिकाते हुए उत्सुकता से पूछा । " अरे सोचना क्या है ??

अभी देखना इस अमेरिका पलट बहू को नानी ना याद दिलाई तो कहना ,जादूगरनी कहीं की मेरे भोले भाले पोते को फंसा लिया ।" तभी नयी बहू ने पूरे साज सिगांर के साथ आकर दादीसा के पैर छू लिए । अमेरिका पलट बिन्दणी को पारम्परिक लिबास में देखकर दादीसा मुग्ध सी हो गयी और अचानक ही उनका हाथ बिन्दणी के सर पर चला गया और उन्होनें नयी बिन्दणी को आशीर्वाद दे दिया। " सदा खुश रहो ।"  तभी साथ बैठी दादीसा की सहेली ने उनको कोहनी मारी ।

और दादीसा फिर से रौब में आते हुए बोली । " सुन बिन्दणी, आज थारी पहली रसोई की रस्म है ।

यह सूची है उसकी ,जो भी तु्म्हें आज बनाना है ,

और हाँ वो भी अकेले । बिन्दणी ने " जी दादीसा "बोला ,और रसोई की राह पकड़ ली । बिन्दणी के जाते ही दादीसा की सहेली मुँह पर पल्लू रख कर हँसते हुए बोली । " देखना अभी सारा घर जलने की बू से भर जायेगा । " अभी सब इन्तजार कर ही रहे थे की पूरा घर बेसन की सोधीं सोधीं महक से महक उठा । नयी बिन्दणी ने भोजन तैयार कर सबको जिमने के लिये बुला लिया ।सब हैरान परेशान थे । दादीसा सब कुछ चख कर बोली ,

अब तो मुझे पक्का विश्वास हो गया है ।

तू जादूगरनी ही है ।। दादीसा की बात सुनकर बिन्दणी मुस्कुराते हुये बोली । " ना दादीसा यह सब इस मोबाइल की करामात है ।।"  बिन्दणी की बात सुनकर दादीसा कुछ देर तक बहुत सारे व्यंजन मोबाइल मे देखती रही ,और फिर मुस्कुरा कर बोली । " सुन बिन्दणी मुझे भी विदेशी खाना बनाना सिखायेगी ना ,

तेरे दादूसा कहते है ।

हमेशा कुछ नया जरूर सिखना चाहिए।" " जरूर दादीसा " कहते हुये नापसंदीदा बिन्दणी दादीसा के गले लग गयी । दादीसा के बाहों का घेरा भी और तंग हो गया था । " नेहा अग्रवाल नेह "

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